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योगी-त्रिवेंद्र रावत के प्रचार से भाजपा को मिलेगी बढ़त?

दिल्ली में करीब 25 फीसदी मतदाता मूलरूप से पूर्वांचल के हैं जो दिल्ली की करीब 30 सीटों पर असर डालते हैं। इनमें से 15 सीटों पर पूर्वांचल के वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं... आम आदमी पार्टी ने 15 तो भाजपा ने 8 सीटों पर पूर्वांचल के नेताओं को मैदान में उतारा है... 8 फरवरी यानी शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। ऐसे में भाजपा हो या आम आदमी और कांग्रेस हो या बसपा सभी दलों की नजर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वोटरों पर टिकी हुई हैं।

देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश की क्या हैसियत है जगजाहिर है। देश की सत्ता पर कौन सा दल या गठबंधन राज करता है... इसकी तस्वीर 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश से ही तय होती है... उत्तर प्रदेश का जनादेश ही देश का जनादेश होगा ये देश की राजनीति का सबसे सफल फार्मूला है... जिसकी मिसाल पिछले दो लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिल चुकी है... 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 85 में से 78 सीटें जीत कर सरकार बनाई और 2019 के लोकसभा चुनावों में यूपी-उत्तराखंड की 69 सीटें जीत कर एक बार फिर साबित किया... कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है, लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सिर्फ देश की सत्ता का समीकरण ही नहीं.. बल्कि पड़ोसी राज्य दिल्ली के चुनाव पर भी खासा असर डालते है... दिल्ली में किसकी सरकार बनेगी... इसका फैसला काफी हद तक दिल्ली में रहने वाले यूपी-उत्तराखंड के लाखो लोग करते हैं।

दिल्ली में करीब 25 फीसदी मतदाता मूलरूप से पूर्वांचल के हैं जो दिल्ली की करीब 30 सीटों पर असर डालते हैं। इनमें से 15 सीटों पर पूर्वांचल के वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं... आम आदमी पार्टी ने 15 तो भाजपा ने 8 सीटों पर पूर्वांचल के नेताओं को मैदान में उतारा है... 8 फरवरी यानी शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। ऐसे में भाजपा हो या आम आदमी और कांग्रेस हो या बसपा सभी दलों की नजर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वोटरों पर टिकी हुई हैं।

दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचल और उत्तराखंड के लाखों वोटरों को अपने पाले में करने के लिए चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। भाजपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिल्ली के लिए अपना स्टार प्रचारक बनाया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 से 4 फरवरी तक दिल्ली के किराड़ी, सौरभ विहार, करावल नगर, मंडावली, शिव विहार, उत्तम नगर, द्वारका, कटवरिया सराय, तुगलकाबाद, जहांगीरपुरी, नरेला और रोहिणी में कुल 12 रैलियां की... इसके अलावा दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड के मतदाताओं को साधने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत ने भी दिल्ली में 1 से 6 फरवरी के बीच 20 जनसभाएं की थी, लेकिन 8 फरवरी को होने वाले मतदान और 11 फरवरी को आने वाले नतीजों के बाद ही साफ होगा... कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में यूपी और उत्तराखंड के वोटर दिल्ली में किसके साथ हैं। और इसी मुद्दे से जुड़े हमारे आज के सवाल हैं कि 'यूपी-उत्तराखंड' के वोटर तय करेंगे कि किसकी होगी दिल्ली?... क्या सीएम योगी औरत्रिवेंद्र रावत के प्रचार से भाजपा को दिल्ली विधानसभा चुनाव में बढ़त मिलेगी... और 'पूरबिया' बयार से क्या दिल्ली की सियासी फिजा बदलेगी?

देश की राजधानी दिल्ली वैसे तो पूरे देश के लोगों की नुमाइंदगी करती है, लेकिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से जाकर बसे लाखों लोग आज दिल्ली की राजनीति की बड़ी ताकत बन चुके हैं। देश की सियासत में दबदबा कायम रखने वाले उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड के वोटर भी आज दिल्ली विधानसभा चुनावों में खासी अहमियत रखते हैं। चाहे वो उत्तराखंड के सीमावर्ती गावों से गए लोग हों या फिर दिल्ली में रह रही पूर्वी उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी। ऐसे में यूपी उत्तराखंड के वोटर की अनदेखी करने की भूल कोई भी दल नहीं कर सकता, क्योंकि ये वोटर जिस तरफ झुकेगा सरकार बनाने के लिए उसकी राह आसान हो जाएगी।

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