एक्सप्लोरर

सिर्फ शब्दों के बाण से योगी सरकार से निपट पाएंगे अखिलेश ?

अखिलेश के निशाने पर योगी सरकार है...रामपुर प्रशासन है...लेकिन सियासी विरोध के पैमाने चुनाव के लिहाज से बदल जाते हैं....लोकसभा चुनाव में सपा की सहयोगी रही बसपा और उसकी प्रमुख मायावती को लेकर अखिलेश कुछ बोलने से बचना चाहते हैं।

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार पर आरोप लग रहा है विपक्ष की अनदेखी का...वो भी तब जब विपक्ष के एक नेता पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है...और अपने नेता को बचाने के लिए पार्टी अध्यक्ष संघर्ष करना चाहते हैं...दरअसल ये पूरा विवाद अखिलेश यादव रामपुर दौरे को लेकर था...जिसमें वो अपने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के हक में खड़े होना चाहते थे...आजम मुकदमो की सेंचुरी के नजदीक हैं...इससे पहले मुलायम भी आजम के समर्थन में आवाज उठा चुके हैं...इसी कड़ी में अखिलेश आजम के घर जाने वाले थे...लेकिन अखिलेश के मुताबिक प्रशासन सरकार के हाथों कठपुतली बना हुआ है...मोहर्रम और गणेश पूजा जैसे त्योहारों के मद्देनजर धारा 144 लागू है...लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से अखिलेश रिस्क लेना नहीं चाहते...या प्रशासन उन्हें सुरक्षा नहीं देना चाहता...ये साफ नहीं है...लेकिन ये साफ है कि अखिलेश की सुरक्षा घटाए जाने के बाद...वो इस तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते...सुरक्षा का संकट नेताओं को विरोध भी नहीं करने दे रहा...क्या ये मान लिया जाए कि सुरक्षा घटा कर विपक्ष पर अंकुश लगा दिया गया है...क्या जनता के बीच जाकर संघर्ष करने से डर रहे हैं विपक्षी नेता...सवाल ये भी है कि आखिर प्रचंड बहुमत पाने के बाद योगी सरकार को विपक्ष के नेताओं से डर क्यों लगता है...विपक्षी नेताओं के कहीं आने-जाने से सरकार को डर क्यों लगता है?

अखिलेश के निशाने पर सरकार तो है ही प्रशासनिक मशीनरियां भी हैं...जो अखिलेश के मुताबिक सरकार के हाथों कठपुतली बनी हुई है...रामपुर डीएम पर अखिलेश के इल्जाम और भी संगीन हो जाते हैं...अखिलेश के मुताबिक रामपुर प्रशासन खास मकसद से आजम के पीछे पड़ा है...अखिलेश भी आजम की हिमायत में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हैं...लेकिन आजम पर मुकदमों की तादाद उम्र से ज्यादा हो चुकी है।

रामपुर से लोकसभा सदस्य आजम खान और उनके परिवार ताजा मुकदमा तो बिजली चोरी का लिखा गया है...लेकिन आजम पर शत्रु संपत्ति को वफ्फ संपत्ति में दर्ज करने और उसे हड़पने का आरोप है...यहां सिर्फ आजम ही नहीं उनकी पत्नी तजीम फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है...इसके अलावा उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल बोर्ड लखनऊ के अध्यक्ष वसीम रिजवी और सुन्नी वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष जफर फारुखी समेत वफ्फ बोर्ड के अधिकारियों सहित कुल नौ लोगों पर केस दर्ज हुआ है...आजम की जौहर यूनिवर्सिटी की मुमताज सेंट्रल लाइब्रेरी से चोरी की पुरानी और महंगी किताबें बरामद की गई और इस दौरान रियासतकालीन रामपुर क्लब से चुराई गई शेरों की मूर्तियां रखी मिलीं...इसे लेकर भी आजम पर केस दर्ज किया गया है... 29 अगस्त को आजम खान पर पांच मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से दो मामले भैंस चोरी के भी हैं...इसके अलावा लूट, डकैती और जबरन मकान तुड़वा कर अपने स्कूल बनवाने जैसे आरोप भी उन पर हैं...आजम खान पर सरकारी ज़मीन पर खड़े कत्थे के 2,173 पेड़ कटवाने का इल्जाम लगा है...मुकदमों की बात की जाए तो जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की जमीन हड़पने के मामले में आजम खान पर 23 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं। अखिलेश के निशाने पर योगी सरकार है...रामपुर प्रशासन है...लेकिन सियासी विरोध के पैमाने चुनाव के लिहाज से बदल जाते हैं....लोकसभा चुनाव में सपा की सहयोगी रही बसपा और उसकी प्रमुख मायावती को लेकर अखिलेश कुछ बोलने से बचना चाहते हैं।

