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Rupee Depreciation: सिर्फ विदेश में पढ़ाई, घूमना और कारोबार ही नहीं, रुपये की गिरावट आपके घर का बजट बिगाड़ देगी, समझिए पूरा गणित

रुपये की गिरावट का सबसे बड़ा असर महंगाई के रूप में दिखाई देता है. इसकी वजह से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे खाद्य पदार्थों, दवाओं और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

भारतीय शेयर बाजार और भारतीय रुपये, दोनों की हालत इन दिनों बेहाल है. एक तरफ जहां हर रोज बाजार गिर रहा है, तो वहीं दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीयों को चिंता में डाल दिया है. मकर संक्रांति से एक दिन पहले यानी 13 जनवरी 2025 को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.62 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया.

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जैसे कि वैश्विक आर्थिक संकट, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसे की निकासी. इस खबर में हम आपको रुपया क्यों गिर रहा है, ये तो बताएंगे ही, लेकिन इससे ज्यादा हम ये बताने पर जोर देंगे कि आखिर इस गिरावट से आपकी जेब पर क्या असर होगा. यानी कैसे गिरता रुपया आपकी रसोई और आपकी जेब खाली करेगा. चलिए, अब इसके बारे में विस्तार से समझते हैं.

पहले समझिए रुपया गिर क्यों रहा है?

रुपये की गिरावट के पीछे कई कारण हैं. इन्हीं में एक कारण है वैश्विक आर्थिक संकट. दरअसल, वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता और महंगाई ने भारतीय रुपये पर दबाव डाला है. अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरें और डॉलर की मजबूती ने भारतीय करेंसी को कमजोर कर दिया है.

इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से पैसे की निकासी ने भी रुपये को कमजोर किया है. कच्चे तेल की बात करें तो भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है. जब रुपये की वैल्यू गिरती है, तो कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाता है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने लग जाती हैं. इसी तरह से विदेशी निवेशक जब भारतीय बाजार से बाहर निकलते हैं, तो इससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है.

रुपये की गिरावट से आपका बजट बिगड़ेगा

रुपये की गिरावट का सबसे बड़ा असर महंगाई के रूप में दिखाई देता है. दरअसल, रुपये की गिरावट से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिससे घरेलू बाजार में खाद्य पदार्थों, दवाओं और अन्य जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इसे उदाहरण से समझिए, अगर एक उत्पाद की लागत 100 डॉलर थी और भारत पहले इसे 8,300 रुपये में खरीद रहा था, तो अब वही उत्पाद भारत 8,600 रुपये से अधिक में खरीदेगा.

ऐसा इसलिए क्योंकि पहले एक डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 83 रुपये थी और अब 86 रुपये से ज्यादा हो गई है. जब विदेश से सामान महंगा आएगा तो फिर ग्राहकों यानी आपको और हमको भी ये सामान महंगा मिलेगा. इस सामान में कुछ भी हो सकता है, दवा, कपड़े, कॉस्मेटिक्स, दाल, मशीनें, तेल हर वो चीज जो भारत विदेशों से आयात करता है.

तेल का है खेल

जब रुपये की वैल्यू गिरती है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ जाती हैं. इससे परिवहन लागत में बढ़ोतरी होती है, जो अंत में खाद्य पदार्थों और अन्य सामानों की कीमतों को प्रभावित करती है. इससे आम आदमी का बजट बिगड़ता है, क्योंकि उन्हें रोजमर्रा की चीजों के लिए अधिक खर्च करना पड़ता है.

आसान भाषा में समझाएं तो जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो सामान के ट्रांसपोर्टेशन में कंपनियों का जो खर्च लगता है वो बढ़ जाता है, जब वो बढ़ता है तो उसको वसूलने के लिए कंपनियां या वेंडर अपने उत्पाद की कीमतें बढ़ा देते हैं, जो सीधे आम आदमी को प्रभावित करती हैं.

रसोई पर पड़ेगा असर

भारत की निर्भरता खाद्य तेलों और दालों के मामले में विदेशों पर ज्यादा है. खाद्य तेलों की बात करें तो साल 2023-24 में भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा खाद्य तेलों का आयात किया. डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने साल 2023-24 में कुल 159.6 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया.

वहीं दालों की बात करें तो भारत सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में भारत ने 4.7 मिलियन टन दालों का आयात किया. डॉलर के मुकाबले रुपए के गिरने से इन दोनों चीजों की कीमतों पर असर पड़ेगा.

घरेलू उत्पादों की कीमतों पर असर

तेल या दाल के अलावा रुपये के गिरने का असर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे टीवी, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि, इन उत्पादों के लिए जरूरी पुर्जे चीन और अन्य देशों से आयात किए जाते हैं.

विदेश में पढ़ाई, यात्रा और लोन पर भी असर

रुपये की गिरावट का असर विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों पर भी पड़ता है. जब रुपये का मूल्य कम होता है, तो विदेश में रहने वाले छात्रों को उनके घर वालों को ट्यूशन फीस और रहने-खाने के खर्चों के लिए अधिक रुपये भेजने पड़ते हैं. इसके अलावा जो लोग विदेश घूमने जाना चाहते हैं, रुपये के गिरने पर उन्हें भी ज्यादा खर्च करना पड़ता है. लोन की बात करें तो जब महंगाई बढ़ती है तो रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है. इससे होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन जैसी चीजें महंगी हो जाती हैं.

ये भी पढ़ें: Trade Data: देश का व्यापार घाटा दिसंबर में कम, ऊंचे एक्सपोर्ट के चलते घटकर 21.94 बिलियन डॉलर पर रहा

सुष्मित सिन्हा एबीपी न्यूज़ के बिज़नेस डेस्क पर बतौर सीनियर सब एडिटर काम करते हैं. दुनिया भर की आर्थिक हलचल पर नजर रखते हैं. शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच तेजी से बदलते आंकड़ों की बारिकियों को आसान भाषा में डिकोड करने में दिलचस्पी रखते हैं. डिजिटल मीडिया में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. यहां से पहले इंडिया टीवी, टीवी9 भारतवर्ष और टाइम्स नाउ नवभारत में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
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