पहाड़ों पर Electric Scooter कितना कामयाब? खरीदने से पहले जानें
क्या पहाड़ों और चढ़ाई वाले रास्तों पर इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाना सही फैसला है? जानिए पहाड़ों पर ईवी स्कूटर की परफॉर्मेंस, बैटरी लाइफ और खरीदने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें.

भारत में इन दिनों इलेक्ट्रिक गाड़ियों की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. इसका सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रिक स्कूटर हैं. क्योंकि, EV स्कूटर मार्केट में तेजी से ग्रोथ कर रहा. लेकिन इन दिनों एक सवाल बहुत ज्यादा चर्चित है और वह है पहाड़ी इलाकों में इलेक्ट्रिक स्कूटर सफल है या नहीं. आज इस खबर में भी हम इसपर ही चर्चा करेंगे कि, क्या एक इलेक्ट्रिक स्कूटर पहाड़ के कठिन रास्तों पर खरा उतर पाएगा.
तो आपको बता दें कि, इसका जवाब यह है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर पहाड़ों पर पूरी तरह कामयाब हैं और कई मायनों में पेट्रोल स्कूटरों से भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं. लेकिन समतल मैदानों और पहाड़ों पर ईवी चलाने के गणित में जमीन-आसमान का फर्क होता है. अगर आप किसी पहाड़ी क्षेत्र में रहते हैं और ईवी स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं तो शोरूम जाने से पहले आपको इसके फायदे, नुकसान और जरूरी फीचर्स को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए.
इंस्टेंट टॉर्क का बड़ा फायदा
आपको बता दें कि, इलेक्ट्रिक स्कूटरों का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू उनका इंस्टेंट टॉर्क होता है. जहां पेट्रोल स्कूटर को चढ़ाई पर रफ्तार पकड़ने में समय लगता है. वहीं ईवी स्कूटर एक्सीलेटर घुमाते ही तुरंत अपनी पूरी ताकत दे देता है. इससे खड़ी चढ़ाई या तीखे ढलानों पर बिना किसी लैग के गाड़ी आसानी से ऊपर चढ़ जाती है. जबकि इसके अलावा पहाड़ों पर पेट्रोल का माइलेज काफी कम हो जाता है.
लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर में रिजनरेटिव ब्रेकिंग का फीचर मिलता है. जब आप पहाड़ों से नीचे की ओर ढलान पर उतरते हैं तो यह सिस्टम ब्रेक के घर्षण और गाड़ी की गति से बैटरी को अपने आप थोड़ा चार्ज कर देता है जिससे ब्रेक्स पर दबाव भी कम पड़ता है और ऊर्जा भी बचती है.
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चढ़ाई पर पड़ता है असर
वहीं, पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाते समय सबसे बड़ी चुनौती रेंज की आती है. जब आप किसी समतल सड़क पर चलते हैं तो बैटरी पर सामान्य दबाव पड़ता है. लेकिन सीधी चढ़ाई पर मोटर को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ दोगुनी ताकत लगानी पड़ती है. इसी वजह से मैदानों में 100 किलोमीटर चलने वाला स्कूटर पहाड़ों पर केवल 60 से 70 किलोमीटर की रेंज ही निकाल पाता है.
इसके अलावा अगर आप डबल राइडिंग कर रहे हैं तो रेंज और तेजी से गिरती है. इसलिए पहाड़ों पर सफर करते समय आपको हमेशा मिलने वाली क्लेम की गई रेंज में से कम से कम 30 से 40 प्रतिशत की कटौती मानकर ही अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए.

जरूर देखें ये 3 फीचर्स
जब भी आप पहाड़ी रास्ते के लिए स्कूटर ले रहे हैं तो कभी भी बेसिक या कम पॉवर वाला एंट्री-लेवल स्कूटर न खरीदें. सबसे पहली बात, स्कूटर में हब मोटर की बजाय मिड-ड्राइव या पीएमएसएम मोटर होनी चाहिए. जो कम आरपीएम पर ज्यादा टॉर्क पैदा करती है.
जबकि दूसरी सबसे जरूरी सुविधा हिल होल्ड असिस्ट है. यह फीचर चढ़ाई के दौरान जाम में रुकने पर गाड़ी को पीछे की तरफ लुढ़कने से रोकता है. जिससे हादसे का खतरा खत्म हो जाता है. तीसरी बात, स्कूटर में कम से कम 3 kWh से बड़ी बैटरी और मजबूत कॉम्बी-ब्रेकिंग या डिस्क ब्रेक सेटअप होना अनिवार्य है.
क्या पहाड़ों के लिए EV स्कूटर खरीदना चाहिए?
अब सबसे अंत में सवाल यह आता है कि, क्या पहाड़ों के लिए EV स्कूटर खरीदना चाहिए या नहीं. तो बता दें कि, अगर आपकी दैनिक आवाजाही 30 से 50 किलोमीटर के भीतर है और आपके पास घर पर चार्जिंग का पक्का इंतजाम है तो पहाड़ों पर इलेक्ट्रिक स्कूटर आपके लिए बेहद किफायती साबित होगा. पेट्रोल का खर्च पूरी तरह खत्म हो जाएगा और आपको चढ़ाई पर पिकअप की कोई कमी महसूस नहीं होगी.

बस आपको यह ध्यान रखना होगा कि रोजाना घर से निकलने से पहले बैटरी पूरी तरह चार्ज हो और बहुत ज्यादा भारी सामान लोड करके खड़ी चढ़ाई पर जाने से बचें. सही पावर और एथर, ओला या बजाज चेतक जैसे हाई-टॉर्क मॉडल्स का चुनाव करके आप पहाड़ों पर भी बेहद आरामदायक और पैसा वसूल राइड का आनंद ले सकते हैं.
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