700 km रेंज वाली Hyundai की ये हाइड्रोजन कार भारत में नहीं होगी लॉन्च, जानें क्या है वजह?
Hyundai Nexo Hydrogen Car: हुंडई ने अपने नए फ्यूल सेल EV Nexo को कोरिया में लॉन्च कर दिया है. हालांकि ये कार भारत में लॉन्च नहीं होगी. आइए इसके पीछे की वजह बताते हैं.

Hyundai Nexo Hydrogen Car: हुंडई ने हाल ही में कोरिया के Seoul Mobility Show में अपनी अपकमिंग हाइड्रोजन SUV ‘Nexo FCEV’ को पेश किया था. जिसके बाद कयास लगाया जा रहा था कि इसे भारत में भी लॉन्च किया जाएगा.
भारत में इसका इंफ्रास्ट्रक्चर अभी शुरुआती स्टेज में है और देशभर में फिलहाल केवल दो या तीन हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन मौजूद हैं. ऐसे में किसी भी हाइड्रोजन वाहन को भारत में लॉन्च करना न केवल असंभव है, बल्कि ग्राहकों के लिए भी पूरी तरह से यूजलेस साबित हो सकता है.
नई Hyundai Nexo में क्या है खास?
नई Hyundai Nexo एक फ्यूल सेल SUV है जो हाइड्रोजन गैस को फ्यूल के रूप में उपयोग करती है. इसका नया अवतार पूरी तरह से मॉडर्न और पावरफुल है. इसमें बॉक्सी, चौड़ी और लंबी SUV लुक, 700 किलोमीटर की रेंज, पहले से अधिक पावरफुल इलेक्ट्रिक मोटर, एडवांस हाइड्रोजन टैंक, Ioniq 5 जैसी प्रीमियम टेक्नोलॉजी और टिकाऊ इको-फ्रेंडली मैटेरियल्स शामिल हैं. इसके बावजूद भारत में इसका लॉन्च फिलहाल नहीं हो रहा है क्योंकि देश में हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन की भारी कमी है.
भारत में लॉन्च क्यों नहीं होगी Hyundai Nexo?
भारत में Hyundai Nexo का लॉन्च इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि देश में हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर फिलहाल इस SUV के लिए पर्याप्त नहीं है. पूरे भारत में हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशनों की संख्या मात्र दो से तीन है, जो बेहद सीमित है. इसके अलावा, फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी की लागत अभी काफी अधिक है, जिससे न केवल वाहन की कीमत बढ़ जाती है, बल्कि इसकी मरम्मत भी काफी खर्चीली हो जाती है. ग्राहकों में हाइड्रोजन वाहनों को लेकर जागरूकता और मांग भी बहुत कम है, जिससे इसकी डिमांड सीमित बनी हुई है. साथ ही, सरकारी नीतियों और सपोर्ट की भी कमी है. इलेक्ट्रिक वाहनों की तरह हाइड्रोजन कारों को वह समर्थन नहीं मिल रहा है.
क्या है हाइड्रोजन कारों का फ्यूचर?
दुनिया के अन्य बाजारों, खासकर चीन, जापान और कोरिया में हाइड्रोजन वाहनों की मौजूदगी धीरे-धीरे बढ़ रही है. फिर भी, 2024 में हाइड्रोजन कारों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. क्योंकि हाई प्राइस, फिलिंग स्टेशन की कमी और EVs की तुलना में कम सुविधा भी मिलती है.
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