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Secular India में चुनाव के वक्त निजी आस्था की नुमाइश क्यों? | संविधान की शपथ
चुनाव में जहां सरकारों के कामकाज को कसौटी पर कसा जाना था, वहां पर चर्चा हो रही है धर्म की...बात हो रही है गोत्र की. यही नहीं, पश्चिम बंगाल से लेकर असम तक नेताओं में मंदिर-मंदिर जाने की होड़ मची है.. संविधान की शपथ में इसीलिए आज हम चर्चा करने जा रहे हैं कि धर्मनिरपेक्ष देश के चुनाव प्रचार में धर्म का बोलबाला क्या सही है?
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संविधान की शपथ

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