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अब सुधार के लिए बेकाबू पुलिस पर ही 'थर्ड डिग्री' की जरूरत?

लापरवाही, नजरअंदाजी, अनसुनी करना, पक्षपात करना ये बातें मानों पुलिस के पर्यायवाची शब्द बन गए हैं। सरकार कोई भी हो, पुलिस के तौर तरीके में ज्यादा बदलाव नज़र नहीं आता है।

आज हम जवाब मांगेंगे उत्तर प्रदेश पुलिस के रवैये को लेकर, सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा का दम भरने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस खुले मैदान में बीच सड़क पर अपराधियों पर गोलियां दाग रही है लेकिन उसके अपने ही थाने के भीतर या चौराहे पर बहादुरी की ऐसी मिसालें पेश की जा रही हैं कि पूरा सिस्टम कठघरे में खड़ा हो गया है। जिस पुलिस से इंसाफ की अपेक्षा की जाती है, वो पुलिस ज्यादतियों का नमूना बन चुकी है। कभी सियासत की शह पर ये तमाशा चलता है तो कभी अफसरशाही की शह पर, तो कभी अपनी मनमर्जी से। लापरवाही, नजरअंदाजी, अनसुनी करना, पक्षपात करना ये बातें मानों पुलिस के पर्यायवाची शब्द बन गए हैं। सरकार कोई भी हो, पुलिस के तौर तरीके में ज्यादा बदलाव नज़र नहीं आता है।

आज एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली कठघरे में है। पुलिस को कठघरे में खड़ा करने वाली 4 हालिया घटनाएं हम सबसे पहले आपको बताते हैं। पहली घटना देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा की है। जहां एक ट्रैफिक पुलिसवाले से नोंकझोंक ने एक शख्स का तनाव इस कदर बढ़ा दिया कि उसे वहीं पर हार्ट अटैक आ गया। अस्पताल पहुंचने तक उसकी मौत हो गई। वो परिवार का इकलौता कमाने वाला शख्स था। परिवार गाड़ी चेकिंग के दौरान पुलिसवाले की बदसलूकी को मौत का कसूरवार ठहरा रहा है जबकि पुलिस कप्तान पहले तो मामले को ही अपने क्षेत्र से बाहर गाजियाबाद का बता रहे हैं, दूसरे वो पुलिसवाले की बदसलूकी को भी सिरे से खारिज कर रहे हैं।

दूसरी घटना आगरा की है। जहां पिनाहट थाने की पुलिस ने पांच युवकों को चोरी के शक में उठा लिया। जब तीन दिन बाद वो लोग थाने से बाहर आए तो सीधे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। आरोप है कि दो युवकों पर पुलिस ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। बिना कोई केस दर्ज किए तीन दिन युवकों को थाने में पीटने का आरोप है। इस मामले में थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

तीसरी घटना फिरोजाबाद की है। जहां पुलिस का एक दूसरा ही चेहरा है। वो कैसे सियासी रसूख के आगे बेबस हो जाती है। यहां एक तिरंगा यात्रा निकाली गई सत्ताधारी पार्टी भाजपा की तरफ से, जिसमें लोग खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आए लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। और चौथी घटना आज तेज़ी से वायरल हो रही है। इसमें दो पुलिसवाले एक बाइक पर बैठे हैं, लेकिन किसी ने भी हेलमेट नहीं लगा रखा है। एक ओर ट्रैफिक नियमों के नाम पर पुलिस पर लोगों से ज्यादती का आरोप लग रहा है, जिसमें एक शख्स की जान चली जाती है और दूसरी ओर खुद पुलिसवाले नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

हर तस्वीर खाकी वर्दी पहनने वालों पर सवाल खड़े कर रही है लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाली, दिल-दिमाग़ को झकझोरने वाली तस्वीर उस शख्स की है, जिसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। नोएडा के एसएसपी इसे गाजियाबाद का मामला बता रहे हैं। सवाल ये है कि बात चाहे नोएडा कि हो या गाजियाबाद की, क्या पुलिस पर बदसलूकी के आरोपों को इस तरह खारिज किया जा सकता है। इतना ही नहीं, नोएडा के एसएसपी ने तो युवक की मौत को खुद उसकी बीमारी बता दिया लेकिन नोएडा के एसएसपी की बातों को युवक के परिवार ने सिरे से खारिज किया है। एबीपी गंगा से खास बातचीत में युवक के पिता ने बताया कि उनके परिवार में किसी को कभी भी डायबिटीज़ नहीं था, ना है। अस्पताल से जारी डेथ सर्टिफिकेट में भी डायबिटीज़ का कहीं जिक्र नहीं है। पिता ने बेटे की मौत के लिए सीधे-सीधे पुलिस के रवैये को कसूरवार ठहराया है।

