ट्रंप के टैरिफ से खलबली,अब अमेरिका में नई कारें होंगी 2,000 डॉलर महंगी, EV बाजार को भी झटका
Trump New Tariff Impact In US: डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से अमेरिकी कारों की कीमत में $2,000 तक बढ़ोतरी हो सकती है. एलिक्सपार्टनर्स की रिपोर्ट में EV बाजार में भी भारी गिरावट की आशंका जताई गई है.

Trump Tariff Impact: अमेरिका में 2025 के अंत तक कार खरीदना आम लोगों के लिए और महंगा हो सकता है. दरअसल,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति से अमेरिका में हर नई कार पर करीब $2,000 (करीब ₹1.7 लाख) तक का एक्स्ट्रा खर्च हो सकता है.
एलिक्सपार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो कंपनियां इस लागत का लगभग 80% हिस्सा सीधे ग्राहकों से वसूलेंगी. यानी, एक आम अमेरिकी को $1,760 एक्स्ट्रा खर्च करने होंगे.
क्या है इस टैरिफ की असली वजह?
दरअसल, यह टैरिफ योजना ट्रंप की “अमेरिका को फिर से महान बनाओ” नीति का हिस्सा है. इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी कारों और ऑटो पार्ट्स पर अमेरिकी निर्भरता को कम करना है, ताकि डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सके, लेकिन इस फैसले का सीधा प्रभाव अमेरिकी ग्राहकों और ऑटो उद्योग पर पड़ने वाला है, जिन्हें इन टैरिफ्स की वजह से अधिक कीमत चुकानी होगी.
ऑटो बिक्री पर भी भारी असर
रिपोर्ट के मुताबिक, इन टैरिफ्स के कारण अगले तीन वर्षों में अमेरिका में 1 मिलियन कम कारें बिक सकती हैं. हालांकि, अनुमान है कि 2030 तक वार्षिक ऑटो बिक्री 17 मिलियन यूनिट तक पहुंच जाएगी, लेकिन तब तक हुए नुकसान की भरपाई संभव नहीं होगी.
जनरल मोटर्स और फोर्ड को होगा अरबों डॉलर का नुकसान
जनरल मोटर्स को टैरिफ्स के चलते करीब $5 बिलियन और फोर्ड को $2.5 बिलियन के नुकसान का अनुमान है. दोनों कंपनियों ने इस प्रभाव को कम करने के लिए ग्राहकों पर कीमतों का बोझ डालने और उन्हें समायोजित करने की योजना बनाई है, लेकिन इस राहत का असर सीमित रहेगा.
इलेक्ट्रिक वाहनों को भी लगेगा झटका
अगर ट्रंप प्रशासन EV टैक्स क्रेडिट जैसे $7,500 के प्रोत्साहनों को खत्म करता है, तो इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में गिरावट आ सकती है. इससे ग्राहक फिर से पेट्रोल और डीजल वाहनों की तरफ लौट सकते हैं. पहले उम्मीद थी कि 2030 तक EV कुल बिक्री का 31% हिस्सा होगा, लेकिन अब यह घटकर केवल 17% रह जाने की आशंका है.
ICE (इंटरनल कंबशन इंजन) की वापसी
जहां EV की हिस्सेदारी घटेगी, वहीं internal combustion engine vehicles की बाजार हिस्सेदारी 33% से बढ़कर 50% तक पहुंचने की उम्मीद है. प्लग-इन हाइब्रिड और एक्सटेंडेड रेंज EV की हिस्सेदारी 10% से घटकर सिर्फ 6% रहने की संभावना है.
Global Competition में अमेरिका हो सकता है पीछे
दुनियाभर के देश, खासतौर पर चीन, EV तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अमेरिका इन नीतियों के चलते पिछड़ सकता है. एलिक्सपार्टनर्स के अनुसार, अमेरिका की कंपनियों को EV प्लेटफॉर्म और तकनीक के लिए चीन से लाइसेंसिंग या जॉइंट वेंचर का सहारा लेना पड़ सकता है. इस तरह, टैरिफ बढ़ाकर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश भले ही की जा रही हो, लेकिन इसका असर ग्राहकों की जेब पर भारी पड़ सकता है और अमेरिका की ग्लोबल ऑटो कंपटीशनकी स्थिति भी कमजोर हो सकती है.
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Source: IOCL






















