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दीवाली ने दी हैं कई सुपर हिट फ़िल्में

दीवाली पर रिलीज़ बहुत सी फ़िल्में सफलता के ऐसे ऐसे रिकॉर्ड बनाती रही हैं कि निर्माताओं का ही नहीं कई कलाकारों का भी सपना रहता है कि उनकी फिल्म दीवाली पर प्रदर्शित हो.

दीवाली उत्सव यूं तो सभी के लिए ख़ास होता है. इस दिन अच्छे से अच्छा खाना पीना, नए वस्त्र लेना, घर को सजाना, पूजा पाठ करना, उपहार देने-लेना, घूमना फिरना, मस्ती करना इतना कुछ धमाल एक ही उत्सव पर हो तो यह उत्सव भला किसे पसंद नहीं होगा. लेकिन फिल्म वालों के लिए तो दीवाली बेहद ख़ास रहती है. यहां तक कि फिल्म वालों का एक तरह से नया साल दीवाली पर ही शुरू हो जाता है. साल भर की फिल्मों की सफलता-असफलता का आकलन भी दीवाली पर करने की पुरानी परंपरा है. साथ ही बहुत से फिल्म वाले अपने यहां दीवाली पर बड़ी पार्टियाँ रख कर बड़ा जश्न मानते हैं. इन सबके साथ जो एक सबसे बड़ी बात है वह यह है कि अधिकतर फिल्म वालों की इच्छा रहती है कि उनकी फिल्म दीवाली पर रिलीज़ हो. क्योंकि दीवाली पर रिलीज़ बहुत सी फ़िल्में सफलता के ऐसे ऐसे रिकॉर्ड बनाती रही हैं कि निर्माताओं का ही नहीं कई कलाकारों का भी सपना रहता है कि उनकी फिल्म दीवाली पर प्रदर्शित हो. यशराज फिल्म्स जैसे बड़े निर्माता हों या शाहरुख़ खान और अजय देवगन जैसे सितारे इनके लिए तो दीवाली हमेशा बम्पर रही है. इसीलिए इस साल भी यशराज फिल्म अपनी सबसे महंगी और अमिताभ बच्चन-आमिर खान की पहली बार साथ आ रही फिल्म ‘ठग्स ऑफ़ हिन्दोस्तां’ को भी दीवाली के मौके पर 8 नवम्बर को रिलीज़ कर रहे हैं.

जब ‘बैजू बावरा’ ने दीवाली पर रचा इतिहास

दीवाली पर यूं तो फ़िल्में पहले भी रिलीज़ होती रहीं थीं लेकिन दीवाली पर फिल्मों की पहली बड़ी सफलता 66 बरस पहले तब देखने को मिलती है जब सन 1952 में 10 अक्टूबर को निर्देशक विजय भट्ट की फिल्म ‘बैजू बावरा’ रिलीज़ हुयी. इस बरस दीवाली शनिवार 18 अक्टूबर को थी. दीवाली से पूर्व सप्ताह में इस फिल्म को रिलीज़ करने का बड़ा कारण यह भी था कि यह एक संगीतमय फिल्म थी. निर्माता और वितरकों को लगा कि दीवाली पर गीत संगीत का आनंद लेने के लिए दर्शक यह फिल्म देखेंगे. बाद में यह बात सही साबित हुई और यह फिल्म सुपर-डुपर हिट बन गयी. फिल्म ने डायमंड जुबली तो मनाई ही जबकि कुल मिलाकार यह फिल्म 100 सप्ताह सिनेमा घरों पर रही. इसक फिल्म के बाद जहाँ इसके सितारे भारत भूषण और मीना कुमारी की जिंदगी बदल गयी वहां इसके संगीतकार नौशाद भी स्टार संगीतकार बन गए. यह फिल्म शास्त्रीय संगीत की पृष्ठ भूमि पर थी. इस कारण इसके सभी गीत भी विभिन्न रागों- भैरवी, दरबारी, मालकौस, पीलू आदि पर आधारित थे. फिल्म में पहले दिलीप कुमार और नर्गिस को लिया जाना था. लेकिन उनकी ज्यादा फीस और लगातार तारीखों की समस्या के कारण भारत भूषण-मीना कुमारी को लिया गया था. ऐसे ही कुछ कारणों से सभी के मन में कहीं न कहीं एक शंका थी कि कहीं यह फिल्म फ्लॉप न हो जाए. लेकिन इसके गीत- ‘ओ दुनिया के रखवाले, मोहे भूल गए सांवरिया, तू गंगा की मौज, झूले में पवन की आई बहार और मन तडपत हरी दर्शन को आज ने’ इस फिल्म को घर घर में लोकप्रिय बना दिया. उधर फिल्म के कलाकारों का अभिनय भी काफी पसंद किया गया. ‘बैजू बावरा’ के गीत ‘तू गंगा की मौज’ के संगीत के लिए नौशाद को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला. इसके अलावा मीना कुमारी को भी फिल्मफेयर ने अपने पहले सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री अवार्ड से नवाजा.