अखिलेश यादव बसपा प्रमुख मायावती से हाल फिलहाल तक जुड़े रहे हैं...उन्हें बुआ भी मानते हैं...इसलिए भरी मीडिया के सामने वो कुछ बोलने से कतरा रहे हैं...लेकिन सच्चाई यही है कि मायावती के कदम से फिक्र अखिलेश को भी है...मायावती को वो कदम हम आपको बताते हैं।

मायावती ने रविवार रात ही दिल्ली में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं से मुलाकात की। इस मुलाकात में हरियाणा कांग्रेस के चुनाव प्रचार प्रमुख और दो बार मुख्यमंत्री रहे भूपिंदर सिंह हुड्डा हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष कुमारी शैलजा मौजूद रहीं। 90 विधानसभा सीटों पर अक्टूबर में यहां चुनाव होना है...माना जा रहा है कि दोनों पार्टियों में गठबंधन हो सकता है...ये बैठक बसपा सुप्रीमो ने पिछले सप्ताह आईएनएलडी से अलग होकर दुष्यंत चौटाला की अगुआई में बने जननायक जनता पार्टी से चुनाव पूर्व गठबंधन तोड़ने के बीच हुई है। दुष्यंत चौटाला ओम प्रकाश चौटाला के पोते हैं...जजपा ने बसपा को 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, जिसे बीएसपी ने ठुकरा दिया। हरियाणा में बसपा की कांग्रेस के साथ नजदीकी को लेकर अखिलेश को ये फिक्र है कि कहीं विधानसभा चुनाव तक ये रिश्ता यूपी में भी न दिखने लगे। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को ये एलान क्यों करना पड़ा, ये भी समझ लीजिए...ऐसा नहीं कि पीएम मोदी, सीएम योगी या फिर भाजपा के अकेले दम पर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने को लेकर अब पूर्व सीएम अखिलेश भी जोश में हैं...बल्कि ये असल में दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीने वाली हकीकत है..अखिलेश यादव ने पिछले दिनों हुए लोकसभा चुनाव और उससे पहले विधानसभा चुनाव के दौरान दो बड़ी पार्टियों से समझौता किया, लेकिन नतीजा ये हुआ कि सपा का अपना पुराना जनाधार भी उनके पास से खिसक गया...सियासी तराजू में अखिलेश का दम बढ़ने की जगह अखिलेश का पलड़ा और हलका हो गया...लिहाज़ा अखिलेश ने अकेले चुनाव लड़ने में ही भलाई समझी है।

2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान यूपी के लड़कों का नारा बुलंद करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी साथ आए थे। अखिलेश ने 298 सीटें सपा के खाते में रखीं और पूरी दरियादिली से 105 सीटें कांग्रेस को दीं...लेकिन जब नतीजे आए तो दोनों का सूपड़ा साफ हो गया...उस वक्त की सत्ताधारी सपा 2017 विधानसभा चुनाव में जहां 47 सीट पर सिमट गई...तो कांग्रेस केवल 7 सीटों पर अपनी जीत दर्ज करा पाई...

प्रेस कांफ्रेंस के जरिये सरकार पर शब्दों के बाण चलाना और वक्त-वक्त पर रणनीति बदलना...लेकिन सड़क पर उतर कर संघर्ष करने से बचना आखिर अखिलेश किस तरह की राजनीति करना चाहते हैं...यूपी में विपक्ष का बड़ा चेहरा समाजवादी पार्टी की इन्हीं राजनीति पैंतरों से आज ये सवाल निकल रहे हैं कि...

क्या सिर्फ शब्दों के बाण से योगी सरकार से निपट पाएंगे अखिलेश? क्या जनता के बीच जाकर संघर्ष करने से कतरा रहे हैं सपा सुप्रीमो? और कमजोर विपक्ष के बावजूद सरकार को विरोधी नेताओं से कैसा डर?

