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ये दीवाली किसानों वाली! अभी खेतों में कर दें इन सब्जियों की बुवाई, दो महीने बाद होगी बंपर कमाई

Vegetable Cultivation: इनमें से कुछ सब्जियां तो 45 दिन के अंदर ही पक कर तैयार हो जाती हैं. किसान चाहें तो खाली खेत को तैयार करके या फिर फसलों के बीच में इन सब्जियों की रोपाई कर सकती है.

Vegetable Farming In September: भारत में ज्यादातर किसान सीजनल सब्जियों की खेती (Seasonal Vegetable Farming) करते हैं. यह सब्जियां मिट्टी जलवायु और मौसम के हिसाब से उगाई जाती हैं. इस समय कई किसान खरीफ फसलों के बीच सब्जी फसल लगाने का मन बना रहे हैं. इन सब्जी फसलों में गाजर, मूली, चुकंदर, मटर, आलू, शलजम, अजवाइन, सलाद, पत्ता गोभी और टमाटर जैसी सब्जियों की नर्सरी (Vegetable Nursery) तैयार की जाती है. सितंबर माह में इन सब्जियों के बीजों (Vegetable Seeds) को लगाने पर भी प्रकार से अंकुरण हो जाता है और पौधों का विकास भी तेजी से होता है. इनमें से कुछ सब्जियां तो 45 दिन के अंदर ही पक कर तैयार हो जाती हैं, जिससे किसानों को दिवाली तक सब्जियों का उत्पादन (Vegetable Production) मिल जाता है. 

ब्रोकली की खेती
ब्रोकली की बनावट बिल्कुल फूलगोभी की तरह ही होती है, लेकिन इसका रंग हरा होता है, बड़े-बड़े शहरों में इस विदेशी सब्जी की डिमांड भी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है, हालांकि यह सब्जी थोड़ी महंगी होती है. इसे बाजार में 50 से 100 रुपये किलो तक के भाव पर बेचा जाता है. इसकी खेती के लिए सितंबर माह का मौसम उपयुक्त रहता है, इसलिए इसके उन्नत किस्म के बीजों का चयन करके नर्सरी तैयार कर सकते हैं बीजों की रोपाई के बाद 4 से 5 सप्ताह के अंदर ब्रोकली के पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं, जिसके बाद 60 से 90 दिनों के अंदर ब्रोकली का अच्छा उत्पादन ले सकते हैं.

हरी मिर्ची की खेती
हरी मिर्च एक सदाबहार फसल है, जिसकी खेती किसी भी मौसम में कर सकते हैं. इस समय भी किसान हरी मिर्च की बुवाई करके कम समय में बेहतर उत्पादन ले सकते हैं. ध्यान रखें कि सिंचित इलाकों में मिर्च की फसल लगाने पर ही अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. इसकी खेती के लिए रोग रोधी किस्म का चयन करना चाहिये, जिससे कम नुकसान में बेहतर उत्पादन लिये जा सके.

पपीता की खेती
सितंबर माह में पपीता की फसल पर कीटों का नियंत्रण बढ़ने लगता है. वैसे तो यह कम जोखिम वाली फसल है, लेकिन कीट-रोगों के लक्षण दिखने पर तुरंत नियंत्रण कार्य शुरू कर देने चाहिये. किसान चाहे तो पपीते के पके फलों के अलावा कच्चे पपीते की बिक्री भी कर सकते हैं. इस महीने किसानों पपीते की नई नर्सरी तैयार करने की सलाह दी जाती है.

बैगन की खेती
सितंबर माह की प्रमुख फसलों में बैंगन की सब्जी भी शामिल है. सर्दियां आते-आते बाजार में बैंगन की मांग भी बढ़ जाती है. यह कम मेहनत और कम खर्च में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है. यदि जैविक विधि से बैंगन की फसल लगाई जाये तो खेती की लागत भी काफी हद तक कम कर सकते हैं. इसके बेहतर उत्पदान के लिये खेत में जैविक खाद, कंपोस्ट खाद और नीम से बने कीटनाशकों का ही प्रयोग करना चाहिए.

गाजर की खेती
अक्टूबर तक बाजार में लाल-नारंगी गाजरों का सीजन भई शुरू हो जाता है. इस सब्जी की बुवाई अगस्त से लेकर नवंबर तक की जाती है. किसान चाहें तो कम अवधि वाली गाजर की फसल लगाकर 2 महीने के अंदर अच्छा उत्पादन ले सकते हैं. कई किसान फसलों की मेड़ पर भी गाजर की फसल लगाकर अच्छा पैसा कमा लेते हैं.

मूली की खेती 
वैसे तो मूली एक ठंडी जलवायु वाली फसल है, जिसकी खेती रबी सीजन में की जाती है. इसका इस्तेमाल कच्चे सलाद और अचार के तौर पर किया जाता है. किसान चाहें तो पॉलीहाउस में मूली उगाकर कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सबसे अच्छी बात तो यह है कि मूली की कुछ उन्नत किस्में 40 से 50 दिन में पक कर तैयार हो जाती है. इस तरह 2 महीने के अंदर किसानों को नकद मुनाफा मिल सकता है.

टमाटर की खेती
खेती की उन्नत तकनीकों की मदद से टमाटर की खेती (Tomato Cultivation) साल भर की जा सकती है, लेकिन खुले खेत में टमाटर की खेती साल में तीन बार की जाती है. इसकी एक बुवाई सितंबर (Vegetable Farming in September) से लेकर अक्टूबर के बीच में भी की जाती है, जो 60 दिन के अंदर पक कर तैयार हो जाती है. टमाटर की फसल से कम जोखिम में बेहतर उत्पादन लेने के लिए रोग रोधी किस्म (Advanced Varieties of Tomato) का ही चयन करना चाहिए. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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