क्या 30000 सैलरी वाले भी खरीद सकते हैं कार? जानें हिसाब किताब
30 हजार रुपये की सैलरी में भी कार खरीदी जा सकती है. सही डाउन पेमेंट, EMI और बजट की प्लानिंग से कार का सपना पूरा हो सकता है.

अक्सर हर नौकरी कर रहे लोगों के लिए घर बनाने के बाद एक और सपना होता है, वे है गाड़ी खरीदना, जिसके लिए वे लंबे समय से एक सही समय का इंतजार करते रहते हैं. और जब बात 30 हजार महीना कमा रहे व्यक्ति की आती है तो सबसे पहले दिमाग में एक ही सवाल आता है कि क्या इतनी सैलरी में कार खरीदना मुमकिन हो पाएगा. सच बताएं तो इसका जवाब है, हां, बिल्कुल मुमकिन है, बस जरूरी है कि आप सही प्लानिंग और सही हिसाब-किताब के साथ कोई निर्णय लें. आजकल बैंक और फाइनेंस कंपनियां आसान किश्तों यानी EMI पर कार लोन देती हैं, जिससे शुरुआत में पूरी कीमत चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती. बस जरूरत होती है अपनी कमाई और खर्चों का सही अंदाजा लगाने की, ताकि कार का सपना बोझ न बनकर खुशी बन जाए। आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
कितनी EMI देना सही रहेगा
फाइनेंस के जानकार एक आम नियम बताते हैं, जिसे "20-4-10" का नियम कहा जाता है. इस हिसाब से गाड़ी खरीदते समय कम से कम 20 प्रतिशत पैसा डाउन पेमेंट के तौर पर अपनी जेब से देना चाहिए, लोन को ज्यादा से ज्यादा 4 साल यानी 48 महीने में चुकाना चाहिए, और हर महीने की EMI आपकी कुल सैलरी के 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर किसी की सैलरी 30 हजार रुपये है, तो इस हिसाब से महीने की EMI करीब 5 से 7 हजार रुपये के आसपास रखना समझदारी होगी. इतनी EMI में आजकल बाजार में कई अच्छी छोटी और बजट वाली कारें आसानी से मिल जाती हैं, जिनकी शुरुआती कीमत 4 से 6 लाख रुपये के बीच होती है. अगर सही डाउन पेमेंट करके लोन लिया जाए, तो 30 हजार सैलरी वाला व्यक्ति भी बिना ज्यादा दिक्कत के हर महीने की किश्त आराम से चुका सकता है.
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किन बातों का रखें खास ध्यान
कार खरीदने से पहले सिर्फ EMI का हिसाब लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि कुछ और जरूरी बातों का भी ध्यान रखना चाहिए. सबसे पहले यह देखना चाहिए कि EMI के अलावा घर का किराया, बिजली-पानी का बिल, खाने-पीने का खर्च और बाकी जरूरी खर्चे भी आराम से निकल पाएं. इसके अलावा कार खरीदने के बाद पेट्रोल या डीजल का खर्च, गाड़ी की सर्विसिंग, इंश्योरेंस और रखरखाव जैसे खर्चे भी हर महीने जुड़ते हैं, इसलिए इनका बजट पहले से बनाकर रखना जरूरी है. यह भी सलाह दी जाती है कि लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों के ब्याज दरों की तुलना जरूर करें, ताकि सबसे सस्ती और सही डील मिल सके. साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि जितना ज्यादा डाउन पेमेंट दिया जाए, उतना ही अच्छा रहेगा, क्योंकि इससे लोन की रकम और EMI दोनों कम हो जाते हैं.
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