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हमास और हिजबुल्ला को बर्बाद करने पर तुला इजरायल, ईरान के साथ लेकिन नहीं चाहेगा युद्ध

अक्टूबर में हमास ने इज़रायल पर हमला किया, उसके बाद से अब तक इज़राइल की ओर से जवाबी कार्रवाई चल रही है. अभी तक युद्ध बंद नहीं हुआ है, हालांकि मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए इजरायल ने अपनी सीमा सहित तीन जगहों से राहत-सामग्री गाजा में जाने की इजाजत दी है. इजरायल ने यह भी कहा था कि वो पूरी तरह से हमास का सत्यानाश करने के बाद ही रुकेगा. इस बीच उसकी ईरान और हिजबुल्ला से भी कई बार झड़प हुई. अब आशंका जतायी जा रही है कि यह युद्ध ईरान तक पहुंचेगा, क्योंकि पिछले दिनों सीरिया में ईरान के दूतावास पर हमला हुआ जिस पर अभी तक इज़राइल ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है.

इजरायल है सतर्क और सावधान

अगर हम बात करें पश्चिम एशिया की और वहां के राजनीतिक-रणनीतिक समीकरणों की, तो इजरायल पर हमले से पहले तो ऐसा बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था कि हमास और इजरायल के बीच युद्ध इतना लंबा खिंच जाएगा. दो दिन पहले सीरिया के दमिश्क में ईरान के दूतावास पर कथित तौर पर इजरायल ने हमला किया. जिसमें आईआरजीसी के चार सदस्यों यानी की सलाहकारों की मौत हो गई. उसकी वजह से ये आशंका है कि ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई इजरायल पर हो. ईरान ने ऐसा जरूर बोला है कि वो इसके खिलाफ एक्शन लेगा, लेकिन अभी तक दो दिन बीत जाने के बाद भी ईरान ने कोई खास ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दिखाई है. ईरान का बदला कितना बड़ा होगा ये आने वाले समय में देखना होगा. जवाबी कार्रवाई की आशंका को ध्यान में रखकर इजरायल ने अपने सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी है. इजरायल ने अपने वायु सेना को भी तैयार रखा है.

स्थिति से ऐसा तो नहीं लग रहा है कि इजरायल ईरान पर डायरेक्ट कोई एक्शन लेगा. जब सीरिया पर इजरायल ने हमला किया था तब ईरान ने जवाबी कार्रवाई के लिए कड़े एक्शन करने की बात कही थी. उसी की आशंका को लेकर इजरायल ने अपने सैनिकों की छुट्टियां रद्द कर दी है और अपनी सैन्य व्यवस्था को अलर्ट मोड में रखा है. ये जो भी तैयारियां की गई है सिर्फ कार्रवाई की आशंका को ध्यान में रखकर ऐसा किया गया है. दरअसल इजरायल ने हमास पर जब जवाबी कार्रवाई की तो हमास के साथ ईरान सिर्फ खड़ा था. हिजबुल्ला ने इस दौरान इजरायल पर आक्रमण भी किया और बाद में इजरायल ने जवाबी कार्रवाई भी की. हमेशा से लगा कि एक तीसरा फ्रंट भी खुल जाएगा. इस मामलों में पश्चिम एशिया के देश भी बिल्कुल चुप्पी साधे हुए हैं.

ईरान से युद्ध नहीं चाहता इजरायल

पश्चिम एशिया के गठबंधन और समीकरणों को देखें तो सीरिया, ईरान और लेबनान का एक त्रिकोण है, जिसमें कि लेबनान में हिजबुल्ला एक पॉलिटिक्ल संस्थान था. इससे पहले वो एक आतंकी संगठन था. हमास को ईरान और सीरिया के द्वारा सपोर्ट किया जाता है. हमास ने इजरायल पर आक्रमण किया उसके बाद इजरायल ने जब हमास पर आक्रमण किया तो उसका विरोध सीरिया, ईरान और लेबनान ने किया था. ये क्षेत्र पूरी तरह से शिया मुस्लिमों का माना जाता है. अधिकांशतः ये ईरान के प्रभाव में आते हैं. 2006 से ही ये सब आपस में एक साथ है. ईरान का एक सपोर्ट सीरिया की बशर अल-असद सरकार को है. उस वजह से हमास सीरिया और गाजा से ऑपरेट करता है. इसलिए ईरान पर प्रत्यक्ष रूप से इजरायल हमला नहीं करेगा, इसकी एक वजह यही थी कि उसने सीरिया में दूतावास पर अटैक किया. इजरायल हमास को खत्म तो करना चाहता है लेकिन ईरान से वो युद्ध नहीं करना चाहता. क्योंकि ऐसा होने से युद्ध बढ़ेगा और इसमें बाहरी सैनिकों को आना हो जाएगा जिससे कि युद्ध काबू में ना रह पाएगा और ये हाथ से बाहर चला जाएगा, और खास तौर पर ये इजरायल बिल्कुल भी नहीं चाहेगा. हालांकि, इस मामले में अमेरिका ने अभी तक कुछ बोला नहीं है, सिर्फ घटना की निंदा की है. 

अमेरिका करेगा इजरायल का सपोर्ट

अगर मामला आगे बढ़ता है या युद्ध की स्थिति बनती है तो यकीनन अमेरिका इसमें जुड़ेगा. लेकिन वह इजरायल की ओर से ही शामिल होगा. जब पहली बार हमास ने अक्टूबर माह में इजरायल पर अटैक किया तो तुरंत अमेरिका ने अपने एक नौसैनिक दस्ते को भेज दिया. उस हिसाब से अमेरिका का सहयोग इजरायल को देगा. देखा जाए तो अब इजरायल को सम्मान जनक हाल में युद्ध की समाप्ति कर देनी चाहिए. हालांकि, स्थिति ये है कि हमास को पूरी तरह से खत्म ना करके इसी तरह छोड़ देता है तो वो भी इजरायल के लिए एक खतरा साबित हो सकता है.

इजरायल में जो फैसला लेने वाले ये भी सोचने हैं कि बार-बार हमास को छोड़ देने के बाद वो फिर से अटैक करने वाला बन सकता है. इसमें जान और माल की हानि के अलावा खुद भी इजरायल को नुकसान हो रहा है. इससे इजरायल का प्रभाव भी काफी कम हो रहा है. वर्तमान में इजरायल की घरेलू राजनीति भी हिली हुई है. इजरायल के प्रधानमंंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुद भी प्रभावित कर पाने में सक्षम नहीं रहे हैं. इसलिए इजरायल को अब अपने पैर खुद से पीछे खींच लेने चाहिए, और इसे धीरे-धीरे कम कर देना चाहिए. हालांकि, इजरायल ये बिल्कुल नहीं करेगा, क्योंकि उसे लगता है कि हिजबुल्ला और हमास कभी भी उसके लिए बाद में दुश्मन बन सकते हैं. इसलिए जब तक दोनों को बुरे हाल में ना ला दे तब तक इजरायल युद्ध को बंद करता नहीं दिख रहा है.
 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ़ लेखक ही ज़िम्मेदार हैं.]   

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