सुनो सरकार ! कब तक सहें महंगाई की मार? चुनाव में महंगाई मुद्दा क्यों नहीं है? Ghanti Bajao
आज बात देश की संसद की होगी, सांसद की होगी और महंगाई की होगी. जी वही महंगाई जिसने सबका जीना मुहाल कर दिया है. हां कुछ सुविधा संपन्न तबका होगा जो महंगाई से सीधा प्रभावित नहीं होता होगा लेकिन कमोबेश हर नागरिक महंगाई के चढ़ते सेंसेक्स से बेदम है. हैरानी इस बात कि जिन्हें हम अपना रहनुमा मानते हैं, जिन्हें अपनी तकदीर संवारने के लिए हम चुनकर संसद में भेजते हैं वो महंगाई से मरती जनता से बेपरवाह हैं. क्या सत्ता पक्षा और क्या विपक्ष. संसद के मौजूदा सत्र में राज्यसभा के निर्धारित 95 घंटे में से 49 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए...लोकसभा में भी 19 घंटे बर्बाद किए गए और सबसे चौंकाने वाली बात ये कि लगातार पांच दिनों तक सूचीबद्ध रहने के बावजूद महंगाई पर लोकसभा में चर्चा शुरू तक नहीं हो पाई.
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