फेरारी के अपमान का बदला कुछ इस तरह लिया, किसान के बेटे ने बना दी लैम्बॉर्गिनी जैसी सुपरकार
Lamborghini Success Story: एक किसान के बेटे फारुशियो लैम्बॉर्गिनी को फेरारी ने अपमानित किया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी स्पोर्ट्स कार कंपनी शुरू की और फेरारी को टक्कर दी.

Lamborghini Success Story: अगर आप कार के शौकीन हैं, तो लैंबॉर्गिनी का नाम जरूर सुना होगा. यह कंपनी दुनियाभर में अपनी लग्जरी और हाई-परफॉर्मेंस कारों के लिए मशहूर है. कंपनी के मॉडल्स का यूनिक डिजाइन इसे बाकी ब्रांड्स से अलग बनाता है. यही कारण है कि लोग इसकी कारों को बेहद पसंद करते हैं, लेकिन इस कंपनी की शुरुआत की कहानी और भी दिलचस्प है.
दरअसल, यह कहानी है उस किसान के बेटे की, जिसने अपने जुनून और आत्मसम्मान के दम पर दुनिया की सबसे शानदार स्पोर्ट्स कार ब्रांड की नींव रखी. एक समय फेरारी के मालिक की ओर से किए गए अपमान के बाद लैंबॉर्गिनी के फाउंडर ने दुनिया की सबसे बेहतरीन सुपरकार बना दी. आइए लैंबॉर्गिनी की इस दिलचस्प कहानी के बारे में जानते हैं.
ट्रैक्टर से कार तक का सफर
1945 में युद्ध खत्म होने के बाद, फारुशियो लेम्बोर्गिनी ने पुराने सैनिक वाहनों से ट्रैक्टर बनाने का काम शुरू किया. वह मूलतः किसान के बेटे थे, लेकिन मशीनों के प्रति गहरी रुचि के कारण वे सेना में मैकेनिक बन गए और वहां से सीख लेकर ट्रैक्टर उद्योग में उतर गए. कुछ ही वर्षों में, उनकी कंपनी Lamborghini Trattori इटली में ट्रैक्टर का बड़ा नाम बन गई. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.
Ferrari से मिली चुनौती
फारुशियो को स्पोर्ट्स कारों का बड़ा शौक था. उनके पास जगुआर, मासेराती, मर्सिडीज और दो फरारी कारें थीं, लेकिन फेरारी की गाड़ियों में बार-बार क्लच की खराबी उन्हें परेशान कर रही थी. जब उन्होंने अपने ट्रैक्टर मैकेनिक से कार चेक करवाई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया-फेरारी की कारों में वही क्लच इस्तेमाल हो रहा था, जो ट्रैक्टरों में होता है. फर्क बस यह था कि फेरारी इसे ठीक करने के लिए 1000 लीरा वसूलती थी और लेम्बोर्गिनी की फैक्ट्री में वही काम 10 लीरा में हो जाता था. जब फारुशियो ने ये बात सीधे एंजो फेरारी से कही, तो उन्होंने घमंड भरे लहजे में कहा, “समस्या कार में नहीं, तुम्हारे जैसे ट्रैक्टर बनाने वाले ड्राइवर में है.”
अपमान का जवाब बनी सुपरकार
एंजो फेरारी की यही बात फारुशियो के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा गई और उन्होंने निश्चय किया कि अब खुद की स्पोर्ट्स कार बनाएंगे. 1963 में उन्होंने Sant’Agata Bolognese, Italy में एक फैक्ट्री लगाई. कुछ बेहतरीन इंजीनियरों को काम पर रखा, जिनमें कुछ फेरारी से निकले हुए भी थे और पहली Lamborghini कार 350 GT तैयार की, जो 240 किमी/घंटा की स्पीड तक जा सकती थी. उन्होंने अपने राशि चिन्ह "वृषभ" (बैल) को ही अपनी कंपनी का प्रतीक चुना, जो आज Raging Bull के नाम से मशहूर है.
Ferrari Vs Lamborghini
Lamborghini 350 GT के लॉन्च के साथ ही एक नई रेस शुरू हो गई. एक ओर जहां फेरारी अपनी रेसिंग विरासत पर गर्व करती थी, वहीं लेम्बोर्गिनी ने लक्जरी, ताकत और डिजाइन के ऐसे मानक स्थापित किए जो आज भी दुनिया में बेजोड़ हैं. इन दोनों कंपनियों की स्पोर्ट्स कारें आज भी एक-दूसरे को कड़ी टक्कर देती हैं.
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Source: IOCL





