जिस नियम-कायदे के लिए पुलिस का रवैया कठघरे में है। जिसकी वजह से एक आम इंसान की जिंदगी चली गई। एक परिवार बेसहारा हो गया, 5 साल की एक बच्ची अनाथ हो गई। उसी नियम-कायदे को खुद पुलिसवाले कितना मानते हैं, इसकी तस्वीरें भी आज खूब वायरल हो रही हैं। जहां दो पुलिसवाले बिना हेलमेट गाड़ी दौड़ा रहे हैं।

नोएडा के पिता को पुलिस सिरे से नकार रही है लेकिन आगरा के पिनाहट थाने में जो कुछ हुआ, उसके तो सबूत भी हैं, वो भी लोगों के जिस्म पर। किस तरह यहां चोरी के शक में पुलिस ने युवकों को उठाया उन्हें थर्ड डिग्री दी और जब जी भर गया तो जिंदगी भर की जिल्लत सहने के लिए छोड़ दिया। दर्द में घुला खौफ लेकर अब ये लोग इंसाफ मांग रहे हैं।

पुलिस की ये चार घटनाएं तो सिर्फ पिछले 24 घंटे की हैं। तारीखों में पुलिसवालों की ऐसी ना जाने कितनी करतूतें दर्ज हैं, जिन्हें सुनकर हैरानी होती है कि क्या ये हमारी रक्षा करने वाले लोग हैं। अगर रखवाले ऐसे हैं तो आम आदमी को भगवान ही बचाए। पुलिसवालों के रवैये की कुछ और बानगी आपको बताते हैं। ढाई साल पहले जब योगी सरकार बनी थी तो योगी ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने की नसीहत दी थी और एक्शन लेने का दावा किया था। एक्शन हुआ और ऐसा हुआ कि 16 महीनों में ही यूपी पुलिस ने 3000 से ज्यादा एनकाउंटर डाले, नतीजा सुर्खियां तो मिली हीं लेकिन पुलिस पर सवाल भी खड़े होने लगे, एनकाउंटर्स को फर्जी बताया जाने लगा, खैर एनकाउंटर तो अभी भी जारी है। अब तादाद उतनी नहीं है लेकिन पुलिस पर सवाल खत्म नहीं हुए हैं।

मथुरा में पुलिस के दो सिपाहियों पर एक विदेशी महिला से रेप का आरोप लगा है, दोनों ने वीजा बनवाने के नाम पर महिला से रेप किया...लोगों की छोड़िये पुलिस अपने ही अधिकारियों में किस तरह नाकाम रही ये बुलंदशहर की घटना से याद दिलाते हैं। जहां गोतस्करी की एक सूचना पर भड़की भीड़ को काबू करने गए इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। गोली भी उन्हीं की सर्विस रिवॉल्वर से मारी गई। पुलिस के बाकी सिपाही या तो मौके से भाग खड़े हुए या फिर ठंडे पड़ गए। हां, बरेली में फिर एक बार पुलिस शेर बन गई। दरअसल, यहां लव जिहाद के मामले में पुलिस ने एक लड़की को पकड़ा तो उसे धर्म के नाम पर हिदायती अंदाज में पहले तो गालियां दीं फिर पिटाई की। इतने से भी मन नहीं भरा तो उसकी पहचान उजागर कर दी। बाद में डीजीपी ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया। यूपी पुलिस का सबसे खौफनाक मामला राजधानी लखनऊ का रहा जहां सितंबर 2018 में एप्पल कंपनी के अधिकारी को टशन में दो सिपाहियों ने गोली मार दी। इसमें भी दावा किया गया कि पुलिस ने अधिकारी को रूकने को कहा था, लेकिन गाड़ी रोकी नहीं गई। आरोपी सिपाहियों की नौकरी चली गई है लेकिन मऊ में जो हुआ वो इंसानियत को शर्मसार करने वाला था। एक घायल शख्स को पुलिस एंबुलेंस तक घसीट कर ले गई। जब ये तस्वीरें वायरल हुईं तो पुलिस ने माफी मांगी।

इन तस्वीरों को देखने के बाद जो सवाल आपके मन में उठ रहे होंगे कि जिस कानून के आगे जनता खुद को लाचार पा रही है, उसी कानून की आड़ में पुलिसवाले खुलेआम अत्याचार कैसे कर रहे हैं ?

असल में ये बात साफ है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी के तमाम दावों के बावजूद पुलिस के रवैये में कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है । प्रदेश के मुख्यमंत्री और प्रदेश पुलिस के मुखिया को इस बात को पहले से ज्यादा संजीदगी से लेना होगा क्योंकि एक युवक की मौत को न ही जिला विवाद के जरिए टाला जा सकता है न ही उसकी बीमारी की दलीलों को देकर जो कि असल में थी ही नहीं । भाजपा सरकार के लिए पुलिस की कार्यशैली सुधारना और भी अहम है क्योंकि उसको मिले प्रचंड बहुमत में बेहतर कानून व्यवस्था लागू करना एक बड़ा मुद्दा था।

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