PF सब्सक्राइबर्स ध्यान दें! क्या वाकई मिलने वाला है 10% ब्याज? सरकार ने खुद बता दिया
कर्मचारी पेंशन से जुड़े एक मामले में हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला किया हैं. एक रिटायर्ड कर्मचारी की उच्च पेंशन की मांग को EPFO ने इस वजह से खारिज कर दिया था...

- बॉम्बे हाई कोर्ट ने उच्च पेंशन मामले पर अहम फैसला सुनाया।
- नियोक्ता के रिकॉर्ड न होने पर कर्मचारी को नहीं रोका जा सकता।
- पेंशन सेवा के बदले मिलने वाला अधिकार है, सुविधा नहीं।
- दस्तावेजों की कमी के कारण उच्च पेंशन का दावा खारिज नहीं।
Bombay High Court EPFO Decision: कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF के करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए एक जरूरी खबर है. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि केंद्र सरकार EPF पर मिलने वाले ब्याज को बढ़ाकर 10% कर सकती है. अब खुद सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन कयासों पर अपनी स्थिति साफ कर दी है. जानें सरकार ने क्या कहा है.
दरअसल संसद के हालिया सत्र के दौरान श्रम और रोजगार मंत्रालय से पूछा गया कि क्या भविष्य निधि यानी Provident Fund की ब्याज दरों को बढ़ाकर 10% करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है? इसपर सरकार ने संसद को लिखित में जवाब दिया और कहा है कि फिलहाल ईपीएफ ब्याज दर को 10 फीसदी तक बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि ईपीएफ की ब्याज दरें कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की ओर से तय की जाती हैं, जो फंड की वार्षिक कमाई पर निर्भर करता है. सरकार ने यह भी साफ किया कि मौजूदा दरें बाजार की अन्य बचत योजनाओं की तुलना में अब भी काफी प्रतिस्पर्धी और सुरक्षित हैं.
वर्तमान में कितनी है ब्याज दर?
वित्त वर्ष 2023-24 के लिए सरकार ने EPF पर 8.25% की ब्याज दर तय की थी. यह पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा दरों में से एक है.
पिछले सालों में कैसी रही ब्याज दर?
- वित्त वर्ष 2023-24- 8.25%
- वित्त वर्ष 2022-23- 8.15%
- वित्त वर्ष 2021-22- 8.10%
- वित्त वर्ष 2020-21- 8.50%
क्यों उठी थी 10% की मांग?
बढ़ती महंगाई और अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में कई कर्मचारी यूनियनों और संगठनों ने मांग की थी कि ब्याज दर को दो अंकों में ले जाया जाए. हालांकि सरकार का मानना है कि EPFO को अपनी देनदारियों और निवेश से होने वाली आय के बीच संतुलन बनाए रखना होता है.
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