एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की भारत में जल्द हाे सकती है एंट्री! मोदी सरकार की नई EV पॉलिसी से मिलेगी मदद
India New EV Policy: दुनियाभर की ऑटोमोबाइल कंपनियों को लुभाने के लिए भारत सरकार अपनी EV पॉलिसी में कुछ बदलाव कर सकती है, जिसके तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश को भी छूट मिलेगी.

India New EV Policy: भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मार्च 2024 को नई EV पॉलिसी का ऐलान किया था. अब इसमें जल्द ही बदलाव की उम्मीद है ताकि टेस्ला जैसी कंपनियों की देश में जल्द से जल्द एंट्री हो सके. मौजूदा पॉलिसी के मुताबिक, इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली विदेशी कंपनियों को तीन साल में 4,150 करोड़ रुपये का न्यूनतम निवेश करना जरूरी था. इसी के साथ, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात पर भी रियायती कस्टम ड्यूटी (वर्तमान में 110 परसेंट के मुकाबले 15 परसेंट पर) का भी लाभ मिलने वाला था. यह बेनिफिट प्लांट लगाने की मंजूरी मिलने के बाद पांच साल तक मिलता रहेगा.
कब से लागू होगी सरकार की पॉलिसी?
हालांकि, सरकार की इस पॉलिसी पर ऑटोमोबाइल कंपनियों ने उतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई तो अब इसमें बदलाव की चर्चा फिर से शुरू हो गई है. इस बदलाव के तहत EV प्लांट में पहले से किए गए निवेश को भी पॉलिसी में शामिल किए जाने की बात की जा रही है. अब सवाल आता है कि पिछले साल घोषित सरकार की यह पॉलिसी कब से लागू होगी ताकि टेस्ला जैसी कंपनियों को जल्दी से जल्दी इसका फायदा मिल सके. इस पर एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने ET को बताया कि SMEC (Scheme to Promote Manufacturing of Electric Passenger Cars) गाइडलाइन दो हफ्ते में पूरी हो जाएगी और अगले महीने रिलीज कर दिया जाएगा.
चार्जिंग स्टेशन पर निवेश पर भी छूट
सरकार की इस पॉलिसी के तहत अप्लाई करने वाली कंपनियों को तीन साल के अंदर देश में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाना होगा और ऑपरेशन शुरू होने के पांच साल के भीतर 50 परसेंट लोकलाइजेशन यानी कि स्थानीय तौर पर उत्पादन करना भी जरूरी होगा. बिजनेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि सरकार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के साथ-साथ चार्जिंग स्टेशन पर इंवेस्टमेंट को भी छूट के दायरे में लाने पर विचार कर रही है. यानी कि अब चार्जिंग स्टेशन पर किए जाने वाले निवेश को भी 500 मिलियन डॉलर के इंंवेस्टमेंट कमिटमेंट का हिस्सा माना जाएगा.
राज्य सरकारों को दिया जाएगा लोन
बजट में किए गए 10,000 करोड़ के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप फंड का इस्तेमाल चार्जिंग स्टेशनों के अलावा अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा. इसके अलावा, इससे जुड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी आ सके इसके लिए राज्यों को 1.5 लाख करोड़ का लोन बिना इंटरेस्ट पर दिया जाएगा.
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