एक्सप्लोरर

उत्तराखंड चुनाव: छोटे राज्य की बड़ी सियासत में नेताओं के अर्श से फर्श पर आने का सफर!

Uttarakhand Assembly Election 2022: कहने को उत्तराखंड महज 70 विधानसभा की सीटों वाला छोटा राज्य है, लेकिन वहां की सियासत इतनी बडी और बगावती तेवरों वाली है कि राज्य बनने से लेकर आज तक कोई भी मुख्यमंत्री पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया. नेताओं के दलबदल का अपना अलग इतिहास है और शायद ही कोई चुनाव ऐसा हुआ हो, जब कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने पाला न बदला हो.

यह देश का इकलौता ऐसा प्रदेश है, जहां बीजेपी को अपनी पांच साल की सरकार में तीन सीएम बदलने पर मजबूर होना पड़ा. राज्य की राजनीति में अपना कद्दावर कद रखने वाले हरक सिंह रावत छह साल पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे और 2017 में जब सरकार बनी तो वे कैबिनेट मंत्री भी बन गये. अब चुनाव से ऐन पहले अपने बगावती सुरों को लेकर पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया और अब वे दोबारा घर वापसी के लिए कांग्रेस की दहलीज़ पर जा पहुंचे हैं.

दरअसल, बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नहीं चाहता था कि तीन मंत्रियों व विधायकों के पार्टी छोड़ने का जो घटनाक्रम यूपी में हुआ, वह उत्तराखंड में भी देखने को मिले. चुनाव आते ही हरक सिंह रावत के बगावती तेवरों से साफ होने लगा था कि वे ज्यादा दिन तक पार्टी में नहीं रहने वाले हैं. दरअसल वह विधानसभा चुनाव के लिए तीन सीट पर टिकट मांग रहे थे, जिसे पूरा करना पार्टी के लिए भी मुश्किल था. वह अपने अलावा अपनी बहू और एक रिश्तेदार के लिए भी टिकट देने की जिद पर अड़े हुए थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व एक परिवार से एक टिकट देने के फॉर्मूले पर ही अडिग था. दबाव डालने की रणनीति के तहत ही  रावत ने पार्टी की बैठकों में शामिल होना भी बंद कर दिया. लिहाज़ा बीजेपी नेतृत्व नहीं चाहता था कि जिस तरह से टिकट कटने के डर से उत्तर प्रदेश में मंत्री और विधायकों ने पार्टी छोड़ी, वही नज़ारा उत्तराखंड में भी देखने को मिले, इसलिए हरक सिंह रावत खुद इस्तीफा दें, इससे पहले पार्टी ने खुद ही उन्हें बाहर कर दिया.

पिछले चुनाव में रावत कोटद्वार से विधायक चुने गए थे, लेकिन इस बार उन्हें वहां से अपनी हालत डांवाडोल नजर आ रही थी, इसलिये वे अपने लिए सेफ सीट चाहते थे. बताया जाता है कि यमकेश्वर, केदारनाथ और डोईवाला उनकी पसंदीदा सीटें हैं और इनमें से किसी एक सीट से वे चुनाव लड़ना चाहते हैं. इसके अलावा दो टिकट परिवार के लिए भी मांग रहे थे. रावत ने अपनी बहू के लिए लैंसडाउन की सीट मांगी थी पर पार्टी ने इनकार कर दिया. बताते हैं कि बीजेपी उन्हें तो मनचाही सीट से टिकट देने को तैयार थी. पर परिवार के लिए दो सीटों की जिद ने सारा खेल बिगाड़ दिया. नतीजा ये हुआ कि छह साल पहले उन्होंने जिस तरह से आधी रात को सीएम हरीश रावत की कांग्रेस सरकार को गिराने का खेल खेला था, ठीक उसी अंदाज में आधी रात को ही बीजेपी ने उन्हें कैबिनेट और पार्टी से बेइज़्ज़त करके बाहर कर दिया.

                     कहते हैं कि राजनीति में अक्सर इतिहास खुद को दोहराता है. हरक सिंह रावत के लिए पाला बदलना कोई नई बात नहीं है. वह मौकापरस्ती के माहिर खिलाड़ी माने जाते रहे हैं और इस बार अगर वह अपनी सीट नहीं बदलते तो यह अपने आप में रिकॉर्ड हो जाएगा. बात 18 मार्च 2016 की है. तब उत्तराखंड में हरीश रावत यानी कांग्रेस की सरकार थी. उस सरकार को गिराने के लिए हरक सिंह रावत, विजय बहुगुणा और 8 अन्य विधायक बीजेपी में शामिल हुए थे. बीजेपी के अन्य विधायकों के साथ वे बस में भर कर आधी रात को राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे. उन नौ बागियों में हरक सिंह रावत की भूमिका अहम थी. विधायकों की बगावत के चलते हरीश रावत सरकार को हटाकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हरीश रावत सरकार लौट तो आई, लेकिन ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई. हरक सिंह समेत सभी बागियों ने भाजपा जॉइन कर ली.

