हर 3 महीने बढ़ेंगे कारों के दाम? Mercedes ने दिया बड़ा संकेत
Mercedes-Benz India ने 2026 में चार बार कीमतें बढ़ाईं. कंपनी के मुताबिक बढ़ती लागत, कमजोर रुपये और लॉजिस्टिक्स दबाव के बीच तिमाही प्राइस हाइक नया नॉर्मल बन सकता है

भारत में लग्जरी कारों की कीमतों को लेकर Mercedes-Benz India के एक बयान ने नई चर्चा शुरू कर दी है. कंपनी के MD और CEO Santosh Iyer ने कहा है कि बढ़ती लागत के बीच हर तिमाही कीमतों में बदलाव करना अब कंपनी के लिए “न्यू नॉर्मल” बनता जा रहा है. Mercedes-Benz India ने 2026 में जनवरी, अप्रैल और जुलाई के बाद 1 अक्टूबर को भी अपनी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की है.
कंपनी के मुताबिक, वह हर तिमाही करीब 1.5 से 2 फीसदी तक कीमत बढ़ा रही है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में सभी कार कंपनियां अब हर तीन महीने कीमत बढ़ाएंगी. यह फिलहाल Mercedes-Benz India की अपनी लागत और कीमतों को संभालने की रणनीति है. कंपनी का कहना है कि वह बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल रही है.
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आखिर क्यों बढ़ रही हैं कारों की कीमतें.
Mercedes-Benz के मुताबिक, कीमतों पर कई तरह का दबाव है. इनमें भारतीय रुपये का यूरो के मुकाबले कमजोर होना, बढ़ती इनपुट लागत, महंगाई और लॉजिस्टिक्स खर्च शामिल हैं. कंपनी के लिए यह समस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके पोर्टफोलियो में भारत में स्थानीय रूप से बनने वाली कारों के साथ पूरी तरह आयातित मॉडल भी शामिल हैं. Santosh Iyer ने बताया कि शिपिंग टाइमलाइन भी लंबी हो रही है, जिससे लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. कंपनी ने इससे पहले भी कहा था कि रुपये में कमजोरी और यूरो-रुपया विनिमय दर में बदलाव का असर उसके ऑपरेशन पर पड़ रहा है. ऐसे में एक बार में बड़ा प्राइस हाइक करने के बजाय कंपनी छोटे-छोटे अंतराल पर कीमतों में बदलाव करके लागत के असर को संभालने की कोशिश कर रही है.
ग्राहकों पर कितना पड़ेगा असर.
बार-बार कीमत बढ़ने का सीधा असर नई Mercedes खरीदने वाले ग्राहकों के बजट पर पड़ सकता है. हालांकि कंपनी का कहना है कि वह लागत का पूरा भार ग्राहकों तक नहीं पहुंचा रही है और करीब 1.5 से 2 फीसदी के तिमाही एडजस्टमेंट के जरिए इसे संभाल रही है. Mercedes ने फाइनेंसिंग ऑफर्स और Dream Days जैसे कैंपेन के जरिए भी बढ़ी कीमतों का असर कम करने की कोशिश की है. इसके बावजूद, अगर रुपये पर दबाव और दूसरी लागतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो आगे भी कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं. यहां यह साफ करना जरूरी है कि कंपनी ने हर तिमाही निश्चित प्रतिशत की कीमत बढ़ाने का कोई स्थायी नियम घोषित नहीं किया है. कीमतों का फैसला उस समय की लागत, करेंसी और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा.
Mercedes की बिक्री पर नहीं दिखा बड़ा असर.
दिलचस्प बात यह है कि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद Mercedes-Benz India की बिक्री पर फिलहाल मजबूत मांग का असर दिख रहा है. जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कंपनी ने 15,190 कारें बेचीं, जो पिछले साल की समान अवधि के 14,132 यूनिट से करीब 8 फीसदी ज्यादा है. जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी ने 5,422 यूनिट की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जो सालाना आधार पर 6 फीसदी अधिक है. कंपनी के मुताबिक मांग मजबूत बनी हुई है और उसका ऑर्डर बैंक भी अच्छा है. यानी फिलहाल लग्जरी कार खरीदार बढ़ती कीमतों के बावजूद खरीदारी कर रहे हैं. आगे अगर लागत का दबाव जारी रहता है, तो Mercedes के लिए कीमत और मांग के बीच संतुलन बनाना अहम होगा.
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