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Crop Seeds: हर जलवायु सहन करेगी गेहूं- राई की ये प्रजाति, बंपर पैदावार से मालामाल होंगे किसान

कानपुर की यूनिवर्सिटी ने गेहूं व राई की नई प्रजातियां विकसित की हैं, इस प्रजाति से किसान खूब पैदावार ले सकेंगे, साथ ही इनके उत्पादन में पानी की जरूरत अधिक नहीं पडेगी

Wheat Crop: गेहूं, धान,बाजरा, कपास या फिर अन्य कोई भी फसल सभी को बेहतर बनाने के लिए साइंटिस्ट लगातार रिसर्च कर रहे हैं. एग्रीकल्चर साइंटिस्ट की कोशिश है कि बदल रहे मौसम में सीमित बीजों से अधिक पैदावार किसानों को मिल सके. अब गेहूं व राई को लेकर कानपुर के कृषि यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसी ही रिसर्च की है. यह प्रजाति जलवायु के अनुकूल होगी और बंपर पैदावार भी हो सकेगी.

गेहूं की के-1616, राई की सुरेखा विकसित
कानपुर में चंद्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गेहूं की के-1616 व राई की सुरेखा प्रजाति को डेवलप किया है. जबकि मक्का, दलहन, मोटे अनाज पर अभी रिसर्च जारी है. वैज्ञानिकों के अनुसार अरहर, चना समेत अन्य दलहनी फसलों की प्रजातियों पर रिसर्च चल रही है.इसी तरह राई, दलहन, गेहूं, मक्का व मोटे अनाज पर भी शोध किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि के-1616  उत्तर प्रदेश में कहीं भी बोई जा सकती है. इस प्रजाति को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसकी पैदावार भी 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होगी. यदि राई की बात करें तो इसकी सुरेखा प्रजाति डिवेलप की गई है. यह हाई टेंपरेचर को सहन कर सकेगी और इसका उत्पादन हुई 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहेगा.

अन्य प्रजातियां पहले की जा चुकी विकसित
यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ऐसी फसलों के उत्पादन की लगातार कोशिश कर रहे हैं, जिससे पानी की सिंचाई की कम आवश्यकता हो और किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सके. पहले भी गेहूं की हाई टेम्परेचर सहने वाली प्रजातियां के-7903 (हलना) व के-9423 (उन्नत हलना) को विकसित किया गया. इसके अलावा राई की कांति, मटर की इंद्र व जय, मसूर की केएलबी-303, केएलबी-345, केएलएस-122 प्रजातियां और चने की अवरोधी, केडब्ल्यूआर-108 व केपीजी-59 विकसित की जा चुकी हैं. एग्रीकल्चर साइंटिस्ट का कहना है कि जितनी प्रजातियां विकसित की गई हैं. उनसे किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं. अच्छी बात यह है कि पानी अधिक नहीं लगाना पड़ रहा है और फसल में कीड़ा भी कम लगता है.

बारिश से लाखों किसानों को फसल को नुकसान
इस बार मौसम ने किसानों को खूब परेशान किया है. पहले सूखा पड़ा, इससे रबी और खरीफ दोनों फसलों को नुकसान पहुंचा. बाद में आई बाढ़ ने भी खरीफ की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया. अभी कुछ दिन पहले हुई लगातार बारिश ने किसानों की खरीफ की फसलें चौपट कर दी. राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र उत्तराखंड, बिहार, झारखंड छत्तीसगढ़ समेत सभी राज्यों में किसान फसल के नुकसान के मुआवजे की मांग कर रहे हैं. उधर स्टेट गवर्नमेंट ने भी फसलों के नुकसान का सर्वे कराना शुरू कर दिया है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी फसल की प्रजाति को नई तरह से विकसित करने का मकसद यही होता है की आपदा में किसान को फसल का नुकसान कम हो. फसल अधिक आपदा झील सके और कम समय में अच्छी पैदावार मिल जाए.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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