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बजट में अर्थव्यवस्था की लड़खड़ाहट संभालने पर जोर, मिडिल क्लास और किसानी पर है केंद्रित

1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार का आठवां केंद्रीय बजट पेश किया. इस बजट में मध्यम वर्ग को कर राहत देने , समावेशी विकास को बढ़ावा देने, और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं. बजट का उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना और विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित प्रगति सुनिश्चित करना है.

आयकर में राहत

सरकार ने मध्यम वर्ग के करदाताओं को राहत देते  हुए आयकर छूट की सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये वार्षिक कर दिया है. इसका अर्थ है कि अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई आयकर नहीं लगेगा. इसके अतिरिक्त, कर स्लैब में भी बदलाव किए गए हैं, जिससे करदाताओं को और अधिक लाभ मिलेगा. उदाहरण के लिए, 12 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक की आय पर 10% कर, 15 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक की आय पर 15% कर, और 20 लाख रुपये से अधिक की आय पर 20% कर लगाया जाएगा. इन परिवर्तनों से मध्यम वर्ग की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी ऐसी उम्मीद है, जो उपभोग में वृद्धि और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा.

आर्थिक विशेषज्ञों ने बजट के इस प्रावधान की सराहना की है. कुछ वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग के लोगों के हाथ में अधिक धन रहेगा, जिससे उपभोग में वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा." हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने राजकोषीय घाटे पर चिंता ज़ाहिर  की है. उनके मुताबिक़ "टैक्स छूट बढ़ाने से सरकार के राजस्व में कमी आ सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा है."

इसके अलावा , डेलॉइट इंडिया के विशेषज्ञों ने बजट में अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स का विस्तार, कॉर्पोरेट कर दरों में कमी, और सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) को बढ़ावा देने जैसे सुधारों की सिफारिश की है. उनका मानना है कि इन सुधारों से भारत के कारोबारी माहौल को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है.

सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बजट की सराहना की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "यह बजट सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और देश के समग्र विकास को गति देगा."विपक्षी दलों ने बजट की आलोचना की है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा, "यह बजट केवल अमीरों के हित में है और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया गया है." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम नहीं उठाए हैं.

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने बजट की सराहना करते हुए कहा, "यह बजट बिहार जैसे राज्यों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इससे बुनियादी ढांचे में सुधार होगा." शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे ने कहा, "बजट में महाराष्ट्र के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जो राज्य के विकास में सहायक होंगे."

इंडिया गठबंधन के नेताओं की प्रतिक्रियाएं

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने बजट की आलोचना करते हुए कहा, "यह बजट पश्चिम बंगाल के साथ भेदभावपूर्ण है और राज्य के विकास के लिए आवश्यक धनराशि का आवंटन नहीं किया गया है."द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता एम.के. स्टालिन ने कहा, "बजट में तमिलनाडु के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किए गए हैं, जो राज्य के विकास को प्रभावित करेगा."


आम आदमी की प्रतिक्रियाएं

मध्यम वर्ग के कई लोगों ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाने के निर्णय का स्वागत किया है. दिल्ली निवासी राजेश शर्मा ने कहा, "आयकर छूट की सीमा बढ़ने से हमारी बचत में वृद्धि होगी, जिससे हम अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे."हालांकि, कुछ लोगों ने महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर बजट में ठोस उपायों की कमी पर निराशा व्यक्त की है. मुंबई की गृहिणी सुमन वर्मा ने कहा, "रसोई गैस और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए बजट में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं."

बजट के अन्य प्रमुख बिंदु

कृषि क्षेत्र का समर्थन: किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश: सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जिसमें नए अस्पतालों की स्थापना और मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन का प्रावधान है. शिक्षा क्षेत्र में सुधार: शिक्षा के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है,जिसमें डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और नए विद्यालयों की स्थापना का प्रावधान है.

इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें सड़कों, रेल, और हवाई अड्डों के विकास पर खर्च होगा.

निष्कर्ष

बजट 2025 कई मायनों में ऐतिहासिक है, क्योंकि इसमें मध्यम वर्ग को कर राहत दी गई है और बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाया गया है. सरकार ने इसे विकासोन्मुखी बजट बताया है, जबकि विपक्ष ने इसकी आलोचना करते हुए इसे केवल अमीरों और उद्योगपतियों के पक्ष में बताया है.

आम जनता की राय भी मिली-जुली रही. कई मध्यमवर्गीय परिवारों को इनकम टैक्स में छूट से राहत मिलेगी, लेकिन महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह बजट ठोस समाधान लेकर नहीं आया. एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों ने बजट की सराहना की, जबकि इंडिया गठबंधन के नेता इसे दिशाहीन और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं.

हालांकि, आने वाले महीनों में बजट की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं और इससे अर्थव्यवस्था को वास्तविक मजबूती मिलती है या नहीं.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.] 

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