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Mushroom Farming: मशरूम की खेती कैसे शुरू कर सकते हैं, इसके लिए कितना टेंपरेचर चाहिए? 

मशरूम का उत्पादन शुरू करने से पहले किसानों को इसकी वैज्ञानिक जानकारी हासिल करनी चाहिए. कृषि विज्ञान केंद्र और सरकारी संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर खेती शुरू करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.

Mushroom Farming: मशरूम की खेती आज किसानों के लिए कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाला बिजनेस बन गया है. बढ़ती मांग और अच्छी बाजार कीमतों के कारण इसकी खेती तेजी से हो रही है. खास बात यह है कि मशरूम की खेती के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटे कमरों या शेड में भी इसकी शुरुआत की जा सकती है. हालांकि अच्छी पैदावार के लिए तापमान, नमी और साफ सफाई का बहुत ध्यान रखना जरूरी होता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि मशरूम की खेती कैसे शुरू कर सकते हैं और उसके लिए कितना टेंपरेचर चाहिए. 

मशरूम की खेती करने के लिए पहले क्या करें?

मशरूम का उत्पादन शुरू करने से पहले किसानों को इसकी वैज्ञानिक जानकारी हासिल करनी चाहिए. कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय और सरकारी संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर खेती शुरू करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. शुरुआत में अच्छी क्वालिटी का स्पॉन यानी बीज किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से खरीदना चाहिए. 

कौन-कौन से मशरूम की कर सकते हैं खेती?

भारत में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मशरूम की व्यवसायिक खेती की जाती है. इसमें बटन मशरूम, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम शामिल है. मौसम के अनुसार उनकी खेती की जाती है. ऑयस्टर मशरूम की खेती आसान मानी जाती है और छोटे स्तर पर शुरुआत करने वाले किसानों के लिए अच्छा ऑप्शन भी माना जाता है. 

मशरूम की खेती के लिए कितना चाहिए तापमान? 

मशरूम उत्पादन में तापमान सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. अलग-अलग किस्म के लिए तापमान की जरूरत भी अलग-अलग जरूरत होती है. ऑयस्टर मशरूम के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान सही माना जाता है. बटन मशरूम के लिए 15 से 24 डिग्री सेल्सियस तापमान सही रहता है और कमरे में 80 प्रतिशत तक नमी बनाए रखना भी जरूरी होता है. एक्सपर्ट के अनुसार तापमान बहुत कम या बहुत ज्यादा होने पर मशरूम में गलन, फफूंद और उत्पादन में कमी जैसे समस्या आ सकती है. 

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खेती के लिए कौन सी चीजों की होती है जरूरत?

मशरूम उत्पादन के लिए भूसा, स्पॉन, पॉलीबैग और टेंपरेचर कंट्रोल की आवश्यकता होती है. आमतौर पर गेहूं या धान के लिए भूसे का उपयोग किया जाता है. खेती शुरू करने से पहले भूसे को गर्म पानी या रासायनिक विधि से उपचारित किया जाता है ताकि इसमें मौजूद हानिकारक जीवाणु और फफूंद नष्ट हो जाए. इसके बाद पॉली बाग में भूसा और स्पॉन की परतें भरकर उन्हें बंद कर दिया जाता है. कुछ दिनों बाद सफेद कवक जाल पूरे बैग में फैल जाता है और मशरूम निकलना शुरू हो जाते हैं. 

कितने दिनों में तैयार हो जाती है फसल?

मशरूम की किस्मों के अनुसार 15 से 25 दिनों के अंदर ही पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. इसके बाद 8 से 10 दिन के अंतराल पर दूसरे और तीसरी तुड़ाई भी की जा सकती है. 1 किलो सूखे भूसे से औसतन 600 से 650 ग्राम तक मशरूम उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है.

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कविता एबीपी नेटवर्क नोएडा के साथ बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही है. वर्तमान में कविता का मुख्य फोकस शिक्षा, करियर और नौकरी से जुड़ी खबरों पर रहता है.

करीब 3.5 साल से पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी कव‍िता एबीपी नेटवर्क से पहले राजस्थान पत्रिका में काम कर चुकी है. यहां  उन्होंने नेशनल एडिशन और अलग-अलग सप्लीमेंट्स के लिए काम किया. राजस्थान पत्रिका में करियर की उड़ान और सी न्यूज जैसे कॉलम वह कवर करती थी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो के साथ काम करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन की बारीकियों को समझने का अनुभव दिया. वहीं पत्रकारिता के अलावा कविता की खास रुचि खेल, विशेष रूप से क्रिकेट में है. राजस्थान पत्रिका में रहते हुए कविता ने मदर्स डे स्पेशल स्पोर्ट्स एडिशन में भी काम किया है.

पढ़ाई की बात करें तो कविता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.

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