दीवाली पर प्रदर्शित ‘बैजू बावरा’ की अपार सफलता से फिल्म वाले इतना खुश हुए कि दीवाली पर फिल्म रिलीज़ करना सभी के लिए एक बड़ा आकर्षण बन गया. और यह आकर्षण आज तक जारी है.

सिने क्लासिक ‘बैजू बावरा’ के बाद दीवाली पर एक ऑल टाइम ग्रेट फिल्म सन 1957 की दीवाली पर भी देखने को मिलती है. यह फिल्म है –‘मदर इंडिया’, जो 25 अक्टूबर 1957 को रिलीज़ हुई थी. नर्गिस, राजकुमार, सुनील दत्त और राजेन्द्र कुमार जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म की सफलता ने सभी की किस्मत के ताले खोल दिए थे. निर्माता निर्देशक महबूब खान की यह फिल्म जबरदस्त हिट रही. यहाँ तक इस फिल्म को देश की ऑल टाइम हिट और हिंदी सिनेमा की शिखर की 4 फिल्मों में शामिल किया जाता है. नर्गिस इसी फिल्म के बाद राज कपूर की छाया से मुक्त होकर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहीं. उन्हें ‘मदर इंडिया’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्म फेयर अवार्ड तो मिला ही. फिल्म को बेस्ट फिल्म और महबूब खान को बेस्ट डायरेक्टर का फिल्म फेयर भी मिला. उधर राजेन्द्र कुमार और सुनील दत्त भी इस फिल्म से लोकप्रिय हो गए. यहाँ यह भी दिलचस्प है कि सुनील दत्त और नर्गिस का प्रेम भी इसी फिल्म के दौरान हुआ और दोनों जल्द ही विवाह बंधन में बंध गए.‘मदर इंडिया’ ने इन सब सफलताओं के साथ एक इतिहास और रचा कि यह विदेशी भाषा की सर्वोत्तम फिल्म के लिए ऑस्कर अवार्ड के लिए भारत की ओर से नामांकित होने वाली पहली फिल्म बनी. हालांकि पुरस्कार पाने की दौड़ में यह एक वोट से रह गयी. लेकिन ‘मदर इंडिया’ ऑस्कर में पहुंचने वाली पहली भारतीय फिल्म के लिए भी आज याद की जाती है.

दीवाली फ़िल्में किस किस के लिए लायीं सौगात

अब तो पिछले करीब 40 बरसों से दीवाली पर अपनी फिल्म रिलीज़ करना सभी के लिए एक क्रेज सा बन गया है. इस चक्कर में कुछ निर्माता एक-दो साल बाद की दीवाली के लिए भी एडवांस में अपनी फिल्म रिलीज़ की घोषणा करके दीवाली बुकिंग कर लेते हैं. जिससे कोई और निर्माता उनकी फिल्म के सामने न आए. सन 2019 की दीवाली के लिए भी साजिद नाडियाडवाला ने अपनी फिल्म ‘हाउस फुल-4’ रिलीज़ करने की घोषणा की हुयी है. फिर भी इस सिलिसिले में कई बार दीवाली पर दो फिल्मों के क्लैश को देखते हुए लड़ाई झगडे हो जाते हैं. कई बार तो मामला कोर्ट कचहरी तक पहुँच जाता है. अजय देवगन तो इसके लिए एक बार यशराज फिल्म से भीड़ गए थे तो एक बार करण जोहर-शाहरुख़ खान से भी. असल में अजय देवगन की फ़िल्में भी दीवाली पर अक्सर हिट होती रहीं हैं. मसलन गोलमाल रिटर्न्स, ऑल द बेस्ट, गोलमाल-3, सन ऑफ़ सरदार, शिवाय और गोलमाल अगेन, ये सभी फ़िल्में ऐसी थीं जो दीवाली पर प्रदर्शित हुईं और इन फिल्मों के सामने हर बार कोई और फिल्म भी थी. लेकिन क्लैश के बावजूद अजय की इन फिल्मों को सफलता मिली. उधर अमिताभ बच्चन के लिए भी दीवाली भाग्यशाली कही जा सकती है. अमिताभ बच्चन की ब्लॉक बस्टर फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ भी सन 1978 की दीवाली पर रिलीज़ हुई थी. प्रकाश मेहरा की इस फिल्म के बाद तो अमिताभ खुद मुकद्दर का सिकंदर बन गए थे. तब से अब तक के बीच में कुछ बरस छोड़ दिए जाएँ तो वह आज तक सिकंदर ही हैं.

