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सिरहाने भूलकर भी ना रखें दवाईयां, वास्तु में बताया खतरनाक!

Vastu Tips: वास्तु में दवाई रखने को लेकर भी नियम बताए गए हैं. ऐसे में जो लोग बिस्तर या तकीए के नीचे दवाईयां रखते हैं वो सावधनान हो जाएं, इससे क्या नुकसान हो सकते हैं जान लें.

Vastu Tips For Medicine: आजकल बहुत से लोग नियमित रूप से लेने वाली दवाइयों को सुविधा के लिए बेड के पास, तकिए के नीचे या बिस्तर के बॉक्स में रख देते हैं. रात में अचानक जरूरत पड़ने पर दवा आसानी से मिल जाए, यही इसकी सबसे बड़ी वजह होती है

लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार सोने की जगह को शरीर और मन के विश्राम से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. ऐसे में दवाइयों को लगातार सिर के पास या बिस्तर के नीचे रखना उचित नहीं माना जाता.

कैसा होना चाहिए शयन कक्ष

वास्तु दृष्टि से शयन कक्ष ऐसा स्थान होना चाहिए जहां वातावरण साफ, व्यवस्थित और शांत हो. दवाइयां मूल रूप से रोग और उपचार से जुड़ी वस्तु हैं. आधुनिक वास्तु-व्याख्याओं में इन्हें बीमारी की स्मृति या स्वास्थ्य संबंधी चिंता से जुड़ी वस्तु माना जाता है. इसलिए ऐसी चीजों को सोने की जगह के बिल्कुल पास रखने से बचने की सलाह दी जाती है.

तकिए के नीचे दवाइयां रखना क्यों माना जाता है गलत?

  • तकिया सिर और मस्तिष्क के सबसे करीब होता है. वास्तु की मान्यताओं में शयन के समय व्यक्ति के आसपास का वातावरण उसकी मानसिक शांति से जुड़ा माना जाता है.
  • इसी वजह से दवाइयां, मेडिकल रिपोर्ट, बीमारी से जुड़ी फाइलें या अन्य स्वास्थ्य संबंधी सामान तकिए के नीचे रखने से बचने की सलाह दी जाती है.
  • वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार दवा को अपने सिर के आसपास रखने से व्यक्ति का ध्यान अनजाने में बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी चिंता की ओर बना रह सकता है.
  • इससे बेचैनी या नींद में बाधा जैसी समस्याएं बढ़ जाती है, नकारात्मक सोच में वृद्धि होती है, मानसिक तनाव बना रहता है.

बेड के नीचे दवाइयां रखना भी क्यों टालें?

वास्तु में बेड के नीचे की जगह को खाली और साफ रखने की सलाह दी जाती है. आधुनिक वास्तु लेखों में विशेष रूप से दवाइयों, पुराने सामान और अव्यवस्था को बिस्तर के नीचे रखने से बचने की बात कही गई है. माना जाता है कि सोने के स्थान के नीचे जमा वस्तुएं कमरे के ऊर्जा संतुलन और मानसिक शांति पर प्रभाव डालती है.

इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण भी है. बेड के नीचे रखी दवाइयां धूल, नमी या गर्मी के संपर्क में आ सकती हैं. खासकर यदि दवा की पैकिंग लंबे समय तक खुली या असुरक्षित रहे तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है इसलिए मेडिकल दृष्टि से भी दवाइयों को सही तापमान और पैकिंग में रखना जरूरी है.

फिर दवाइयां कहां रखें?

वास्तु एक्सपर्ट संजीत कुमार मिश्रा के अनुसार दवाइयों को बेड से दूर किसी साफ, व्यवस्थित और बंद कैबिनेट या ड्रॉअर में रखने की सलाह देते हैं.

FAQs

1. तकिए के नीचे रखी दवा से वास्तु में किस चीज का संकेत माना जाता है?
इसे स्वास्थ्य संबंधी चिंता और मानसिक अशांति से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए दवा सिर के नीचे रखने से बचने की सलाह दी जाती है.

2. बेड के नीचे दवाइयां रखने से क्या बिगड़ सकता है?
वास्तु मान्यता में बेड के नीचे अव्यवस्था को नकारात्मक माना जाता है. दवाइयां यहां रखना भी इसी वजह से टालने को कहा जाता है.

3. क्या दवा रखने की जगह भी घर की ऊर्जा पर असर डालती है?
वास्तु के अनुसार शयन कक्ष का वातावरण शांत और व्यवस्थित होना चाहिए, इसलिए दवाइयों के लिए अलग और साफ जगह रखना बेहतर माना जाता है.

4. रात में तुरंत जरूरत हो तो दवा कहां रखें?
दवा को तकिए के नीचे रखने के बजाय बेड के पास एक साफ, बंद और व्यवस्थित ड्रॉअर में रखना ज्यादा उचित विकल्प है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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