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2030 तक डीजल-पेट्रोल व्हीकल फ्री देश बनाने की सरकार की मंशा, ई-व्हीकल पर फोकस
इंडिया इंक ने भी इलेक्ट्रानिक वाहनों को बनाने के लिए कमर कस ली है. इंडिया इंक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बैट्री से चलने वाले कारों और ऑटो बनाने में भी बड़ा निवेश करने पर विचार कर रहा है.

नई दिल्ली : इन दिनों बैट्री से चलने वाले वाहनों की मांग बढ़ती जा रही है. ई-रिक्शा के सड़कों पर आने के बाद इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर संभावनाएं शायद और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं. साथ ही प्रदूषण को लेकर एनजीटी ने जिस तरह से डीजल वाहनों पर रोक लगाई थी उसे देखते हुए भविष्य में बैट्री से चलने वाले वाहनों की संख्या में इजाफा होने की संभावना है. इंडिया इंक ने कसी ज्यादा ई-वाहन के निर्माण के लिए कमर ऐसे में इंडिया इंक ने भी इलेक्ट्रानिक वाहनों को बनाने के लिए कमर कस ली है. इंडिया इंक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बैट्री से चलने वाली कारों और ऑटो बनाने में भी बड़ा निवेश करने पर विचार कर रहा है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने 50 से ज्यादा देशी विदेशी कंपनियों से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को देश में विकसित किए जाने के बारे में बात की है. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इस समय देश के वाहन उद्योग की बड़ी जरूरत है. अधिकारियों के अनुसार ओला और ऊबर जैसी कंपनियां भी तेजी से बैट्री चालित गाड़ियों और ई रिक्शे को लेकर पर लीज पर देने का विचार भी कर रही हैं. ई व्हीकल स्टेशन लगाने की कंपनियों की योजना सरकार के ई-वाहन प्रोग्राम से जुडे हुए एक टॉप अफसर के अनुसार टाटा पावर, एबीबी, एसीमई क्लीनटेक और कुछ डच फर्में ई व्हीकल स्टेशन स्थापित करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रही हैं. जबकि एक्साइड, अरमान और माइक्रोटेक बैट्री सप्लाईंग के लिए बल्क स्टेशन स्थापित करने के बारे में विचार कर रही हैं जिन पर मोटरसाइकिल वाले खाली बैट्रीरियों को छोड़कर नई बैट्रीरियां ले जा सकें. टाट पॉवर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड के चैयरमैन प्रवीर सिन्हा कहते हैं "कंपनी दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और साथ ही अन्य संभावित स्थानों पर भी चार्जिंग स्टेशन बनाने पर विचार कर रही है." पूरी दिल्ली में ई व्हीकल स्टेशन लगाने का खर्च सिर्फ 33 करोड़ रुपये सिन्हा के अनुसार एक फास्ट बैट्री चार्जिंग स्टेशन में करीब 25 लाख का इंवेस्ट करना होगा जबकि एक स्लो चार्जिंग स्टेशन बनाने में करीब 1 लाख का खर्चा आएगा. अगर 5 सालों में ई-वाहनों की बिक्री में बढत होती है तो ऐसे में 3 किलोमीटर के दायरे में करीब 300 चार्जिंग स्टेशन जरूरत होगें जिनमें कम से कम 5 चार्जिंग स्लॉट हों. ऐसे में पूरे दिल्ली में ये खर्चा करीब तैंतीस करोड़ तक आएगा. एनटीपीसी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन भी कर रही हैं स्टेशन लगाने पर विचार साथ ही एनटीपीसी और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन भी दिल्ली मेट्रो कार्पोरेशन के साथ मिलकर करीब आधा दर्जन शहरों में बैट्री चार्ज करने के लिए स्टेशन बनाने के बारे में बात कर रही है. एनटीपीसी के अधिकारी के अनुसार अभी देश में जो हालत बैट्री चालित वाहनों की है दरअसल वही हालत चार्जिंग स्टेशंस की भी है. दोनों ही अभी बेहद ही कम मात्रा में देश मे अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाए हैं. चूंकि अभी वाहनों की संख्या कम है इसलिए कंपनियां भी इस सेक्टर में जाने से डरती है. बैट्री चालित वाहनों के लिए जल्द आएंगे टेंडर सरकार जल्द ही बैट्री चालित वाहनों 2 व्हीलर्स, 3 व्हीलर्स और ई रिक्शों को संख्या बढाने के लिए टेंडर्स जारी करने वाली है और उम्मीद है कि बजाज ऑटो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीवीएस और पियाजियो एप के इस मामले में सबसे बड़ी बोली लगाने वाले हैं. बैट्री चालित वाहनों के लिए जल्द आएंगे टेंडर दरअसल सरकार 2030 तक देश के व्हीकल सिस्टम को पूरी तरह से ई- वाहनों के ऊपर आधारित कर देना चाहती है. ऐसे में सरकार 2 व्हीलर्स , 3 व्हीलर्स और सिटी बसों को बगैर बैट्री के कम दाम में बेचने की योजना बना रही है. बैट्रियों को लीज़ पर देने के बाद स्वैपिंग के जरिए चार्जिंग स्टेशन से पुरानी बैट्री को बदलकर नई चार्ज बैट्री ली जा सकेगी. इस योजना के उम्मीद है कि दिल्ली एक ई वाहन सिटी बनने की दिशा में एक कदम बढ़ा देगा.
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