एक्सप्लोरर

Opinion: आपदा में पीड़ितों का संबल बनती उत्तर प्रदेश की योगी सरकार

प्रकृति है तो प्राकृतिक आपदाएं भी आएंगी, लेकिन ऐसा ही समय शासन की परीक्षा का भी होता है. चाहे आंधी-तूफान हो या मूसलाधार बारिश या फिर आकाशीय बिजली, ये अपने साथ भारी तबाही लाती हैं. किसान के खेत में खड़ी फसल पल भर में तहस-नहस हो जाती है. घर की छत उड़ जाती है. बच्चों के सिर से आसरा छिन जाता है और कभी-कभी ऐसी मानवीय हानि भी होती है, जिसका दर्द सालों साल सालता है. उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और आकाशीय बिजली ने एक बार फिर यह दिखाया कि प्रकृति के समक्ष मनुष्य कितना असहाय है.

ऐसे में लोगों के मन में सहज ही सवाल उठता है कि क्या कोई उनका दर्द सुन रहा है? कोई उनके दर्द को महसूस कर रहा है?  इस सवाल का जवाब योगी सरकार ने एक बार फिर शब्दों से नहीं कर्म से दिया. सरकार की संवेदनशीलता ने लोगों के दर्द पर मरहम ही नहीं रखा, उनका आत्मबल भी बढ़ाया. 24 घंटे के भीतर राहत, जिलों में त्वरित सहायता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मंत्रियों का पीड़ितों के बीच पहुंचना, यह एक ऐसी व्यवस्था का चेहरा था जो संकट के समय अपनी जिम्मेदारियां समझती है.

‘आपदा में अवसर नहीं, आपदा में सेवा’ यही वह भावना है जो किसी शासन को जन-शासन बनाती है. उत्तर प्रदेश एक विशाल राज्य है. करोड़ों किसान, लाखों गांव, हजारों मजरे. इस विस्तार में प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय और संवेदनशील बनाए रखना कोई साधारण काम नहीं है. लेकिन जब राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, जब नेतृत्व का संकल्प स्पष्ट हो, तो तंत्र भी उसी दिशा में चल पड़ता है. यही कारण है कि राहत केवल घोषित नहीं, वितरित भी हुई. अधिकारी दफ्तरों में बैठे नहीं रहे, मैदान में उतरे. यह प्रशासनिक संस्कृति में सकारात्मक बदलाव का संकेत है, जो योगी सरकार के पिछले नौ वर्ष के कार्यकाल में ही देखने को मिला है.
 
सरकार प्रतीकों से लोगों के प्रति अपनी भावनाएं स्पष्ट करती है. किसी भी आपदा पर मुख्यमंत्री का सक्रिय होना, अधिकारियों से नुकसान का फीडबैक लेना और तत्काल बचाव कार्यों के साथ 24 घंटे के भीतर ही राहत राशि का बंटवाना, यह वह मानवीय पहलू है, जो लोगों के दुख-दर्द में हिस्सेदार दिखाई देता है. तमाम प्रभावित जनपदों में प्रभारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों का मौके पर पहुंचकर राहत राशि वितरित करना और शोक संतप्त परिवारों से मिलकर उन्हें ढांढ़स बंधाना इसी पहलू का हिस्सा है. जब कोई मंत्री किसी पीड़ित किसान के सामने बैठकर उसकी आंखों में आंखें डालता है, उसका हाथ थामता है और कहता है कि सरकार तुम्हारे साथ है, तो वह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होता. वह एक मानवीय संबंध की स्थापना होती है. वह उस विश्वास का पुनर्निर्माण होता है, जो आपदा की मार से छिन्न-भिन्न हो गया था.
 
जब आंधी किसान की खड़ी फसल को रौंद डालती है, जब आकाशीय बिजली किसी मेहनतकश के घर में अंधेरा कर देती है, तब उसे तत्काल सहायता चाहिए, महीनों बाद मिलने वाला सरकारी लाभ नहीं. योगी सरकार की इस पहल ने किसानों को यह संदेश दिया है कि उनकी पीड़ा सत्ता के गलियारों तक पहुंचती है और वहां उस पर संज्ञान भी लिया जाता है. यह छोटी बात नहीं है. वर्षों की उपेक्षा के बाद जब किसान यह महसूस करता है कि उसकी सुध ली जा रही है, तो उसके भीतर फिर से उठ खड़े होने की शक्ति जागती है. आपदा में राहत देना केवल करुणा का विषय नहीं है, यह शासन की संवैधानिक जिम्मेदारी भी है. राज्य का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को प्राकृतिक आपदाओं से यथासंभव सुरक्षित रखे और यदि क्षति हो जाए तो उसकी भरपाई में सहायक बने. लेकिन जब यह जिम्मेदारी महज प्रशासनिक दायित्व न रहकर मानवीय संवेदना के साथ सामने आती है, तो वह राहत महज धनराशि नहीं रहती. वह आत्मीयता का स्पर्श बन जाती है जो एक टूटे हुए आदमी में फिर से शक्ति का संचार करता है. आपदा केवल प्राकृतिक नहीं होती, वह सामाजिक और मनोवैज्ञानिक भी होती है. जब कोई परिवार अचानक सबकुछ खो देता है, तो उसकी पीड़ा केवल भौतिक नहीं होती.
 
