Local Mechanic या Service Center, कहां कम होगा गाड़ी का खर्च?
लोकल मैकेनिक या अधिकृत सर्विस सेंटर कहां होगी गाड़ियों के मेंटेनेंस पर ज्यादा बचत. जानें वारंटी, पार्ट्स और लेबर चार्ज से जुड़े सटीक नियम.

आपने बहुत लोगों के मुंह से सुना होगा की गाड़ी खरीदना तो बेहद आसान है. लेकिन उसके सर्विसिंग के खर्चे असली परेशानी खड़ी करते हैं. क्योंकि, लगातार गाड़ी के चलते से उसके कई पार्ट्स खराब हो जाते हैं. जिसके चलते समय-समय पर सर्विसिंग कराना बहुत जरूरी है. लेकिन यह समस्या हर गाड़ी मालिक की होती है कि, कार की सर्विसिंग कंपनी से कराएं या बाहर किसी लोकल मकैनिक से. आज इस खबर में हम भी इस बात पर ही चर्चा करेंगे और जानेंगे कहा सर्विसिंग कराना सही पड़ता है और खर्चा कम पड़ता है.
हालांकि, ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि जेब के लिहाज से कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है और कहां आपको अपने पैसों की पूरी वैल्यू मिलती है. दोनों ही जगहों के अपने फायदे और नुकसान हैं जो गाड़ी की उम्र, मॉडल और वारंटी स्टेटस के हिसाब से बदल जाते हैं. चलिए समझते हैं कि किस स्थिति में गाड़ी सर्विस कराना कहां सबसे सस्ता और सुरक्षित रहेगा.
कीमत में आता है अंतर
बता दें कि, लोकल मैकेनिक और कंपनी सर्विस सेंटर के बिल में सबसे बड़ा अंतर लेबर चार्ज और स्पेयर पार्ट्स की कीमतों का होता है. क्योंकि, सर्विस सेंटर में तय स्टैंडर्ड लेबर रेट्स और 18% GST के साथ-साथ कई तरह के अतिरिक्त चार्ज जोड़े जाते हैं. जिससे बेसिक सर्विसिंग भी महंगी हो जाती है. वहां केवल कंपनी के ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स ही इस्तेमाल होते हैं जो काफी महंगे होते हैं.
वहीं, लोकल मैकेनिक का लेबर चार्ज सर्विस सेंटर की तुलना में 30% से 50% तक कम होता है. साथ ही लोकल मैकेनिक आपको OEM पार्ट्स के अलावा मार्केट में उपलब्ध अच्छी क्वालिटी के आफ्टरमार्केट विकल्प भी ऑफर करते हैं जिससे पार्ट्स का खर्च भी आधा रह जाता है.

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इस हालात में सर्विस सेंटर ही बेहतर
अगर आपकी कार नई है और कंपनी की मानक या एक्सटेंडेड वारंटी के दायरे में आती है तो ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर जाना ही सबसे सही फैसला होता है. अधिकांश ऑटोमोबाइल कंपनियां अपनी वारंटी पॉलिसी में साफ शर्त रखती हैं कि अगर गाड़ी की सर्विसिंग बाहर किसी अनधिकृत जगह कराई जाती है या नॉन-OEM पार्ट्स का इस्तेमाल होता है तो वारंटी रद्द की जा सकती है.
जिसके चलते आप हमेशा शुरुआत के 3 से 5 सालों तक सर्विस सेंटर अपनी गाड़ी ले जाएं भले मही थोड़ा ज्यादा खर्च हो रहा है. क्योंकि किसी बड़े कंपोनेंट जैसे इंजन या गियरबॉक्स में खराबी आने पर आपको फ्री रिप्लेसमेंट का क्लेम मिल जाता है जो लोकल मैकेनिक के पास संभव नहीं है.

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पुरानी गाड़ी के लिए लोकल मैकेनिक सही
वहीं, एक बार जब आपकी गाड़ी की वारंटी खत्म हो जाती है तो हर बार सर्विस सेंटर जाना जेब पर भारी पड़ सकता है. क्योंकि, ऑयल चेंज, ब्रेक पैड बदलना, सस्पेंशन का छोटा काम, व्हील अलाइनमेंट या बंपर डेंटिंग-पेंटिंग जैसे रूटीन कामों के लिए लोकल मैकेनिक सबसे सस्ता विकल्प साबित होते हैं.
एक पुराना और अनुभवी मैकेनिक इन रूटीन कामों को बहुत कम समय और कम बजट में पूरा कर देता है. लेकिन आधुनिक गाड़ियों में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और ECU डायग्नोस्टिक्स जैसे कामों के लिए कई बार लोकल गैरेज में सही स्कैनर और टूल्स नहीं होते जिसके लिए आपको सही मैकेनिक का चुनाव सोच-समझकर करना पड़ता है.
रिसेल वैल्यू का रखें हमेशा ध्यान
आपको बता दें कि, सिर्फ तुरंत होने वाली बचत को देखना ही समझदारी नहीं है बल्कि गाड़ी की लॉन्ग-टर्म हेल्थ और रिसेल वैल्यू को भी ध्यान में रखना चाहिए. ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर में गाड़ी की पूरी सर्विस हिस्ट्री डिजिटली मेंटेन रहती है. जब आप फ्यूचर में अपनी कार बेचने जाते हैं तो पूरी तरह सर्विस सेंटर से मेंटेन की गई गाड़ी की रीसेल वैल्यू मार्केट में 10% से 15% तक ज्यादा मिलती है.
इसलिए सबसे सही फॉर्मूला यह है कि नई और वारंटी वाली कार को ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर ले जाएं जबकि वारंटी खत्म हो चुकी पुरानी गाड़ियों के बेसिक मेंटेनेंस के लिए किसी भरोसेमंद और जानकार लोकल मैकेनिक की मदद लेकर अपने पैसे बचाएं.
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