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दिल्ली, उज्जैन, मुंबई और कोलकाता...एक ही दिन का पंचांग अलग क्यों दिखाई देता है?

Panchnag: दिल्ली, उज्जैन, मुंबई और कोलकाता में एक ही दिन तिथि, राहुकाल और मुहूर्त अलग क्यों दिखते हैं? जानें स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना का नियम.

Panchnag: आपने अक्सर देखा होगा कि दिल्ली के पंचांग में सूर्योदय का समय कुछ और लिखा होता है, जबकि उसी तारीख को उज्जैन, मुंबई या कोलकाता के पंचांग में अलग समय दिखाई देता है.

कहीं राहुकाल पहले शुरू हो रहा होता है, कहीं अभिजीत मुहूर्त बदल जाता है और कभी-कभी व्रत या त्योहार की तारीख में भी अंतर नजर आता है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब चारों शहर भारत में हैं और घड़ी भी भारतीय मानक समय यानी IST के अनुसार चलती है, तो पंचांग एक जैसा क्यों नहीं होता?

इसका सीधा उत्तर है, पंचांग केवल तारीख देखकर नहीं, बल्कि स्थान, सूर्योदय और सूर्य-चंद्रमा की स्थिति के आधार पर बनाया जाता है.

घड़ी एक, लेकिन सूर्योदय अलग

दिल्ली, उज्जैन, मुंबई और कोलकाता एक ही भौगोलिक स्थान पर नहीं हैं. इनके अक्षांश और देशांतर अलग-अलग हैं. भारत में सभी शहरों की घड़ियां IST के अनुसार चलती हैं, लेकिन सूर्य हर शहर में एक ही समय पर दिखाई नहीं देता.

कोलकाता भारत के पूर्वी हिस्से में है, इसलिए वहां सामान्यतः सूर्योदय मुंबई से पहले होता है. दिल्ली, उज्जैन और मुंबई में सूर्योदय का क्रम और समय मौसम के अनुसार बदल सकता है. अक्षांश के कारण दिन-रात की लंबाई में भी अंतर आता है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का Positional Astronomy Centre भी अलग-अलग स्थानों के लिए सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त की टेबल तैयार करता है. इससे स्पष्ट है कि ये समय राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नहीं माने जा सकते. IMD की Indian Astronomical Ephemeris में भी इनके लिए अलग तालिकाएं दी जाती हैं.

पंचांग का दिन रात 12 बजे से शुरू नहीं होता

अंग्रेजी कैलेंडर में तारीख रात 12 बजे बदल जाती है, लेकिन पारंपरिक हिंदू पंचांग में दिन का निर्धारण स्थानीय सूर्योदय के आधार पर किया जाता है. सामान्य नियम के अनुसार एक पंचांग दिवस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है.

यही कारण है कि सूर्योदय के समय चल रही तिथि का विशेष महत्त्व होता है. स्थान आधारित पंचांग के अनुसार एक शहर के लिए तैयार किया गया पंचांग दूसरे शहर पर ज्यों का त्यों लागू नहीं किया जाना चाहिए. हिंदू पंचांग भी स्थानीय सूर्योदय के कारण शहर चुनना आवश्यक बताता है.

क्या तिथि भी हर शहर में अलग होती है?

तिथि घड़ी से नहीं, सूर्य और चंद्रमा के बीच बनने वाली कोणीय दूरी से निर्धारित होती है. उनके बीच प्रत्येक 12 अंश की दूरी पूरी होने पर एक तिथि बदलती है. इसलिए तिथि की वास्तविक समाप्ति का खगोलीय क्षण सामान्यतः पूरे भारत में लगभग एक ही IST पर बताया जाना चाहिए.

अंतर तब दिखाई देता है, जब उस तिथि का संबंध स्थानीय सूर्योदय से जोड़ा जाता है.

मान लीजिए कोई तिथि सुबह 6 बजे समाप्त हो रही है. यदि कोलकाता में सूर्योदय 5:20 बजे हो चुका है, तो वहां सूर्योदय के समय वही तिथि मौजूद होगी. लेकिन किसी पश्चिमी शहर में सूर्योदय 6:15 बजे है, तो वहां सूर्योदय तक अगली तिथि लग चुकी होगी. इसी आधार पर दिन की तिथि, व्रत या त्योहार का निर्णय अलग हो सकता है.

यही बात कुछ स्थितियों में नक्षत्र, योग और करण के सूर्योदयकालीन उल्लेख पर भी लागू होती है.

राहुकाल और चौघड़िया क्यों बदलते हैं?

राहुकाल कोई स्थायी घड़ी वाला समय नहीं है. इसकी गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक की अवधि को आठ हिस्सों में बांटकर की जाती है. दिन के अनुसार इनमें से एक हिस्सा राहुकाल माना जाता है. जब सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन की अवधि बदलेंगे तो राहुकाल का आरंभ और अंत भी बदल जाएगा. पंचांग की गणना पद्धति भी इसे स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित बताती है.

