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आखिर मंशा क्या है, चुनाव के दौर में टाइम का लेख

अमेरिकी मैगजीन ने पीएम मोदी पर लेख लिखा है। इस लेख में मोदी को लेकर जो बातें कहीं गई हैं। वे किसी भी भारतीय स्वीकार नहीं हो सकती।

क्या आप पसंद करेंगे कि आपके घर के झगड़े में कोई बाहर का व्यक्ति आकर चौधरी बने। फरमान सुनाए! हरगिज़ नहीं।लेकिन हो ऐसा ही रहा है बल्कि इशारे तो इससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। अमेरिकी मैगजीन टाइम ने पीएम मोदी पर लिखा है बेहद आपत्तिजनक लेख। ये एक ऐसा लेख है जो एक देश और एक भारतीय के नाते आप भी देखेंगे और पढ़ेंगे तो आपका खून खौल उठेगा।

दुनिया की नामी मैगजीन, कवर फोटो पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकिन आर्टिकल का शीर्षक ऐसा कि हर हिंदुस्तानी की नसें फड़कने लगें। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री मोदी को इंडियाज़ डिवाइडर इन चीफ बताया गया है यानी देश के पीएम पर भारतीय समाज को बांटने का आरोप लगाया गया है।

चुनावी माहौल में टाइम मैग्जीन के इस कवर पेज और कवर स्टोरी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी मैगजीन का ये आर्टिकल और कवर पेज देश के सियासी माहौल को गरमाने के लिए काफी है। टाइम मैग्जीन की इस कवर स्टोरी में पीएम मोदी की तुलना पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू से करते हुए कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। मैग्जीन के मुताबिक पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। नरेंद्र मोदी ने हिंदू और मुसलमानों के बीच भाईचारे की भावना को बढ़ाने के लिए कोई इच्छाशक्ति नहीं दिखाई है।

लेख में पीएम मोदी पर ये आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने महान शख्सियतों पर हमला किया। मैग्जीन कहती है कि 1947 में ब्रिटिश इंडिया दो हिस्सों में बंटा और पाकिस्तान का जन्म हुआ। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़े पंडित नेहरू ने फैसला किया कि भारत सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं होगा बल्कि हर धर्म के लोगों के लिए यहां जगह होगी। नेहरू की विचारधारा सेक्युलर थी जहां सभी धर्मों को समान रुप से इज्जत थी। भारतीय मुसलमानों को शरीया के आधार पर फैमिली लॉ मानने की इजाजत दी गई जिसमें तीन बार तलाक बोलकर तीन तलाक का अधिकार शामिल था। नरेंद्र मोदी ने इसे 2018 में कानून बना कर अपराध घोषित कर दिया।

लेख में गाय, मॉब लिंचिंग और यूपी के सीएम आदित्यनाथ का भी ज़िक्र है। लेख में कहा गया है कि गाय को लेकर मुसलमानों पर बार-बार हमले हुए और उन्हें मारा गया। 2017 में यूपी में जब बीजेपी चुनाव जीती तो भगवा पहनने वाले और नफरत फैलाने वाले एक महंत को सीएम बना दिया गया।

हालांकि लेख में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की जम कर तारीफ की गई है। जीएसटी लागू करने के फैसले की सराहना की है। मैग्जीन के मुताबिक भारत ने मोदी की अगुवाई में चीन, अमेरिका और जापान से अपने रिश्ते तो सुधारे ही हैं, लेकिन उनकी घरेलू नीतियों की वजह से करोड़ों लोगों की जिंदगी में सुधार आया है। भारत की जटिल टैक्स व्यवस्था को सहज और सरल कर दिया है। पीएम मोदी ने देश के बुनियादी ढांचे में जम कर निवेश किया है। नई सड़कों का निर्माण, हाइवे, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और एयरपोर्ट ने देश की लंबी आर्थिक संभावनाओं में नई उम्मीदें जगाई हैं। कई ऐसे गांवों में बिजली पहुंची जहां 70 सालों से अंधेरा था। मोदी के ये आर्थिक सुधार विकास के लिए वरदान बने हैं।

मैग्जीन 20 मई से बाजार में होगी लेकिन चुनावी मौसम में इस पर महाभारत पहले ही छिड़ गई है। प्रधानमंत्री की छवि के ख़िलाफ टाइम का ये कवर और लेख सवाल खड़े करता है कि क्या TIME का ये लेख भारत की निजता और अस्मिता पर हमला नहीं? भारत में चुनाव के वक्त TIME के इस आर्टिकल के क्या मायने? क्या भारतीय चुनाव व्यवस्था में दखलंदाजी की साजिश की जा रही है?

इस पूरी चर्चा के बाद यही सामने आता है कि दुनिया में चुनाव प्रणाली में दखल देने, उसे प्रभावित करने के कई किस्से सामने आ चुके हैं। खुद अमेरिकी चुनाव में रूसी दखल की बात सामने आ चुकी है। लेकिन टाइम मैगजीन के इस लेख ने ना सिर्फ भारतीय स्वाभिमान को ललकारा है, बल्कि एक बड़ी साजिश की बू भी इस लेख से आती है। भारत की नकारात्मक छवि पेश की जाने की इस कोशिश को हमें एकजुट होकर नाकाम करना चाहिए।

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