ट्रेनों के टॉयलेट में अब नहीं मिलेंगी चेन वाले मग, जानें रेलवे ने क्यों किया बदलाव?
रेल मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन को निर्देश किया है कि टॉयलेट में फर्श के पास लगे पानी के नल और चेन से बंधे स्टील मग हटा दिया जाए. उनकी जगह जेट स्प्रे लगाए जाएंगे.

अगर आपने भी कभी ट्रेन से सफर किया है तो ट्रेन के टॉयलेट में चेन से बंधा स्टील का मग जरूर देखा होगा. जनरल कोच, स्लीपर कोच या एसी कोच हो लगभग हर डिब्बे के टॉयलेट चेन से बंधे स्टील के मग की यह व्यवस्था आम रही है. लेकिन ट्रेन में अब यह नजारा बदलने वाला है. दरअसल रेलवे ने टॉयलेट से चेन वाले स्टेनलेस स्टील मग को हटाने का फैसला लिया है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि ट्रेनों के टॉयलेट में अब चेन वाले मग क्यों नहीं मिलेंगे और रेलवे ने यह बदलाव क्यों किया है.
रेलवे ने क्यों किया यह बदलाव?
रेल मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया है कि टॉयलेट में फर्श के पास लगे पानी के नल और चेन से बंधे स्टील मग हटा दिया जाए. उनकी जगह जेट स्प्रे लगाए जाएंगे. अधिकारियों के अनुसार ट्रेन की तेज रफ्तार के दौरान मग में पानी भरते समय काफी पानी फर्श पर गिर जाता था. इससे टॉयलेट का फर्श गीला रहता था और यात्रियों के जूते-चप्पलों से गंदगी फैल जाती थी. वहीं समय के साथ प्लास्टिक फर्श असमतल हो जाता है, जिससे छोटे-छोटे गड्ढों में पानी जमा होकर बदबू और अस्वच्छता की समस्या बढ़ती थी. वहीं यात्रियों से इस व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें भी मिल रही थी.
ट्रेन में कैसे शुरू हुई थी मग की व्यवस्था?
भारत में शुरुआती दौर में ट्रेनों के टॉयलेट में केवल एक नल होता था. वहीं बाद में एसी कोचों में सुविधा बढ़ाने के लिए स्टील का मग रखा जाने लगा. लेकिन मग चोरी होने की घटनाएं सामने आने के बाद इन्हें चेन से बांध दिया गया. यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही थी. नई व्यवस्था लागू करने से पहले रेलवे मंत्रालय ने उत्तर रेलवे में इसका ट्रायल कराया. वहीं दिल्ली और अंबाला मंडलों ने नॉर्दन रेलवे के तहत चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में जेट स्प्रे लगाने का ट्रायल किया. इस दौरान फर्श के पास लगे नलों को डमी प्लग से बंद किया गया और चेन वाले मग हटा दिए गए. ट्रायल में पाया गया कि टॉयलेट का फर्श पहले की तुलना में ज्यादा सूखा और साफ रहने लगा. पानी जमा होने की शिकायतों में भी कमी आई.
रेलवे की क्या है आगे की योजना?
रेल मंत्रालय ने सभी जोनों अपनी चुनी हुई 10 ट्रेनों के एसी कोचों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने को कहा है. वहीं तीन महीने बाद अनुपालन रिपोर्ट और प्रदर्शन संबंधी फीडबैक मांगा गया है. उत्तर रेलवे ने मंत्रालय को जानकारी दी है कि 182 शताब्दी कोचों में पहले ही जेट स्प्रे लगाए जा चुके हैं और चेन वाले मग हटा दिए गए हैं. वहीं रेलवे अधिकारियों का मानना है कि इस बदलाव से टॉयलेट में पानी जमा होने की समस्या कम होगी और सफाई के मानक बेहतर होंगे.
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