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अब मीठी होगी किसानों की आमदनी, हरियाणा सरकार ने शहद को भावांतर भरपाई योजना में किया शामिल

हरियाणा सरकार ने किसानों को राहत देते हुए शहद को 'भावांतर भरपाई योजना' में शामिल कर दिया है. इससे मधुमक्खी पालकों को उनकी उपज का उचित दाम मिलेगा और आय में बढ़ोतरी होगी.

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार नई योजनाएं ला रही हैं. हरियाणा सरकार भी इस दिशा में कई कदम उठा रही है. खासकर कृषि से जुड़ी सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान खेती के साथ-साथ अन्य माध्यमों से भी आय अर्जित कर सकें. इन्हीं गतिविधियों में से एक है मधुमक्खी पालन (Beekeeping). अब हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालकों के लिए बड़ा ऐलान किया है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि शहद को भी ‘भावांतर भरपाई योजना’ (BBY) में शामिल किया जाएगा.

क्या है भावांतर भरपाई योजना?

भावांतर भरपाई योजना हरियाणा सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है. इसका उद्देश्य किसानों को उस नुकसान से बचाना है, जो उन्हें बाजार में फसल का उचित दाम न मिलने पर होता है. इस योजना के तहत सरकार किसी भी फसल के लिए एक संरक्षित मूल्य तय करती है. अगर बाजार में फसल की कीमत इस तय मूल्य से कम रहती है, तो सरकार उस अंतर की भरपाई किसानों को करती है. अब शहद को भी इस योजना में शामिल करने से मधुमक्खी पालकों को बड़ी राहत मिलेगी.

मधुमक्खी पालकों को सब्सिडी का लाभ

हरियाणा बागवानी विभाग पहले से ही मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चला रहा है. किसानों को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए सरकार 85% तक सब्सिडी दे रही है. किसान एक बार में 50 बॉक्स तक अनुदान का लाभ ले सकते हैं.

सिर्फ इतना ही नहीं, मधुमक्खी किट में इस्तेमाल होने वाले सामान जैसे बाल्टी, कंघी, नेट और पैकिंग बोतलें आदि पर भी किसानों को 75% अनुदान दिया जाता है. यह सुविधा किसानों को न केवल शहद उत्पादन में मदद करती है बल्कि उनके लिए अतिरिक्त आय का साधन भी बनती है.

बढ़ेगी पैदावार

मधुमक्खी पालन का फायदा सिर्फ शहद तक सीमित नहीं है. मधुमक्खियां परागण (Pollination) में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं. जब मधुमक्खियां फूलों से रस और पराग एकत्र करती हैं, तो वे फसलों में परागण करती हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ जाती है. यानी मधुमक्खी पालन किसानों के लिए दोहरा लाभ देने वाला व्यवसाय है—एक ओर शहद और दूसरी ओर बेहतर पैदावार.

बॉक्स का वितरण

हरियाणा में मधुमक्खी पालन को और मजबूत करने के लिए एकीकृत मधुमक्खी पालन विकास केंद्र, रामनगर (कुरुक्षेत्र) की ओर से राज्यभर में किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बॉक्स अनुदान पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इन बॉक्सों को स्थानीय भाषा में “मौन पेटिका” भी कहा जाता है.

कितने होंगे फ्रेम?

शहद उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले बॉक्स यानी Bee Box खास तरीके से बनाए जाते हैं. एक बॉक्स में 9 फ्रेम होते हैं. इन्हीं फ्रेमों पर हजारों मधुमक्खियां बैठती हैं और शहद तैयार करती हैं. मधुमक्खियां सामान्यत: अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक शहद देती हैं. इस दौरान बॉक्स को फूलों वाली फसलों जैसे सरसों, तिल, मक्का और अमरूद के पास रखा जाता है, ताकि उन्हें पर्याप्त रस और पराग मिल सके.

मधुमक्खी पालन के लिए स्थान का चुनाव

मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए सही स्थान का चुनाव बेहद जरूरी है. ऐसा इलाका चुनना चाहिए जहां 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में पर्याप्त मात्रा में फूलों वाले पेड़-पौधे मौजूद हों. इसके अलावा, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जगह पर तेज हवा और सीधी धूप न हो. अगर ऐसा है, तो छायादार इंतजाम करना जरूरी है.

यह भी पढ़ें :  किसानों के लिए खुशखबरी, इस राज्य में सब्जी विकास योजना से मिलेगी बीज पर सब्सिडी; होगा ये फायदा

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