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Wheat Farming Tips : गेहूं बोने से पहले खेत में करें इस चीज का छिड़काव, कभी खराब नहीं होगी फसल

Wheat Farming Tips : धान की कटाई के बाद जब उसी खेत में गेहूं बोया जाता है, तो खेत की सही तैयारी और बीज का सही ट्रीटमेंट करना बेहद जरूरी हो जाता है.

Wheat Farming Tips : गेहूं की खेती में ज्यादातर किसान अच्छे बीज, समय पर बुवाई और सिंचाई पर ध्यान देते हैं, लेकिन कई बार एक छोटी सी गलती या भूल पूरी फसल की पैदावार पर असर डाल देती है. खासकर धान की कटाई के बाद जब उसी खेत में गेहूं बोया जाता है, तो खेत की सही तैयारी और बीज का सही ट्रीटमेंट करना बेहद जरूरी हो जाता है. कई बार छोटी-सी लापरवाही के कारण बीज ठीक से अंकुरित नहीं हो पाता, पौधे कमजोर निकलते हैं और पूरी फसल की उपज प्रभावित हो जाती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान बुआई से पहले खेत और बीज दोनों की सही तैयारी कर लें तो शुरुआती नुकसान से बचा जा सकता है. तो आइए जानते हैं कि गेहूं बोने से पहले खेत में किस चीज का छिड़काव करें, जिससे फसल कभी खराब नहीं होगी. 

गेहूं बोने से पहले खेत में किस चीज का छिड़काव करें?

अगर किसान धान की कटाई के बाद गेहूं बोने जा रहे हैं तो सबसे पहले खेत को अच्छी तरह भुरभुरा बना लें. इसके बाद प्रति एकड़ 25 किलो यूरिया का छिड़काव करें. कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि गेहूं की बुआई से पहले अगर किसान धान की कटाई वाले खेत में यूरिया का छिड़काव करके खेत को अच्छी तरह भुरभुरा बना लें तो धान के बचे हुए डंठल जल्दी सड़ने लगते हैं, जिससे मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनती है और इससे गेहूं की फसल के लिए खेत अच्छी तरह तैयार हो जाता है. 

सही खेत का चुनाव भी है जरूरी

गेहूं की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे सही मानी जाती है. हालांकि इसकी खेती बलुई, भारी बलुई और मटियार मिट्टी में भी की जा सकती है. अच्छी पैदावार के लिए खेत का चयन और उसकी सही तैयारी दोनों जरूरी हैं. 

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बिना बीज ट्रीटमेंट के क्यों बढ़ जाता है नुकसान?

अगर गेहूं का बीज बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे खेत में बो दिया जाए तो कई तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं. ऐसे में बीज सड़ सकता है, अंकुरण कम हो सकता है, पौधे कमजोर निकल सकते हैं और शुरुआती रोग पूरे खेत में फैल सकते हैं. कई बार किसानों को दोबारा बुआई तक करनी पड़ जाती है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं. वहीं अगर बीज का सही तरीके से ट्रीटमेंट किया जाए तो जड़ें मजबूत बनती हैं, पौधे एक समान निकलते हैं और शुरुआती फफूंद साथ ही मिट्टी में मौजूद कीटों का असर कम हो जाता है. इससे फसल की शुरुआत बेहतर होती है. 

बीज ट्रीटमेंट क्या होता है?

बीज ट्रीटमेंट का मतलब बुआई से पहले बीज पर ऐसी दवाओं या जैविक पदार्थों की हल्की परत चढ़ाई जाए, जो उसे शुरुआती रोगों और कीटों से बचाने में मदद करें. आमतौर पर बीज ट्रीटमेंट में चार तरह के उत्पाद इस्तेमाल किए जाते हैं.फफूंदनाशी (Fungicide), जो बीज और नई जड़ों को फफूंद से बचाता है. कीटनाशी (Insecticide), जो मिट्टी में मौजूद शुरुआती कीटों से सुरक्षा देता है. जैविक उत्पाद जैसे ट्राइकोडर्मा, जो फायदेमंद सूक्ष्मजीवों के जरिए रोगजनक फफूंद को दबाते हैं और सूक्ष्म पोषक तत्व या ग्रोथ बूस्टर, जो अंकुरण और शुरुआती बढ़वार को बेहतर बनाते हैं. हालांकि हर किसान को सभी प्रकार के ट्रीटमेंट करने की जरूरत नहीं होती है, लेकिन गेहूं में शुरुआती फफूंद से बचाव को सबसे जरूरी माना जाता है. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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