जब 90 के दशक में उनके कुछ बरस ख़राब रहे तो उसके बाद उनकी यशराज की फिल्म ‘मोहब्बतें’ सन 2000 की दीवाली पर आई और इसी फिल्म से अमिताभ की फिल्मों में फिर से सफल वापसी हुई. इसके बाद भी अमिताभ की दीवाली पर रिलीज़ फ़िल्में सफल रहीं जिनमें-वीर ज़ारा और बड़े मियां छोटे मियां जैसी फ़िल्में शामिल हैं. उधर दीवाली राकेश रोशन और उनके पुत्र ऋतिक रोशन के लिए भी लकी रही जब 2013 में उनकी ‘कृष-3’ ने दीवाली पर आकर देश में ही 240 करोड़ रूपये का कारोबार कर लिया. ऐसे ही राजश्री प्रोडक्शन की सूरज बडजात्या के निर्देशन में बनी ‘हम साथ साथ साथ हैं’ ने सन 1999 में रिलीज़ होकर गोल्डन जुबली मनाने के साथ करोड़ों रूपये कमाए. राजश्री की दीवाली पर प्रदर्शित एक और फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ ने भी 2015 में 200 करोड़ रूपये से अधिक एकत्र कर राजश्री प्रोडक्शन की किसी फिल्म को पहली बार 200 करोड़ क्लब में पहुँचाया. सलमान खान भी राजश्री के साथ ही दीवाली पर हिट हुए वर्ना उनकी दीवाली पर लगी अन्य फिल्म ख़ास सफल नहीं हो पायीं.

शाहरुख़ के लिए ज्यादर लकी रही है दीवाली

शाहरुख़ खान तो दीवाली पर प्रदर्शित होने वाली फिल्मों के बादशाह बने हुए हैं. दीवाली ने जितनी सौगात शाहरुख़ को दी है उतनी और किसी को नहीं. जिसकी शुरुआत सन 1993 में आई उनकी फिल्म ‘बाज़ीगर’ से हुई. अब्बास मस्तान की यह फिल्म दीवाली पर 12 नवम्बर 1993 को लगी थी. यह फिल्म तो सुपर हिट रही ही साथ ही इसी फिल्म से शाहरुख़ के साथ काजोल की ऐसी जोड़ी जमी कि आज तक इस जोड़ी का रुतबा कायम है. इस फिल्म के बाद तो शाहरुख़-काजोल की जोड़ी की दीवाली पर एक ऐसी फिल्म रिलीज़ हुई जिसने विश्व के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. उनकी यह फिल्म देश में ही नहीं विदेश में भी सबसे ज्यादा लम्बी अवधि तक चलने वाली फिल्म बन गयी है. इस फिल्म का नाम है –‘दिल वाले दुल्हनियां ले जायेंगे’. जो सन 1995 की दीवाली पर लगी थी और 23 साल से आज भी यह फिल्म मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमा में चल रही है.

इन फिल्मों के अलावा भी शाहरुख़ खान की कई फ़िल्में हैं जो दीवाली पर रिलीज़ होकर हिट होती रहीं. इनमें दो फ़िल्में ‘मोहब्बतें’ और ‘वीर ज़ारा’ का ज़िक्र तो हम पहले ही कर चुके हैं जो अमिताभ बच्चन के साथ थीं. साथ ही कुछ कुछ होता है, दिल तो पागल है, डॉन, ओम शांति ओम, जब तक है जान और हैप्पी न्यू इयर भी ऐसी फ़िल्में हैं जो दीवाली हिट्स हैं. लेकिन दो बार दीवाली ने भी शाहरुख़ को जोर का झटका दिया जब सन 2001 की दीवाली पर उनकी फिल्म ‘अशोका’ प्रदर्शित हुई और 2011 में भी शाहरुख़ के अपने बैनर की फिल्म ‘रा-वन’ रिलीज़ हुई. ये दोनों फ़िल्में कामयाब नहीं हो पायीं, इससे यह संकेत भी गया कि हर बार लकी फेक्टर साथ दे यह जरुरी नहीं होता. आप यदि ‘अशोका’ और ‘रा-वन’ जैसी बेहद घटिया फिल्म बनायेंगे तो भाग्य भी साथ नहीं देगा.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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