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जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण से खास बातचीत। ABP Ganga
आ अब लौट चलें की हमारी ये मुहिम अब हम समापन की ओर आ गई हैं...एबीपी गंगा की इस मुहिम का मकसद यही है कि पलायन कर चुके लोग इस दिवाली अपने घर जाएं... और एक दीया ज़रूर जलाएं.. इस मुहिम में एबीपी गंगा ने उत्तराखंड के गढ़वाल- कुमाउं में होते पलायन पर दर्द भरी तस्वीरें दिखाई... खाली होते गांवों की व्यथा सुनाई... और अब मुहिम के समापन के मौक़े पर हमारे साथ एक ख़ास शख्सियत जुड़ी है.... बांद अमरावती, नथुली, तौंसा बौ, सरुली मेरू जिया लगीगे, नारैंणी दुर्गा भवानी..मेरा मुलुक चली घूमी ऐली... जैसे कई गीत लिखने वाले... उत्तराखंड को सही मायनों में जीने वाले शख्स, उत्तराखंड की वाद्य परंपरा, ढोल सागर, जागर-पांवड़ों की परंपरा को ना सिर्फ जीवित रखने वाले बल्कि उसे आगे बढ़ाने वाली शख्सियत... जिन्होंने उत्तराखंड की दशा पर गीत लिखे... आज उनको सुनने के बाद आपको अपने गांव की याद ज़रूर आने वाली है... जी हां... उत्तराखंड का यशोगान करने वाली ये आवाज़ है... जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण जी की...
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