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Dollar vs Rupee: ईरान वॉर के बीच ऑल टाइम लो पर रुपया, गोल्डमैन सैक्स ने बताया अगले साल तक और कितना गिरेगा

पिछले एक महीने में ही रुपये में करीब 1.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है.

Dollar vs Rupee: ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच जहां एक ओर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रुपया 18 मार्च को गिरकर अपने ऑल-टाइम लो 92.62 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. ऐसे में गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, दक्षिण एशियाई देशों में भारतीय रुपये की स्थिति सबसे कमजोर है और यह अगले साल तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 95 रुपये तक पहुंच सकता है. यदि ऐसा होता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.

पिछले एक महीने में ही रुपये में करीब 1.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये पर दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है. बाजार की स्थिति को देखते हुए आरबीआई ने एक ही हफ्ते में करीब 18 से 20 अरब डॉलर की बिक्री की है.

क्यों टूट रहा रुपया?

मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने लगभग 5.5 अरब डॉलर की इक्विटी भारतीय बाजार से निकाल ली, जिससे निफ्टी 50 करीब 8 प्रतिशत तक गिर गया. 17 मार्च को रुपया डॉलर के मुकाबले 92.41 के स्तर पर पहुंच गया था, जो पिछले 12 महीनों में लगभग 6.75 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है, और इसके बाद यह 92.46 के ऑल-टाइम लो पर बंद हुआ.

गोल्डमैन सैक्स के भारतीय अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के अनुसार, रुपये के 95 प्रति डॉलर तक गिरने का अनुमान अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संभावित बंद होने और चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी की आशंका के आधार पर लगाया गया है.

ग्रोथ रेट में गिरावट

गोल्डमैन सैक्स का यह भी मानना है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर पर भी इसका असर पड़ सकता है. संस्था ने अपने पूर्व अनुमान में संशोधन करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर को 7.0 प्रतिशत से घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है. इसके साथ ही महंगाई दर में 30 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है, जबकि चालू खाता घाटा (CAD) 0.8 प्रतिशत बढ़कर जीडीपी के 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

ये भी पढ़ें: कोहराम, संकट और महंगाई… मिडिल ईस्ट वॉर के बीच क्या कुछ ही दिनों में आ रही वैश्विक मंदी?

राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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