एंप्लॉयर को इंवेस्टमेंट प्रूफ नहीं जमा किए तो घबराएं नहीं, ऐसे बचाएं टैक्स
अगर आपने अपने एंप्लॉयर को इंवेस्टमेंट प्रूफ जमा करने में देरी कर दी है तो भी घबराने की कोई जरूरत नहीं है. आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त टीडीएस रिफंड क्लेम कर सकते हैं.

नई दिल्लीः अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपका एंप्लॉयर आपसे आपके निवेश के प्रूफ के दस्तावेज मांगता है और इसके लिए अलग अलग संस्थान में अलग-अलग समय पर इंवेस्टमेंट प्रूफ मांगे जाते हैं. अक्सर जनवरी और मार्च में एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों से निवेश के प्रूफ के दस्तावेज लेते हैं और इसके आधार पर वो टीडीएस (टैक्स डिडक्टड ऑन सोर्स) काटते हैं. अगर आपने समय से इंवेस्टमेंट डेक्लेयरेशन नहीं दिया तो आपका एंप्लॉयर आपकी सैलरी से ज्यादा टैक्स काट लेता है.
भारत में एंप्लॉयर्स को आयकर नियमों का पालन करना होता है और इसके तहत नियोक्ता (एंप्लाॉयर) को अपने कर्मचारियों का की सैलरी से टीडीएस काटना होता है. जब वित्तीय वर्ष खत्म होने को आता है तो एंप्लॉयर अपने एंप्लाइज की टैक्स देनदारी की जांच करता है और उनके टीडीएस डिडक्शन को उनकी आमदनी में उसी हिसाब से देता है. ये वही समय होता है जब कर्मचारियों को अपने निवेश के प्रूफ जमा करने के लिए कहा जाता है. अगर टीडीएस कम काटा गया है तो सैलरी में टीडीएस डिडक्शन बढ़ाया जाएगा और वित्तीय वर्ष के बाकी बचे महीनों में इसे एडजस्ट किया जाएगा.
अगर आपने समय पर इंवेस्टमेंट प्रूफ जमा नहीं किए या फिर आपने वित्त वर्ष के अंत तक और कोई टैक्स बचाने के साधनों में निवेश नहीं किया हुआ है तो आपको ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है. हर साल आपके पास टैक्स बचाने वाले वाले साधनों में निवेश करने का समय 31 मार्च तक होता है और औप टीडीएस रिफंड की मांग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय कर सकते हैं. अगर आपने 31 मार्च से पहले कोई निवेश किया हुआ है तो आप आईटीआर फाइल करते समय टीडीएस रिफंड की मांग कर सकते हैं, भले ही आपने अपने एंप्लॉयर को इंवेस्टमेंट प्रूफ न दिए हों.
ये वो छूट और कटौती हैं जो आप इंवेस्टमेंट प्रूफ की डेडलाइन मिस करने के बाद भी क्लेम कर सकते हैं-
1. एचआरए छूट अगर आपने अपने एंप्लॉयर को अपने घर के किराए के रसीदें नहीं दी हैं तो भी आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरते वक्त भी अपने एचआरए को क्लेम कर सकते हैं. अपने एचआरए को एडजस्ट कराने के लिए अपना टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त आपको घर के किराए की रसीदें और मकान मालिक का पैन नंबर चाहिए. हालांकि पैन नंबर उसी सूरत में चाहिए जब आपका किराया साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा हो जाए.
2. सेक्शन 80सी के तहत यहां बताए गए डिडक्शन को क्लेम कर सकते हैं वो भी बिना किसी अतिरिक्त निवेश के
- ईपीएफ में एंप्लॉई का योगदान- हर महीने एंप्लाई की सैलरी से एक निश्चित रकम कटती है जो एंप्लाई प्रोविडेंट फंड स्कीम में जाती है. ये रकम आमतौर पर आपकी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी होता है.
- बच्चों की ट्यूशन फीस-80 सी के तहत 2 बच्चों की पढ़ाई की फीस पर आप टैक्स छूट पा सकते हैं. इस ट्यूशन फीस में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज को अदा किए गए पेमेंट शामिल होते हैं.
- होम लोन का प्रिंसिपल अमाउंट-होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट के तौर पर अदा की गई राशि के लिए आप डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. ये लोन आप आवासीय यानी रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की खरीदारी या कंस्ट्रक्शन के लिए ले सकते हैं.
- स्टैंप ड्यूटी एंड रजिस्ट्रेशन फीस- किसी प्रॉपर्टी को टैक्सपेयर के नाम पर ट्रांसफर करने का जो खर्च होता है वो टैक्स छूट के लिए योग्य है. हालांकि अगर टैक्सपेयर प्रॉपर्टी खरीदने के 5 साल के भीतर प्रॉपर्टी बेच देता है तो टैक्स छूट और कटौती को उसकी आय में जोड़ दिया जाएगा और जिस साल प्रॉपर्टी बेची है उस साल में टैक्स देना होगा.
लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम-जीवन बीमा पॉलिसी के अदा किए गए प्रीमियम पर आप टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं. इसमें खुद के लिए, पति या पत्नी के लिए और बच्चों के लिए ली गई पॉलिसी पर आप डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. अगर पॉलिसी 31 मार्च 2012 से पहले ली गई है तो सम एश्योर्ड का अधिकतम 20 फीसदी कोष आप टैक्स डिडक्शन के लिए क्लेम कर सकते हैं. वहीं अगर पॉलिसी 1 अप्रैल 2012 के बाद ली गई है तो सालाना प्रीमियम जो कि सम एश्योर्ड का अधिकतम 10 फीसदी हो वो टैक्स डिडक्शन के योग्य है.
3. सेक्शन 80डी के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम का क्लेम आप खुद के लिए लिया गया मेडिकल इंश्योरेंस का अधिकतम 25,000 रुपये तक का प्रीमियम क्लेम कर सकते हैं. साथ ही अगर आपने अपने 60 साल से ऊपर के माता-पिता के मेडिकल इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम अदा किया है तो आपको 50,000 रुपये तक का क्लेम कर सकते हैं.
इसके अलावा हेल्थ चेक-अप के लिए सालाना 5000 रुपये तक के खर्च के लिए आप डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. इसमें टैक्सपेयर्स से लेकर उसके पति या पत्नी, अभिभावक या बच्चों के हेल्थ चेक-अप के लिए किए गए खर्चों को भी शामिल माना जाता है.
इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि अगर आपने अपने एंप्लॉयर को इंवेस्टमेंट प्रूफ जमा करने में देरी कर दी है तो भी घबराने की कोई जरूरत नहीं है. आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त टीडीएस रिफंड क्लेम कर सकते हैं. हालांकि आपको इससे जुड़े सारे प्रूफ अपने पास रखने चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर अगर मांगे जाएं तो आप उन्हें दे सकें.
Source: IOCL



























