क्रेडिट कार्ड बिल में छोड़े सिर्फ 500 रुपए? जानिए कैसे लग सकता है हजारों का फटका
क्रेडिट कार्ड के बिल में अगर 500 रुपये कम चुकाएं तो क्या आपको बड़ी वित्तीय दिक्कत हो सकती है? जी हां ऐसा हो सकता है और आपको इसके बारे में जानकारी लेना जरूरी है.

भारत में क्रेडिट कार्ड का यूज करने वाले ग्राहकों की संख्या काफी है और देश में करोड़ों क्रेडिट कार्ड यूजर्स हैं. क्रेडिट कार्ड ग्राहक भले ही सोचें कि बिल का कुछ हिस्सा ना चुकाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन ये उनकी वित्तीय स्थिति पर असर डाल सकता है. कभी-कभी ऐसा होता है कि क्रेडिट कार्ड का सारा पेमेंट करने के बाद भी ग्राहक सिर्फ 500 रुपये छोड़ देते हैं. ये मानना कि 500 रुपये ही तो कम दिए हैं, ग्राहक को भारी पड़ सकता है और कई बार ये इतना ज्यादा हो जाता है कि ये अनपेड अमाउंट से भी ज्यादा हो सकता है.
क्रेडिट कार्ड पर दो चीजें आपको ध्यान में रखनी चाहिए जिसमें क्रेडिट कार्ड के टोटल अमाउंट पेएबल (Total amount payable) और मिनिमम अमाउंट (Minimum amount), भले ही आप कार्ड के बिल की ड्यू डेट से पहले मिनिमम अमाउंट चुका देते हों और इसे 'ओवरड्यू' होने की कैटेगरी से बचा लेते हों लेकिन इससे आपके पेंडिंग पड़े 500 रुपये पर लगने वाले ब्याज को आप बचा नहीं सकते हैं.
बची हुई रकम पर लगता है ब्याज!
जब क्रेडिट कार्ड का बिल पेमेंट की आखिरी डेट तक पूरा नहीं चुकाया जाता है तो कार्ड जारी करने वाला (issuer) बची हुई रकम पर ब्याज लगा सकता है. कार्ड की शर्तों के मुताबिक ये अलग-अलग हो सकता है. चार्ज की कैलकुलेशन और इस पर लगने वाला इंटरेस्ट रेट इसी आधार पर लागू हो सकता है.
जब आप क्रेडिट कार्ड को तय समय पर पूरा नहीं करते हैं तो कार्ड जारी करने वाला बैंक या संस्थान इस आउटस्टैंडिंग बैलेंस पर कार्ड की शर्तों के मुताबिक ब्याज लगाना शुरू कर सकता है.
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कि कार्ड पर सालाना 42 फीसदी का इंटरेस्ट रेट लागू होता है तो ये मंथली 3.5 फीसदी होता है. अगर 500 रुपये एक महीने के लिए अनपेड रहते हैं तो इस पर अकेले 17.50 रुपये का ब्याज लग जाएगा. इस पर ऊपर से टैक्स भी लगेगा और अन्य एप्लीकेबल फीस भी लागू होंगी. इसका मतलब इतना आसान भी नहीं है और ऐसा नहीं कि आपके
500 रुपये पर सीधा इंटरेस्ट मंथली रेट एप्लीकेबल हो रहा है. लिहाजा क्रेडिट कार्ड वालों को ट्रांजेक्शन डेट, पेमेंट की तारीखों और बाकी बचे हुए बैलेंस (Outstanding) का ध्यान रखना चाहिए.
इंटरेस्ट फ्री ग्रेस टाइम का गंवा सकते हैं फायदा
क्रेडिट कार्ड खरीदारी के बाद आपको आमतौर पर करीब 20-50 दिनों का इंटरेस्ट फ्री विंडो मिलता है. ये क्रेडिट कार्ड यूजर्स को बिलिंग साइकिल और पेमेंट डेट के आधार पर मिलता है. ये सुविधा एक खास शर्त के साथ आती है-
जैसे कि कार्डहोल्डर को अपने कार्ड के पहले के आउटस्टैंडिग स्टेटमेंट बैलेंस को पूरी तरह समय के भीतर चुकाना पड़ता है. इसके मुताबिक अगर आप ग्रेस पीरियड के बाद भी खरीदारी करते हैं और बिल समय पर नहीं चुकाते तो अगले बिलिंग साइकल के दौरान बाद की खरीदारी पर मिलने वाली ब्याज-मुक्त सुविधा शायद लागू न हो.
इसके अलावा जब आप 500 रुपये बकाया रहने के बाद और नई खरीदारी करते जाते हैं तो हर उस खरीदारी पर भी इंटरेस्ट लगता चला जाता है. इसको लगाने के लिए अगले स्टेटमेंट की ड्यू डेट का इंतजार नहीं किया जाता है. भले ही 500 रुपये का अनपेड बैलेंस आपको शुरुआत में ज्यादा ना लगे, लेकिन हर खरीदारी के साथ ये बढ़ता चला जाता है और अगले बिलिंग साइकिल में जुड़ता चला जाता है.
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