Kemdrum Yoga: कुंडली में इस दोष को माना जाता है बेहद खतरनाक, निवारण भी सबसे कठिन
Kemdrum Yoga Remedies: केमद्रुम योग को बहुत अशुभ और खतरनाक माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र में केमद्रुम योग को दुर्भाग्य का प्रतीक कहा गया है. इसका निवारण भी बहुत कठिन होता है.

Kemdrum Yoga Effects: ज्योतिष शास्त्र में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में परिवर्तन से कई शुभ-अशुभ योग बनते हैं. ऐसे ही अशुभ योग में एक है केमद्रुम योग. इसे ज्योतिष शास्त्र में बहुत खतरनाक और अशुभ माना जाता है. कुंडली में यह योग बनने पर शुभ योगों के फल भी निष्क्रिय हो जाते हैं. यह दोष जितना खतरनाक है, इसका निवारण भी उतना ही कठिन है. आइए जानते हैं केमद्रुम योग का व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
केमद्रुम योग का प्रभाव
जन्म कुंडली में ग्रह दोष के प्रभाव के कारण व्यक्ति जीवन में प्रगति नहीं कर पाता है. केमद्रुम योग एक बेहद अशुभ योग है जिसे कालसर्प योग से भी खतरनाक माना जाता है. केमद्रुम योग में चंद्रमा बहुत ही कमजोर हो जाता है जिससे व्यक्ति सही समय में भी गलत निर्णय लेता है. इस गलती का भुगतान व्यक्ति को जीवन भर करना पड़ता है. राहु-केतु को छोड़कर जब चंद्रमा के आगे और पीछे के भाव में कोई ग्रह ना हो, तो केमद्रुम योग बनता है.
केमद्रुम योग के कारण व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार पड़ जाता है. इस योग से पीड़ित व्यक्ति को हमेशा अज्ञात भय सताता है. ज्योतिष शास्त्र में केमद्रुम योग को दुर्भाग्य का प्रतीक कहा गया है. जिसकी कुंडली में केमद्रुम योग होता है वह इधर-उधर भटकने वाला, दुख से अति पीड़ित, बुद्धि और खुशी से हीन, मलिन वस्त्र धारण करने वाला, नीच और कम उम्र वाला माना गया है.
केमद्रुम योग से बचने के उपाय
केमद्रुम योग का निवारण मुश्किल से हो पाता है, केमद्रुम योग की वजह से बुद्धि उसका निवारण करने नहीं देती और व्यक्ति कष्ट पर कष्ट पाता जाता है. इस अशुभ ग्रह योग से पीड़ित व्यक्ति हर सही बात को भी उल्टा समझ लेते हैं इसीलिए इस अशुभ योग का उपाय आसानी से नहीं हो पाता है. हालांकि कुछ उपाय के जरिए इसकी दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है. इसके लिए योग से पीड़ित व्यक्ति को शिव मंदिर में शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए.
इसके अलावा चंद्रमा से संबंधित वस्तुएं जैसे दूध, दही, आइसक्रीम, चावल, पानी आदि का का दान करना भी अच्छा माना जाता है. इस योग से पीड़ित व्यक्ति को अपनी मां का या उसके उम्र के समकक्ष महिला का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए. जन्म कुंडली के अनुसार मोती धारण करें,साथ ही पूर्णमासी के दिन चांदी का चंद्रमा बनवा कर अपने पास रखें. इससे मानसिक शांति भंग नहीं होती है.
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