इसी कारण चौघड़िया, गुलिक काल, यमगण्ड, अभिजीत मुहूर्त, प्रदोष काल और लग्न के समय भी शहर के अनुसार बदलते हैं. चंद्रोदय पर आधारित करवा चौथ जैसे व्रतों में अंतर और अधिक साफ दिखाई देता है.

त्योहार की तारीख अलग कैसे हो जाती है?

सबसे ज्यादा पूछे जाने वाला प्रश्न यही है. प्रत्येक पर्व का नियम एक जैसा नहीं होता. किसी त्योहार में सूर्योदयकालीन तिथि देखी जाती है, किसी में प्रदोष व्यापिनी तिथि, किसी में मध्याह्न, निशीथ या चंद्रोदय के समय तिथि का होना जरूरी होता है.

इसलिए एक तिथि दो तारीखों को छू रही हो तो अलग शहरों में पर्व का निर्णय बदल सकता है. हालांकि दिल्ली, उज्जैन, मुंबई और कोलकाता के बीच त्योहार की तारीख बदलना रोज की बात नहीं है. ऐसा विशेष रूप से तभी होता है, जब तिथि या नक्षत्र का परिवर्तन संबंधित निर्णायक समय के बहुत करीब हो.

अलग वेबसाइटें भी अलग परिणाम क्यों देती हैं?

स्थान के अतिरिक्त गणना-पद्धति, अयनांश, सूर्योदय की परिभाषा, धार्मिक परंपरा और पर्व-निर्णय के नियमों से भी मामूली अंतर आ सकता है. कुछ पंचांग आधुनिक गणना अपनाते हैं, जबकि कुछ पारंपरिक पद्धति या क्षेत्रीय मान्यता को प्राथमिकता देते हैं.

इसलिए पंचांग देखते समय केवल तारीख नहीं, बल्कि शहर भी सही चुनें. व्रत या पूजा के लिए स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें और यदि दो स्रोतों में अंतर हो तो यह देखें कि दोनों ने स्थान और पर्व निर्णय का कौन-सा नियम अपनाया है. पंचांग में दिखने वाला अंतर हमेशा गलती नहीं होता, कई बार यही उसकी स्थान आधारित सटीकता होती है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या भारत के हर शहर का पंचांग अलग होता है?

पंचांग के मूल खगोलीय तत्व समान रहते हैं, लेकिन स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहुकाल और शुभ मुहूर्त शहर के अक्षांश-देशांतर के अनुसार बदल सकते हैं. इसलिए स्थान आधारित पंचांग देखना चाहिए.

2. एक ही तारीख को तिथि अलग क्यों दिखाई देती है?

तिथि सूर्य और चंद्रमा की कोणीय दूरी से तय होती है. इसकी वास्तविक समाप्ति का समय लगभग समान रहता है, लेकिन अलग शहरों में सूर्योदय अलग समय पर होता है. इस कारण सूर्योदय के समय मौजूद तिथि अलग हो सकती है.

3. दिल्ली और मुंबई का राहुकाल अलग क्यों होता है?

राहुकाल की गणना स्थानीय सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ भागों में बांटकर की जाती है. दोनों शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन की अवधि अलग होने से राहुकाल भी अलग होता है.

4. व्रत और त्योहार के लिए किस शहर का पंचांग देखना चाहिए?

जिस शहर में व्रत, पूजा या धार्मिक अनुष्ठान किया जा रहा है, उसी स्थान का पंचांग देखना चाहिए. किसी दूसरे शहर का मुहूर्त ज्यों का त्यों इस्तेमाल करना उचित नहीं है.

5. क्या एक ही त्योहार अलग-अलग शहरों में अलग दिन मनाया जा सकता है?

हां, लेकिन ऐसा सामान्यतः तभी होता है जब तिथि का आरंभ या समापन सूर्योदय, प्रदोष, मध्याह्न, निशीथ अथवा चंद्रोदय जैसे निर्णायक समय के बहुत करीब हो.

6. क्या तिथि रात 12 बजे बदलती है?

नहीं. तिथि का अंग्रेजी तारीख या रात 12 बजे से सीधा संबंध नहीं होता. सूर्य और चंद्रमा के बीच प्रत्येक 12 अंश की दूरी पूरी होने पर तिथि बदलती है, इसलिए यह दिन या रात में किसी भी समय समाप्त हो सकती है.

7. दो वेबसाइटों के पंचांग में अंतर क्यों होता है?

इसकी वजह चयनित स्थान, अयनांश, गणना-पद्धति, सूर्योदय की परिभाषा और क्षेत्रीय पर्व-निर्णय के नियम हो सकते हैं. कई बार गलत शहर स्वतः चयनित होने से भी समय अलग दिखाई देता है.

8. क्या उज्जैन का पंचांग पूरे भारत के लिए मान्य है?

उज्जैन का ऐतिहासिक और ज्योतिषीय महत्त्व है, लेकिन वहां के स्थानीय सूर्योदय, राहुकाल और मुहूर्त पूरे भारत पर लागू नहीं होते. पूजा के लिए अपने वर्तमान शहर का पंचांग ही देखना चाहिए.

यह भी पढ़ें- 18 अगस्त को बुध अस्त हुआ और दुनिया में AI पर मच गई हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.

वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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