करेंसी रिंग में डॉलर के मुकाबले पस्त हुआ रुपया! मजबूत GDP ग्रोथ के बाद क्यों आई गिरावट, जानें वजह
सोमवार के कारोबारी दिन भारतीय करेंसी मार्केट में गिरावट देखने को मिली. रुपया की कीमत डॉलर के मुकाबले फिसककर 89.76 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गई. जानें इसके पीछे की वजह...

Indian Rupee fall: सोमवार के कारोबारी दिन भारतीय करेंसी मार्केट में गिरावट देखने को मिली. रुपया की कीमत डॉलर के मुकाबले फिसककर 89.76 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच गई. रुपया अपने दो सप्ताह पहले बने लो रिकॉर्ड 89.49 से भी नीचे फिसल गया.
चौंकाने वाली यह है कि, यह गिरावट ऐसे समय में आई है, जब पिछले दिनों भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे तिमाही में 8.2 प्रतिशत की शानदार जीडीपी ग्रोथ दर्ज की हैं. यानी कि, एक ओर तो देश की जीडीपी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, वहीं रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है...
रुपये में क्यों आई गिरावट?
रुपये में हो रही इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं. बाजार जानकारों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो द्वारा लगातार हो रही बिकवाली इसका एक कारण हो सकती हैं. विदेशी निवेशक भारतीय बाजार पर दांव लगाने से परहेज कर रहे हैं या फिर सतर्क होकर निवेश कर रहे हैं. साल 2025 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी मार्केट से 16 बिलियन डॉलर से अधिक की निकासी की हैं. इतनी बड़ी निकासी से करेंसी पर दबाव बड़ जाता है.
साथ ही भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता को लेकर अभी तक कोई परिणाम नहीं आया है. अमेरिकी सरकार के द्वारा लगाए 50 फीसदी टैरिफ का असर ट्रेड बैलेंस पर देखने को मिल रहा है. अक्टूबर महीने में देश का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचा. जिसके कारण डॉलर की मांग में बढ़ोतरी हुई और रुपया कमजोर हुआ.
रुपये में गिरावट का क्या होगा असर?
रुपया कमजोर होने का असर सीधे लोगों की जेब पर पड़ता हैं. डॉलर में खरीदी जाने वाली वस्तुओं की कीमत बढ़ जाती हैं. इसका सबसे बड़ा प्रभाव इंपोर्ट कॉस्ट पर दिखता है. कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोना, मशीनरी और फर्टिलाइजर्स की कीमतों में इजाफा हो सकता हैं. इन सभी की कीमत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाती हैं.
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