Crude Oil: दो हफ्ते के हाई लेवल पर पहुंचा क्रूड ऑयल, क्या अभी और बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
Crude Oil Price: अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में तेूजी देखी जा रही है. कच्चे तेल की कीमतें दो हफ्ते के हाई लेवल पर है.

- मध्य पूर्व तनाव और अमेरिकी धमकी से कच्चे तेल में उछाल
- ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार, डब्ल्यूटीआई भी बढ़ा
- ईरान हमलों के कारण भारत में ईंधन की कीमतें बढ़ीं
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15-20% वृद्धि संभव
Crude Oil Price Hike: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें दो हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष और बढ़ा तो तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है.
कच्चे तेल की कीमतों में उबाल
सोमवार को कच्चा तेल 110 डॉलर के पार चला गया है. एक तरफ ब्रेंट क्रूड (Brent Crude oil price) करीब 1.3% चढ़कर $110.70 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude price) भी 1.7% की तेजी के साथ $107.26 प्रति बैरल पर है.
सरकार ने हाल ही में पूरे देश में ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं, जो ईरान पर अमेरिकी हमलों का ही असर है. अब सवाल यह आता है कि इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? अभी के लिए, इसके असर का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि इसमें कई बातें शामिल हैं — जैसे कि पश्चिम एशिया में तनाव कब तक जारी रहेगा, कच्चे तेल की कीमतें कितनी ऊपर जाएंगी और सरकार इस बढ़ोतरी का कितना बोझ आम भारतीय उपभोक्ता पर डालेगी.
क्या फिर बढ़ेगी पेट्रोल-डीजल की कीमत?
बीते 15 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की. Kotak Institutional Equities के एक विश्लेषण के मुताबिक, कंपनियों के घाटे को पूरी तरह से पाटने के लिए कीमतों में 15-20 परसेंट तक बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है. इसे कंपनियां टुकड़ों में लागू कर सकती हैं.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, कीमतें स्थिर रखने के कारण सरकारी तेल कंपनियों को 1000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से नुकसान हो रहा था. हालिया 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से इस घाटे को कुछ हद तक कम करने में मदद मिलेगी, लेकिन यह काफी नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती है, तो इस नुकसान की भरपाई करने के लिए रिटेल मार्केट में ईंधन की कीमतों में 15-20 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
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