Agri Business: मखाना महोत्सव के लिए किसानों को इनविटेशन, 75 फीसदी सब्सिडी देगी सरकार
Makhana Scheme: बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में 29-30 नवंबर को मखाना महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. यहां किसानों को मखाना से मुनाफा कमाने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा.

Bihar Makhana Mahotsav: बिहार के मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद देश-विदेश में काफी पहचान मिली है. वैसे तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में मखाना की खेती की जाती है, लेकिन बिहार को दुनिया के सबसे बड़े मखाना उत्पादक का खिताब प्राप्त है. यहां ले देश-विदेश में मखाना निर्यात होता है. यह ड्राई फ्रूट की कैटेगरी में आता है, जिसका चलते इसने किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. अब किसान भी मखाना की खेती लेकर इसकी प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर एग्री बिजनेस करना चाहते हैं. अच्छी खबर ये है कि मखीनी में बढ़ते रुझान के मद्देनजर अब राज्य सरकार ने मखाना महोत्सव आयोजित करने का फैसला किया है. राजधानी पटना के गांधी मैदान में 29-30 नवंबर को मखाना महोत्सव-सह-राष्ट्रीय सम्मेलन 2022 का आयोजन किया जाएगा.
क्यों मनाया जा रहा मखाना महोत्सव
मखाना की खेती की तकनीक, मुनाफा बढ़ाने के तरीके, मखाना का प्रसंस्करण और मार्केटिंग की जानकारी साझा करने के लिए मखाना महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यक्रम में मखाना मूल्य संवर्धन की पारंपरिक प्रथाओं और आधुनिक तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी.
इस कार्यक्रम में किसानों से लेकर किसान उत्पादक संगठन, प्रमुख देश और राज्य के प्रतिनिधि, मखाना के लीड एक्सपोर्टर और प्रमुख मंडियों के प्रतिनिधियों को इनवाइट किया गया है. बता दें कि इस बीच मखाना क्रेता-विक्रेता सम्मेलन और एफपीसी को एपीडा के साथ एक्सपोर्ट हेतु संबद्धता की भी योजना है.
बिहार में पहली बार मखाना महोत्सव- सह- राष्ट्रीय सम्मेलन 2022
— IPRD Bihar (@IPRD_Bihar) November 23, 2022
बिहार का मखाना, पोषक तत्वों का खजाना।@Agribih@KumarSarvjeet6 @saravanakr_n #BiharAgricultureDept pic.twitter.com/7298puIi6F
सरकार दे रही आर्थिक मदद
जानकारी के लिए बता दें कि बिहार में मखाना की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है. बिहार कृषि विभाग, बागवानी निदेशालय ने मखाना के उच्च प्रजाति के बीज 'साबौर मखाना-1' और 'स्वर्ण वैदेही प्रभेद' की खेती और बीज उत्पादन के लिए 97,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की लागत रखी है, जिस पर लाभार्थी किसानों को 75% अनुदान दिया जाता है.
इतना ही नहीं, मखाना की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए भी सरकार ने किसानों को 15 प्रतिशत और किसान उत्पादक सगंठनों को 25% आर्थिक मदद का प्रावधान किया है. ये बिहार सरकार की मखाना विकास योजना है, जिसके तहत कटिहार, दरभंदा, सुपौल, किशनगंज, पूर्णिया, सहरसा, अररिया, पश्चिम चंपारण, मधेपुरा, मधुबनी और सीतामढ़ी को कवर किया जा रहा है.
बिहार में 90 फीसदी मखाना की खेती
भारत में लगभग 15 हजार हेक्टेयर का रकबा मखाने की खेती से कवर होता है, जिससे कुल मखाना उत्पादन का 80 से 90 फीसदी मिल रहा है. इसमें अकेले 70% उत्पादन मिथिलांचल का है. इसमें लगभग 1 लाख 20 बजार टन मखाने के बीज की पैदावार मिलती है, जिससे 40,000 टन मखाने का लावा निकलता है. अकेले भारत में मखाना का कारोबा 550 करोड़ रुपये से अधिक का है.
Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Source: IOCL






















