नोएडा के नजदीक जेवर में बनेगा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने दिल्ली के नजदीक उत्तर प्रदेश के जेवर में नए हवाई अड्डे के लिए सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी दे दी है. उम्मीद है कि 2022 तक नया हवाई अड्डा चालू हो जाएगा.
दिल्ली के मौजूदा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब 80 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर में नया हवाई अड्डा बनाने की योजना है. इसे बनाने पर करीब 15-20 हजार करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है. नए हवाई अड्डे की सालाना क्षमता 3-5 करोड़ की होगी. यह 3000 हेक्टेयर में विकसित किया जाएगा जिसकी पहचान यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी ने कर दी है. इस बाबत अधिसूचना भी जारी कर दी है.
विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने एबीपी न्यूज से बातचीत में जानकारी दी कि दिल्ली एयरपोर्ट की मौजूदा क्षमता करीब छह करोड़ यात्रियों की है जो 2020 तक नौ करोड़ और 2024 तक 10.9 करोड़ पर पहुंच जाएगी. यात्रियों की बढ़ती रफ्तार के मद्देनजर उम्मीद है कि इस क्षमता का पूरा-पूरा उपयोग होने लगेगा जिसे देखते हुए ही नए हवाई अड्डे की जरुरत बन रही है. सिन्हा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने जेवर की परियोजना को लेकर काफी गंभीर है, जिसके बाद उम्मीद है कि परियोजना पर अमल तेजी से हो सकेगा.
मुंबई, चेन्नई, पुणे, गोवा और विशाखापत्तनम के बाद दिल्ली ऐसा शहर है जहां दूसरा हवाई अड्डा बनाए जाने की योजना है. मौजूदा नियम बताते हैं कि एक हवाई अड्डे से 150 किलोमीटर की हवाई दूरी के बीच नया हवाई अड्डा नहीं बनाया जा सकता. हालांकि विशेष परिस्थितियों में मामला-दर-मामला आधार पर इसमें रियायत दी जा सकती है जैसा कि गोवा, पुणे और मुंबई में हुआ. हालांकि गोवा और मुंबई की स्थिति बिल्कुल ही अलग है. गोवा और पुणे में जहां सेना का हवाई अड्डा होने की वजह से ज्यादा नयी उड़ानों की इजाजत नहीं दी जा सकती, वहीं मुंबई में मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमता का विस्तार नामुमकिन है. इसीलिए तीनों ही शहरों में नया हवाई अड्डा बनाने के लिए पिछली केंद्र सरकार ने मंजूरी दी. चेन्नई के मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमता के मद्देनजर वहां दूसरे हवाई अड्डे की योजना बनी, जबकि आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद विशाखापत्तनम के नजदीक भोगापुरम में नया हवाई अड्डा बनाए जाने का प्रस्ताव है.
दिल्ली हवाई अड्डे की मौजूदा स्थिति-
बहरहाल, दिल्ली हवाई अड्डे की मौजूदा क्षमता का अभी पूरा-पूरा दोहन नहीं हो पाया है, इसीलिए नए हवाई अड्डे को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दिल्ली हवाई अड्डे की मौजूदा क्षमता करीब 6 करोड़ यात्रियों की है, जबकि हर साल करीब 5 करोड़ यात्री इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. दिल्ली हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव पर मंजूरी मिल चुकी है. इससे 2024 तक कुल क्षमता 10.9 करोड़ यात्रियों की हो जाएगी. प्रस्तावित क्षमता अगले 18-20 वर्षों के दौरान यात्रियों की संख्या में होने वाली बढ़ोतरी से निबटने के लिए पर्याप्त होगी. फिर भी सरकार मानती है कि जिस तरह से हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए टोक्यो, न्यूयॉर्क और लंदन की तरह दिल्ली में भी दूसरे हवाई अड्डे की जरुरत होगी और उस पर अभी से काम करना जरुरी है.
दिल्ली हवाई अड्डे से हर घंटे अभी 67 विमानों की आवाजाही होती है जिसे अगले दो से तीन सालों के भीतर बढ़ाकर 95 करने का लक्ष्य रखा गया है. ऐसा होने पर टर्मिनल की क्षमता 6 से बढ़ाकर 9 करोड़ करने की होगी. इसके लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, टर्मिनल 3 और टर्मिनल 1 की क्षमता का विस्तार, टर्मिनल 2 का इस्तेमाल शुरु करना और बाद में टर्मिनल 2 बंद कर एक नया टर्मिनल 4 बनाना. सिन्हा ने ये भी बताया कि टर्मिनल 1डी से टर्मिनल 2 पर एय़रलाइन को ले जाने पर भी फैसला जल्द हो जाएगा.
इस समय दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 से तमाम अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के साथ-साथ एय़र इंडिया, जेट और विस्तारा की घरेलू उड़ानें उपलब्ध हैं, वहीं टर्मिनल 1 डी से इंडिगो, गो और स्पाइसजेट अपनी उड़ानें संचालित करती हैं. टर्मिनल 1 डी का क्षमता से ज्यादा उपयोग हो रहा है. इसकी क्षमता 2 करोड़ यात्रियों की है जबकि 2.4 करोड़ इस्तेमाल कर रहे हैं, इसीलिए दिल्ली हवाई अड्डे में भारी बदलाव पर काम चल रहा है.
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