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सोनू ने दहशत में डर के मारे जान गंवा दी, तस्लीमा के हाथों की मेहंदी अभी लाल ही थी और अशफाक चला गया !
दंगे के दौरान भले ही घरों के नेमप्लेट, दुकानों के बोर्ड देखकर तबाही और आगजनी की जाती हो लेकिन ये हिंसा जब खत्म होती है, तब पता चलता है कि दंगे में ना हिंदू मरा ना मुसलमान, मरा तो सिर्फ इंसान.
अपनों को खोकर रोते हुए किसी बच्चे को देखकर क्या आप बता सकते हैं कि वो राम कुमार का बेटा है या रहीम खान का. दंगे के इस दर्द ने सबपर हमला किया है.
अपनों को खोकर रोते हुए किसी बच्चे को देखकर क्या आप बता सकते हैं कि वो राम कुमार का बेटा है या रहीम खान का. दंगे के इस दर्द ने सबपर हमला किया है.
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श्रीप्रकाश सिंह, प्रोफेसरकुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, गढ़वाल उत्तराखंड
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