आज के आधुनिक दौर में तकनीक के जरिये प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के प्रयास जरूर किए गए हैं, लेकिन इन्हें पर्याप्त नहीं कहा जा सकता. इतना अवश्य है कि लोगों को सचेत करने में बड़ी सफलता मिली है. मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी खराब मौसम की चेतावनी लोगों को समय से मिल रही है. उत्तर प्रदेश में सचेत पोर्टल के माध्यम से आम जनमानस को 34 करोड़ 64 लाख रेड एवं ऑरेंज चेतावनी संदेश भेजे गए हैं. 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर किसानों को मुआवजा भी दिया जा रहा है. अतिवृष्टि के कारण खेतों में जमा गाद और मलबा हटाने के लिए भी 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता देने का प्रावधान है. इससे प्रभावित किसानों को दोबारा खेती शुरू करने में मदद मिलेगी. दुधारू पशुओं जैसे गाय-भैंस की मृत्यु पर 37,500 रुपये तक सहायता की व्यवस्था है. यह सब फैसले लोगों के दुख-दर्द को कम करके उन्हें नए सिरे से जिंदगी शुरू करने में मददगार साबित होते हैं.
 
संकट की इस घड़ी में योगी सरकार ने लोगों का संबल बढ़ाया है. आश्वस्त किया है कि सरकार जनता के दुख-दर्द से बेखबर नहीं है. आपदा में यही संबल सबसे बड़ी पूंजी होता है. यह विश्वास कि हम अकेले नहीं हैं. हमारे पीछे एक सरकार है जो हमारी सुध लेती है. हमारे आंसू देखती है. जो केवल वादों से नहीं, काम से जवाब देती है. प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान की मानसिक और आर्थिक दोनों रूप में भरपाई करती है. यह दिखाता है कि यदि राजनीतिक संकल्प हो और प्रशासनिक तंत्र को सही दिशा मिले, तो राहत वास्तव में पीड़ित तक पहुंच सकती है.

नोट - (उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

'हां हम रिजीम चेंज चाहते हैं, कोई जो...', ममता बनर्जी की पार्टी का बड़ा बयान
'हां हम रिजीम चेंज चाहते हैं, कोई जो...', ममता बनर्जी की पार्टी का बड़ा बयान
UP के इस जिले में 3 दिन तक बंद रहेंगी शराब की दुकानें, जानें क्या है वजह?
UP के इस जिले में 3 दिन तक बंद रहेंगी शराब की दुकानें, जानें क्या है वजह?
प्लेइंग 11 से बाहर रखने पर वैभव सूर्यवंशी का छलका दर्द! 2 शब्दों में बताई मन की बात
प्लेइंग 11 से बाहर रखने पर वैभव सूर्यवंशी का छलका दर्द! 2 शब्दों में बताई मन की बात
'इसे तुरंत हटा दें...', AI जनरेटेड वीडियो-फोटोज के खिलाफ नेहा शर्मा की लीगल वार्निंग
'इसे तुरंत हटा दें...', AI जनरेटेड वीडियो-फोटोज के खिलाफ नेहा शर्मा की लीगल वार्निंग

वीडियोज

'इच्छाधारी बीवी' को सजा-ए-मौत!
विदेश से 'मंतर' अराजक 'जंतर'
संविधान नहीं..सड़कतंत्र पर भरोसा ?
CEC पर दिल्ली में NON-STOP बवाल...तख्तापलट का ट्रेलर?
Bollywood News: 'रामायण' का हॉलीवुड में डंका,  3 घंटे 15 मिनट की होगी महागाथा! (16.10.26)

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'हां हम रिजीम चेंज चाहते हैं, कोई जो...', ममता बनर्जी की पार्टी का बड़ा बयान
'हां हम रिजीम चेंज चाहते हैं, कोई जो...', ममता बनर्जी की पार्टी का बड़ा बयान
UP के इस जिले में 3 दिन तक बंद रहेंगी शराब की दुकानें, जानें क्या है वजह?
UP के इस जिले में 3 दिन तक बंद रहेंगी शराब की दुकानें, जानें क्या है वजह?
प्लेइंग 11 से बाहर रखने पर वैभव सूर्यवंशी का छलका दर्द! 2 शब्दों में बताई मन की बात
प्लेइंग 11 से बाहर रखने पर वैभव सूर्यवंशी का छलका दर्द! 2 शब्दों में बताई मन की बात
'इसे तुरंत हटा दें...', AI जनरेटेड वीडियो-फोटोज के खिलाफ नेहा शर्मा की लीगल वार्निंग
'इसे तुरंत हटा दें...', AI जनरेटेड वीडियो-फोटोज के खिलाफ नेहा शर्मा की लीगल वार्निंग
'उनका भी मौलिक अधिकार', बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक की मांग पर SC की अहम टिप्पणी
'उनका भी मौलिक अधिकार', बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक की मांग पर SC की अहम टिप्पणी
ट्रंप ने रूसी तेल खरीद से हटाया टैरिफ तो गदगद हुए पुतिन के दूत- 'यह सच में...'
ट्रंप ने रूसी तेल खरीद से हटाया टैरिफ तो गदगद हुए पुतिन के दूत- 'यह सच में...'
नए स्मार्टफोन महंगे होने से डिमांड में रिफर्बिश्ड फोन, 13 पर्सेंट तक बढ़ी डिमांड
नए स्मार्टफोन महंगे होने से डिमांड में रिफर्बिश्ड फोन, 13 पर्सेंट तक बढ़ी डिमांड
Ayushman Bharat: अब 'आयुष्मान' में ही होंगे हार्ट-लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट! यह सरकार कर रही तैयारी
अब 'आयुष्मान' में ही होंगे हार्ट-लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट! यह सरकार कर रही तैयारी
Embed widget