क्यों चीन के साथ बढ़ रहा भारत का व्यापार घाटा? कहीं यह इकोनॉमी को खोखला तो नहीं कर देगा?
Trade between India and China: भारत एक्सपोर्ट के मुकाबले चीन से इम्पोर्ट ज्यादा कर रहा है इसलिए उसका व्यापार घाटा बढ़ रहा है. इससे देश की इकोनॉमी को नुकसान पहुंचने की आशंका है.

Trade between India and China: अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाया, तो भारत ने दूसरे रास्ते तलाशने शुरू कर दिए. इस क्रम में चीन के साथ भारत का कारोबार बढ़ा. बुधवार को चीनी कस्टम्स की तरफ से सालाना ट्रेड डेटा का खुलासा किया गया. इसके मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले चीन के लिए भारत के एक्सपोर्ट में 5.5 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है.
दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ने से बेशक गिरते ट्रेंड में सुधार हुआ है, लेकिन इससे ट्रेड डेफिसिट भी रिकॉर्ड 116.12 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. यह साल 2023 के बाद दूसरी बार 100 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है. 2024 में ट्रेड डेफिसिट 99.21 बिलियन डॉलर था, जिसमें भारत के लिए चीन का टोटल एक्सपोर्ट 113.45 बिलियन डॉलर था और भारत का चीन के लिए एक्सपोर्ट 14.25 बिलियन पर डॉलर पर स्थिर रहा.
बढ़ रहा है भारत का ड्रैगन के साथ कारोबार
कस्टम्स डेटा के मुताबिक, 2025 में दोनों देशों के बीच कारोबार 2025 में बढ़कर अब तक के सबसे हाई लेवल 155.62 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है. चीन के लिए भारतीय एक्सपोर्ट्स को आगे बढ़ाने के लिए पिछले कुछ सालों से जद्दोजहत की जा रही थी, जो अब पिछले साल जनवरी से दिसंबर के बीच बढ़कर 19.75 बिलियन डॉलर हो गया, जिसमें 9.7 परसेंट का इजाफा हुआ है.
यह बढ़ोतरी 5.5 बिलियन डॉलर के बराबर है. वहीं, दूसरी ओर भारत के लिए चीन का एक्सपोर्ट इस दौरान 12.8 परसेंट उछलकर 135.87 अरब डॉलर हो गया है. इस तरह से द्विपक्षीय व्यापार 155.62 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है. चीन का सालाना ट्रेड डेटा जनवरी से दिसंबर तक का होता है, जबकि भारत अपने आंकड़े मार्च से अप्रैल तक जारी करता है.
क्या होता है व्यापार घाटा?
जब कोई देश निर्यात के मुकाबले आयात ज्यादा करता है, तो इसे व्यापार घाटा कहते हैं. यानी कि कोई देश अपनी जरूरत का सामान दूसरे देशों से बड़े पैमाने पर खरीद तो रहा है, लेकिन उस हिसाब से ऐसा कुछ नहीं बना रहा जिसे दूसरा देश भी खरीदे. क्रिसिल पहले अपनी एक रिपोर्ट में बता चुका है कि अगर किसी देश का व्यापार घाटा लगातार बढ़ता है, तो उस देश की आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है. ऐसे में नई नौकरियों के मौके नहीं बनते है, करेंसी पर भी निगेटिव असर पड़ता है क्योंकि बड़े पैमाने पर आयात होगा, तो विदेशी मुद्रा कम होती जाएगी और इससे रुपये पर दबाव बढ़ेगा.
व्यापार घाटा से और भी नुकसान
जब कोई इकोनॉमी प्रोड्यूस करने के मुकाबले कंज्यूम ज्यादा करती है, तो उसका ट्रेड डेसिफिट बढ़ता है. चीन निर्यात के जरिए भारतीय बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है और सस्ते दामों में अपने उत्पादों को बेच रहा है, जिससे आमतौर पर कंज्यूमर्स ज्यादा खरीदने के लिए मोटिवेट होते हैं. ऐसे में घरेलू उत्पादन भी प्रभावित होता है.अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लगाया, तो उसका अमेरिका के लिए एक्सपोर्ट तेजी से गिरा. हालांकि, उसने अपने दूसरे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए एक्सपोर्ट बढ़ाकर अपनी ग्रोथ को ट्रैक कर रहा है.
ये भी पढ़ें:
अमेरिका के साथ ट्रेड डील भारत के लिए इतना जरूरी क्यों? इसका कितना होगा फायदा?
Source: IOCL
























