लगातार 5 दिन से बढ़ रही कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच 89 डॉलर के पार क्रूड ऑयल
Crude Oil: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की सप्लाई पर फिर से खतरा मंडरा रहा है. अमेरिका की नई शर्तों से ईरान संग डील की धुंधली पड़ती उम्मीदों के बीच क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं.

- कच्चे तेल के दाम बढ़े, अमेरिका-ईरान तनाव प्रमुख वजह.
- अमेरिका और ईरान हर्जाने पर अड़े, विवाद गहराया है.
- होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति रुकेगी.
- भारत में ईंधन कीमतें बढ़ेंगी, महंगाई का दबाव दिखेगा.
Crude Oil Price Hike: कच्चे तेल की कीमतें बुधवार, 12 अगस्त को अपने पिछले कुछ महीनों के हाई लेवल के करीब बनी रहीं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और आपूर्ति की अनिश्चितता को देखते हुए ब्रेंट क्रूड की कीमतें अब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं. बीते लगभग पांच दिनों से इसमें 12% तक का इजाफा हुआ है. ब्रेंट क्रूड की ही तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी भाव भी अब 83 डॉलर के पार चला गया है.
अमेरिका की नई शर्त क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के सामने इस बार एक और कठिन शर्त रखी है. उन्होंने अब पहले हुए हमलों में मारे गए परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की है. यह विवाद तब बढ़ा, जब ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने शर्त रखी कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को तभी खोलेंगे, जब अमेरिका पिछले पांच महीनों से जारी जंग में हुए नुकसान की भरपाई कर देगा.
इस पर पलटवार करते हुए ट्रंप ने व्हाइट हाउस में बयान देते हुए कहा है कि अगर हर्जाना देना ही है, तो पहले ईरान अमेरिका को दे. उन्होंने मिडिल ईस्ट संघर्षों के दौरान मारे गए अमेरिकी सैनिकों और नागरिकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग कर दी है.
क्या चाहता है ईरान?
ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटा दें और पहले युद्ध में हुए नुकसानों की भी भरपाई कर दें. जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को नहीं खोला जाएगा. अगर ईरान वाकई में इस रूट को पूरी तरह से ब्लॉक कर देता है, तो रोजाना लाखों बैरल तेल की सप्लाई रूक जाएगी. नतीजतन, ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कमी से कीमतें अपने आप बढ़ने लगेंगी.
दुनिया में जितने भी कच्चे तेल की सप्लाई होती है, उसका लगभग 20-25% हिस्सा अकेले इसी रास्ते से होकर गुजरता है. सऊदी अरब से लेकर इराक, कतर जैसे कई बड़े तेल उत्पादक देश अपने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को दुनिया के बाजारों में पहुंचाने के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अगर ब्रेंट क्रूड के 89 डॉलर के स्तर पर पहुंचने से भारत के लिए आयात महंगा हो जाएगा. इससे देश में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, तो ट्रांसपोर्टेशन का भी खर्च बढ़ेगा, जिससे फल-सब्जियों से लेकर राशन तक महंगे हो सकते हैं.
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