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ammonia shortage: अमोनिया की कमी से महंगी हो सकती हैं ये सब्जियां, किसानों को भी होगा तगड़ा नुकसान

कोल्ड स्टोरेज में तापमान बनाए रखने के लिए अमोनिया गैस बेहद जरूरी है. इसके जरिए आलू और अन्य सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है. लेकिन हाल के दिनों में अमोनिया की कीमतों में तेज उछाल आया है.

Ammonia Shortage: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारत की रसोई तक पहुंच रहा है. कच्चे तेल और गैल के बाद अब इसका प्रभाव कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिख रहा है. खासकर कोल्ड स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली अमोनिया गैस के दाम बढ़ने से सब्जियों के भंडारण की लागत बढ़ गई है. इसका सीधा असर आलू समेत कई सब्जियों की कीमतों और किसानों की आमदनी पर पड़ने की आशंका है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं, अमोनिया की कमी से कौन सी कमी से महंगी हो सकती है और किसानों को कितना तगड़ा नुकसान हो सकता है?

कोल्ड स्टोरेज पर बढ़ा खर्च

कोल्ड स्टोरेज में तापमान बनाए रखने के लिए अमोनिया गैस बेहद जरूरी होती है. इसी के जरिए आलू और अन्य सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है. लेकिन हाल के दिनों में अमोनिया की कीमतों में तेज उछाल आया है. जानकारी के अनुसार अमोनिया गैस की कीमत करीब 75 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 110 रुपये प्रति तक पहुंच गई है. इस बढ़ोतरी ने कोल्ड स्टोरेज संचालकों की लागत को काफी बढ़ा दिया है. जब स्टोरेज महंगा होता है तो उसका असर सीधे किसानों और बाजार कीमतों पर पड़ता है.

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किसानों पर बढ़ रहा है दबाव

पहले से ही कम दाम और उत्पादन की चुनौतियों से जूझ रहे  किसानों के लिए यह स्थिति और मुश्किल बन गई है. आलू को लंगे समय तक सुरक्षित रखने के लिए किसानों को कोल्ड स्टोरेज पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन अब बढ़ती लागत उनकी कमाई पर असर डाल रही है. कोल्ड स्टोरेज संचालकों का कहना है कि गैस के महंगे होने के साथ-साथ बिजली और मजदूरी की लागत भी बढ़ रही है, जिससे भंडारण शुल्क बढ़ाने की नौबत आ सकती है. इसका सीधा बोझ किसानों पर पड़ेगा.

सप्लाई और कीमतों पर असर संभव

अगर कोल्ड स्टोरेज में आलू और दूसरी सब्जियां सुरक्षित नहीं रह पाई तो बाजार में उनकी कमी हो सकती है. ऐसे में कीमतों में तेजी आना तय माना जा रहा है. यही वजह है कि सरकार भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि सप्लाई प्रभावित न हो. कुछ मामलों में समय रहते अमोनिया की उपलब्धता सुनिश्चित कर सप्लाई चेन को बनाए रखने की कोशिश भी की गई है, जिससे बड़े नुकसान और महंगाई को टाला जा सके.

फर्टिलाइजर उत्पादन पर भी असर

मिडिल ईस्ट के हालात का असर सिर्फ कोल्ड स्टोरेज तक सीमित नहीं है. गैस  आपूर्ति प्रभावित होने से देश में यूरिया उत्पादन भी घटा है. सामान्य स्तर की तुलना में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि सरकार ने वैकल्पिक इंतजामों के जरिए सप्लाई को संतुलित रखने की बात कही है. गैस, एलएनजी और दूसरे इनपुट लागत बढ़ने से उर्वरकों की कीमतों और सब्सिडी पर भी दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर खेती की लागत पर पड़ेगा.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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