EV, CNG या हाइब्रिड, आखिर किस तरफ जा रहा है भारत का कार बाजार?
भारतीय कार बाजार तेजी से बदल रहा है. जानिए पेट्रोल-डीजल की जगह EV, CNG और हाइब्रिड कारों की बढ़ती मांग और मल्टी-पावरट्रेन के ट्रेंड की पूरी जानकारी.

भारत का ऑटोमोबाइल मार्केट बहुत ही तेजी से बदल रहा है और इसका असर देखने को भी मिल रहा है. क्योंकि पहले जहां केवल पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की केवल भीड़ देखने को मिलती थी. लेकिन अब मार्केट में सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कई तरह के गाड़ियां बाजार में बिक रही हैं.
अब कंपनियां बहुत ही समझदारी से गाड़ियां बना रही हैं और अब आपको एक ही मॉडल की गाड़ी पेट्रोल, सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक सभी अवतार में मिल रही हैं. जिसके चलते पूरा मार्केट ही पूरी तरह से बदल चूका है और आज हम भी इस खबर में इसपर ही चर्चा करेंगे कि आखिर भारत का कार बाजार किस दिशा में बढ़ रहा है.
सीएनजी गाड़ियां बनी पहली पसंद
आपको बता दें कि मार्केट में पेट्रोल गाड़ियां के बाद सबसे ज्यादा किसी विकल्प का दबदबा बढ़ा है तो वह सीएनजी है. क्योंकि लगभग 25% से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ सीएनजी अब केवल बजट-फ्रेंडली टैक्सियों तक सीमित नहीं रही है बल्कि फैमिली कार खरीदारों की भी पहली पसंद बन चुकी है.
ऐसा इस लिए है क्योंकि मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में तो बिकने वाली नई कारों में सीएनजी की हिस्सेदारी 40% तक पहुंच चुकी है. मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हुंडई, किआ और हाल ही में महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों ने अपनी प्रीमियम एसयूवी और हैचबैक में फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी देना शुरू कर दिया है.

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हाइब्रिड दे रहीं हैं बेहतरीन माइलेज
अब जो ग्राहक पेट्रोल कार और इलेक्ट्रिक जैसी फ्यूल एफिशिएंसी दोनों एक साथ चाहते हैं उनके लिए हाइब्रिड टेक्नोलॉजी एक परफेक्ट मिडल-ग्राउंड बनकर उभरी है. टोयोटा, मारुति सुजुकी, होंडा और रेनो जैसी कंपनियां भारत में हाइब्रिड वाहनों पर काफी जोर दे रही हैं. टोयोटा की मल्टी-पाथवे रणनीति के तहत भारत जैसे विविधता भरे देश में हाइब्रिड कारें सबसे ज्यादा व्यावहारिक हैं.
बता दें कि हाइब्रिड गाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इन्हें बाहर किसी चार्जर से चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती. इनका सिस्टम खुद-ब-खुद ब्रेक लगाने और चलने के दौरान बैटरी को चार्ज कर लेता है. शहर के भारी ट्रैफिक में यह गाड़ियां बेहतरीन माइलेज देती हैं और हाइवे पर इंजन की पूरी पावर देती हैं.

इलेक्ट्रिक गाड़ियां रनिंग कॉस्ट न के बराबर
बता दें कि भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री बहुत तेजी से बढ़ा है. टाटा मोटर्स, महिंद्रा, जेएसडब्ल्यू एमजी, हुंडई और किआ जैसी दिग्गज ऑटो कंपनियां ईवी सेगमेंट में बड़े पैमाने पर इन्वेस्ट कर रही हैं. हालांकि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम अभी भी जारी है लेकिन जिन शहरों में चार्जिंग स्टेशन आसानी से मिल जाता है या जो लोग घर पर चार्ज कर सकते हैं वे सभी लोग ईवी गाड़ी खरीद रहे हैं.
क्योंकि इलेक्ट्रिक कारों का रनिंग कॉस्ट न के बराबर होता है और इनमें कोई गियर या इंजन का शोर न होने के कारण ड्राइविंग बेहद स्मूथ और शांत रहती है. नई टेक्नोलॉजी वाली बैटरियों के आने से अब इलेक्ट्रिक कारों की सिंगल-चार्ज रेंज भी 400 से 600 किलोमीटर तक होने लगी है जिससे रेंज की चिंता काफी हद तक कम हो गई है.
किस तरफ जा रहा है बाजार?
जानकारी दें दे कि भारत का कार बाजार अब किसी एक फ्यूल की तरफ नहीं बल्कि मल्टी-पावरट्रेन मॉडल की तरफ बढ़ रहा है. कार कंपनियां अब यह समझ चुकी हैं कि हर भारतीय ग्राहक की जरूरत, बजट और ड्राइविंग पैटर्न अलग होता है. मार्केट को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां और कम हो जाएंगी जबकि ईवी, हाइब्रिड और सीएनजी कारें मिलकर भारतीय सड़कों पर राज करेंगी.
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