2017 के चुनाव में बीजेपी ने हरक सिंह रावत को कोटद्वार सीट से चुनाव लड़ाया और वह विधायक चुने गए. उन्हें उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया, लेकिन कई बार कई मामलों को लेकर तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र  सिंह रावत से उनके मतभेद होते रहे. श्रम मंत्रालय को लेकर भी उनकी त्रिवेंद्र सरकार से नाराजगी रही. पुष्कर सिंह धामी के सीएम बनने के बाद भी उनकी सियासी खिंचतान जारी रही. तब हरक सिंह रावत ने कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं दिए जाने के आरोप में कैबिनेट बैठक में ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था, हालांकि बाद में बीजेपी नेतृत्व उन्हें मनाने में कामयाब हो गया था. 

उसके बाद रावत को शायद ये गुमान हो गया था कि वे अपने परिवार के लिए जितनी टिकट मांगेंगे, पार्टी उन्हें देने में नहीं हिचकेगी, लेकिन ये सियासत है, जहां एक जिद ही चंद सेकंड में कद्दावर नेता को भी अर्श से फर्श पर ले आती है. हरक सिंह रावत को भी अब शायद इसका गहराई से अहसास हो गया होगा.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

'मेरी बढ़ी हुई सैलरी गरीबों में बांट दो', इस नेता ने देश के सामने पेश की मिसाल, आप भी करेंगे सैल्यूट!
'मेरी बढ़ी हुई सैलरी गरीबों में बांट दो', इस नेता ने देश के सामने पेश की मिसाल, आप भी करेंगे सैल्यूट!
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की अब नहीं चलेगी मनमर्जी, फीस पर सरकार ने कसा शिकंजा, नया कानून लागू
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की अब नहीं चलेगी मनमर्जी, फीस पर सरकार ने कसा शिकंजा, नया कानून लागू
ISI के निशाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, खतरे को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई,  Z+ सिक्योरिटी मिली हुई
ISI के निशाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, खतरे को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई, Z+ सिक्योरिटी मिली हुई
स्टीव स्मिथ से डेवोन कॉनवे तक, ऑक्शन में नहीं बिके कई स्टार खिलाड़ी; देखें अनसोल्ड प्लेयर्स की लिस्ट
स्मिथ से कॉनवे तक, ऑक्शन में नहीं बिके कई स्टार खिलाड़ी; देखें अनसोल्ड प्लेयर्स की लिस्ट
ABP Premium

वीडियोज

Bollywood News:बॉलीवुड गलियारों की बड़ी खबरें? | KFH
Kanpur News: कानपूर में दिखा  नकाबपोश बदमाशों का तांडव , 3 सेकेंड में घर पर फेंके 3 बम
BJP State President: क्या बदलेगा नए BJP अध्यक्ष के आने से? | UP News | BJP | Mahadangal
Commodities Market में Copper की ज़बरदस्त Rally: 35% Jump और $12,000 का Level | Paisa Live
West Bengal Elections: 'महिलाएं रसोई के औजारों के साथ तैयार रहें', जनता को क्यों भड़का रही ममता?

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'मेरी बढ़ी हुई सैलरी गरीबों में बांट दो', इस नेता ने देश के सामने पेश की मिसाल, आप भी करेंगे सैल्यूट!
'मेरी बढ़ी हुई सैलरी गरीबों में बांट दो', इस नेता ने देश के सामने पेश की मिसाल, आप भी करेंगे सैल्यूट!
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की अब नहीं चलेगी मनमर्जी, फीस पर सरकार ने कसा शिकंजा, नया कानून लागू
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की अब नहीं चलेगी मनमर्जी, फीस पर सरकार ने कसा शिकंजा, नया कानून लागू
ISI के निशाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, खतरे को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई,  Z+ सिक्योरिटी मिली हुई
ISI के निशाने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, खतरे को देखते हुए सुरक्षा बढ़ाई, Z+ सिक्योरिटी मिली हुई
स्टीव स्मिथ से डेवोन कॉनवे तक, ऑक्शन में नहीं बिके कई स्टार खिलाड़ी; देखें अनसोल्ड प्लेयर्स की लिस्ट
स्मिथ से कॉनवे तक, ऑक्शन में नहीं बिके कई स्टार खिलाड़ी; देखें अनसोल्ड प्लेयर्स की लिस्ट
Year Ender 2025: 'कांतारा चैप्टर 1' से 'सु फ्रॉम सो' तक, साउथ की इन फिल्मों ने की बंपर कमाई
'कांतारा चैप्टर 1' से 'सु फ्रॉम सो' तक, साउथ की इन फिल्मों ने की बंपर कमाई
लालू की संपत्ति को लेकर सम्राट चौधरी के बयान से सियासी बवाल, RJD बोली- 'कानून हाथ में लेने की...'
लालू की संपत्ति को लेकर सम्राट चौधरी के बयान से सियासी बवाल, RJD बोली- 'कानून हाथ में लेने की...'
'BJP के ऐतिहासिक प्रदर्शन को...', तिरुवनंतपुरम में फहराया भगवा तो शशि थरूर का आया पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा?
'BJP के ऐतिहासिक प्रदर्शन को...', तिरुवनंतपुरम में फहराया भगवा तो शशि थरूर का आया पहला रिएक्शन, क्या कहा?
Road Markings: सड़कों पर क्यों बनाई जाती है सफेद और पीली पट्टी, जानें क्या है दोनों में अंतर
सड़कों पर क्यों बनाई जाती है सफेद और पीली पट्टी, जानें क्या है दोनों में अंतर
Embed widget