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सरकार के फेस्टिवल ऑफर का सच जानिए, राहत के नाम पर आर्थिक चाल को समझिए । Master Stroke
ये वही सरकार है जो कोरोना के नाम पर कर्मचारियों का डीए यानी महंगाई भत्ता नहीं दे पा रही है, ये वही सरकार है जिसने पिछले कुछ महीने में 21 लाख करोड़ का पैकेज देने का एलान किया लेकिन ये पैकेज एक तरह के कर्ज से ज्यादा कुछ नहीं है. मतलब लोगों के हाथ में आया कुछ नहीं और उनके नाम के आगे लग गया सरकारी मदद का ठप्पा - मतलब मर्ज कुछ और है और सरकार इलाज कुछ और कर रही है. क्या सरकार का ये तरीका अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला पाएगा या फिर ये सिर्फ आंकड़ों का धोखा है.
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