लोकतंत्र में संघर्ष से सत्ता पाने वाले नेता अब कम ही बचे हैं । अखिलेश यादव को तो वैसे भी सत्ता विरासत में मिली थी। शायद इसीलिए वो दोबारा सत्ता हासिल करने और अपना वजूद कायम रखने के लिए तरह-तरह के प्रयोग करते रहते हैं। पहले कांग्रेस फिर बसपा और अब अकेले लड़ना इसी प्रयोग का हिस्सा माना जा रहा है। संघर्ष से कतराने की बात इसलिए नजर आती है, क्योंकि आजम खां को लेकर अखिलेश जागे भी तब जब मुलायम ने खुलेतौर पर कार्यकर्ताओं से आंदोलन की बात कही। हालांकि आंदोलन या संघर्ष का रास्ता अपनाने से अखिलेश अभी भी हिचकिचा रहे हैं। जब सामने विपक्ष इतना कमजोर हो तो उसे काबू करना सत्ता के लिए और आसान हो जाता है। वैसे भी यूपी सरकार कई मौकों पर साफ कर चुकी है कि उसे विरोध सख्त नापसंद है।

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

इंडिया गठबंधन आज करेगा बड़ा ऐलान, राहुल संग चाय पर चर्चा के बाद पीसी, जानें प्लान
इंडिया गठबंधन आज करेगा बड़ा ऐलान, राहुल संग चाय पर चर्चा के बाद पीसी, जानें प्लान
तेजस्वी यादव का बड़ा सवाल, 'अगर ज्ञानेश कुमार सही थे तो…'
तेजस्वी यादव का बड़ा सवाल, 'अगर ज्ञानेश कुमार सही थे तो…'
'वे सहमत हुए, क्योंकि मैंने...' रूस-यूक्रेन पीस डील को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
'वे सहमत हुए क्योंकि मैंने कहा...' रूस-यूक्रेन पीस डील पर बोले ट्रंप
नॉर्थ अमेरिका में बॉलीवुड फिल्मों की धूम, 'धुरंधर 2' बनी नंबर 1, जानें- 'दृश्यम 3' को टॉप 10 लिस्ट में मिली कौन सी जगह ?
नॉर्थ अमेरिका में बॉलीवुड फिल्मों की धूम, जानें- टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट

वीडियोज

सगाई के बाद... किडनैपिंग का प्लान !
विपक्षी मार्च..'शिव बारात' या 'अराजक जमात'?
Gyanesh Kumar के खिलाफ Rahul Gandhi अब क्या करेंगे?
CEC पर बवाल...अब सुप्रीम कोर्ट ही करेगा समाधान?
Gyanesh Kumar के खिलाफ Rahul Gandhi का 'तांडव'!

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
इंडिया गठबंधन आज करेगा बड़ा ऐलान, राहुल संग चाय पर चर्चा के बाद पीसी, जानें प्लान
इंडिया गठबंधन आज करेगा बड़ा ऐलान, राहुल संग चाय पर चर्चा के बाद पीसी, जानें प्लान
तेजस्वी यादव का बड़ा सवाल, 'अगर ज्ञानेश कुमार सही थे तो…'
तेजस्वी यादव का बड़ा सवाल, 'अगर ज्ञानेश कुमार सही थे तो…'
'वे सहमत हुए, क्योंकि मैंने...' रूस-यूक्रेन पीस डील को लेकर ट्रंप का बड़ा दावा
'वे सहमत हुए क्योंकि मैंने कहा...' रूस-यूक्रेन पीस डील पर बोले ट्रंप
नॉर्थ अमेरिका में बॉलीवुड फिल्मों की धूम, 'धुरंधर 2' बनी नंबर 1, जानें- 'दृश्यम 3' को टॉप 10 लिस्ट में मिली कौन सी जगह ?
नॉर्थ अमेरिका में बॉलीवुड फिल्मों की धूम, जानें- टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट
इंग्लैंड को झटका, लंबे समय तक बाहर रहेंगे जोस बटलर? हॉस्पिटल से शेयर की तस्वीर
इंग्लैंड को झटका, लंबे समय तक बाहर रहेंगे जोस बटलर? हॉस्पिटल से शेयर की तस्वीर
एक महल से दूसरे महल क्यों भागे फिर रहे सऊदी क्राउन प्रिंस? खालिद एयरपोर्ट बंद
एक महल से दूसरे महल क्यों भागे फिर रहे सऊदी क्राउन प्रिंस? खालिद एयरपोर्ट बंद
शिवा शर्मा मर्डर: हर साल बदल जाता था नंबर, दोस्त की मदद से नेपाल भागी आरोपी श्रद्धा
शिवा शर्मा मर्डर: हर साल बदल जाता था नंबर, दोस्त की मदद से नेपाल भागी आरोपी श्रद्धा
गांधी परिवार की संपत्तियों पर रोक लगाने से HC का इनकार, ED को नहीं मिली राहत
गांधी परिवार की संपत्तियों पर रोक लगाने से HC का इनकार, ED को नहीं मिली राहत
Embed widget