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खेत में सोलर पंप के लिए सरकार से लें मदद, ये रही प्रोसेस

महंगे डीजल और भारी बिजली बिल से सिंचाई में हो रहा है नुकसान? तो अब यह काम होगा बिल्कुल फ्री और साथ में होगी एक्सट्रा कमाई भी. जानें पीएम कुसुम योजना में सिर्फ 10% खर्च पर कैसे लगेगा सोलर पंप सेटअप?

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  • आवेदन करने के लिए पीएम कुसुम पोर्टल पर ऑनलाइन फार्म भरना होगा.

खेती में हर सीजन सिंचाई के लिए किसानों को खूब खर्चा करना पड़ जाता है. कभी महंगे डीजल के दाम पसीने छुड़ाते हैं. तो कभी बिजली के लंबे कट और भारी-भरकम बिल परेशानी का सबब बन जाते हैं. लेकिन अब समय बदलाव का है. अगर आप भी हर महीने पानी लगाने के लिए पंपसेट में हजारों रुपये का डीजल फूंक रहे हैं. तो अब इस झंझट से हमेशा के लिए छुटकारा पाने का यही सही वक्त है. 

केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त पीएम कुसुम योजना किसानों के लिए इस मामले में वरदान साबित हो रही है. इस योजना के तहत सरकार खेतों में मार्डन सोलर पंप लगाने पर बंपर सब्सिडी दे रही है.  जिससे किसान न सिर्फ दिन के उजाले में फ्री में सिंचाई कर सकते हैं. बल्कि एक्सट्रा बिजली बेचकर कमाई भी कर सकते हैं. बहुत ही मामूली रकम देकर आप अपने खेत को पूरी तरह हाईटेक बना सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं सोलर पंप में मदद देने वाली इस योजना की पूरी जानकारी.

पीएम कुसुम योजना में लगवाएं सोलर पंप

जब आप अपने खेत में सोलर पंप लगवा लेते हैं. तो आपको सबसे पहला फायदा तो यह होता है कि पूरी साल की सिंचाई में जो खर्चा होता था वह बिल्कुल जीरो हो जाता है. क्योंकि दिनभर यह पंप सूरज की धूप से चार्ज होते रहते हैं और जरूरत पर आपके खेती की सिंचाई का काम पूरा कर देते हैं.  

यह पंप दिनभर बिना किसी रुकावट के तेज प्रेशर से पानी देते हैं. जिससे रात के अंधेरे में खेत में पानी लगाने जाने के डर से भी छुटकारा मिलती है. डीजल पंप से निकलने वाले धुएं और इंजन की मरम्मत का झंझट हमेशा के लिए खत्म हो जाता है. इसके अलावा जो किसान ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पंप लगाते हैं. 


खेत में सोलर पंप के लिए सरकार से लें मदद, ये रही प्रोसेस

वे सिंचाई के बाद बची हुई एक्सट्रा बिजली को सीधे पावर ग्रिड यानी डिस्कॉम को बेच सकते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि आपका खेत न सिर्फ बढ़िया फसल देगा. बल्कि आपके लिए बिजली पैदा करने वाला एक छोटा पावर प्लांट भी बन जाएगा. इससे किसानों की लागत घटती है और हर महीने बैंक खाते में एक एक्स्ट्रा कमाई भी आती रहती है.

कितनी मिलती है सब्सिडी?

इस योजना के तहत सोलर पंप लगाने का पूरा खर्च किसानों को अकेले नहीं उठाना पड़ता. केंद्र सरकार और राज्य सरकार मिलकर कुल लागत पर 60 फीसदी तक की सीधी सब्सिडी देती हैं. इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में लघु, सीमांत और विशेष वर्ग के किसानों के लिए 30 फीसदी तक का एक्सट्रा बैंक लोन की व्यवस्था होती है.

इसका सीधा मतलब यह है कि किसान को कुल खर्चे का सिर्फ 10 फीसदी हिस्सा ही अपनी जेब से शुरुआती में जमा करना होता है. जबकि बाकी 90 फीसदी तक का इंतजाम सब्सिडी और आसान लोन से हो जाता है. मसलन अगर 3 एचपी या 5 एचपी के सोलर पंप सिस्टम की कुल लागत करीब 2 लाख रुपये आती है. तो किसान को महज 20 हजार रुपये के आसपास ही देने पड़ते हैं बाकी रकम सरकार देती  है.


खेत में सोलर पंप के लिए सरकार से लें मदद, ये रही प्रोसेस

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कैसे करें इस योजना के लिए आवेदन?

सोलर पंप योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को किसी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. किसानों को योजनाके आधिकारिक पोर्टल https://pmkusum.mnre.gov.in/ पर जाना होगा. यहां जाकर अपना अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें. आवेदन के लिए किसान का आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, खेत की जमीन की ताजा खतौनी/जमाबंदी और पासपोर्ट साइज फोटो तैयार रखें. 

फॉर्म सबमिट करने के बाद तय किसान अंशदान का चालान ऑनलाइन या बैंक के जरिए जमा करना होता है. इसके बाद विभाग की टीम खेत का मौका मुआयना करती है और सब कुछ सही पाए जाने पर कुछ ही हफ्तों में अधिकृत कंपनी द्वारा खेत में सोलर पैनल और पंप पूरी तरह इंस्टॉल कर दिया जाता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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