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आपके बैग में रखा गैजेट कहीं जेल न पहुंचा दे! साथ रखना पड़ सकता है भारी

हर देश के अलग-अलग नियम होते हैं. इस कारण जो गैजेट एक देश में कॉमन होता है, वही दूसरे देश में बैन होता है. सैटेलाइट फोन, डैशकैम और ड्रोन इसके कुछ उदाहरण हैं.

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  • भारत समेत कई देशों में सैटेलाइट फोन सुरक्षा कारणों से प्रतिबंधित हैं।
  • ड्रोन और डैशकैम कई जगहों पर अनुमति या जुर्माने के साथ उपयोग होते हैं।
  • वॉकी-टॉकी, VPN भी कई देशों में नियंत्रित-प्रतिबंधित किए गए हैं।

आज टेक्नोलॉजी का दौर है और हर कोई गैजेट यूज कर रहा है. गैजेट हमारे जीवन को आसान बनाते हैं और कई बार मुश्किल स्थिति में पड़ने से भी बचा लेते हैं. इसके बावजूद हर जगह हर गैजेट को यूज नहीं किया जा सकता. सैटेलाइट फोन जैसे कॉमन माने जाने वाले कई गैजेट कई देशों में बैन हैं. अगर बैन के बावजूद कोई इन्हें यूज करते हुए पाया जाता है तो उसे जेल भी भेजा जा सकता है. आज हम आपके लिए ऐसे ही गैजेट्स की जानकारी लेकर आए हैं, जो कुछ देशों में कॉमन हैं, लेकिन कुछ देशों में गैर-कानूनी भी हैं.

सैटेलाइट फोन- ट्रैवलिंग करने वाले लोग सैटेलाइट फोन का खूब यूज करते हैं. यह बिना मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में भी सैटेलाइट की मदद से कनेक्टिविटी और दूसरे फीचर ऑफर करता है. अमेरिका आदि देशों में सैटेलाइट फोन कॉमन है, लेकिन भारत समेत कई देशों में इस पर पाबंदी लगी हुई है.

ड्रोन्स- पिछले कुछ सालों में ड्रोन्स का यूज बढ़ा है. भारत की बात करें तो शादियों से लेकर टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक की वीडियो बनाने के लिए ड्रोन्स को धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हर देश में ऐसा नहीं है. इजिप्ट में कोई विदेशी टूरिस्ट ड्रोन लेकर नहीं घुस सकता है, वहीं मोरक्को में इसे यूज करने से पहले परमिशन लेनी पड़ती है.

डैशकैम- भारत समेत कई देशों में डैशकैम कॉमन होते जा रहे हैं. ये आसानी से अवेलेबल हैं और आप अपनी मर्जी से कोई भी मॉडल खरीदकर अपने व्हीकल में यूज कर सकते हैं. पर कई देशों में डैशकैम आपको मुश्किल में फंसा सकता है. पुर्तगाल, लग्जमबर्ग और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में डैशकैम यूज करने पर जुर्माना लगता है. यहां डैशकैम को प्राइवेसी का उल्लंघन करने वाले डिवाइस के तौर पर ट्रीट किया जाता है.

वॉकी-टॉकी- वॉकी-टॉकी को यूज करना कई लोगों को आकर्षित कर सकता है. भारत में भी सिक्योरिटी पर्पज के लिए वॉकी-टॉकी यूज करना आम है. लेकिन कई देशों में इसे यूज करना इतना आसान नहीं है. यूएई की बात करें तो यहां वॉकी-टॉकी यूज करने से पहले परमिट लेना होता है. इसी तरह थाईलैंड में एक खास फ्रीक्वैंसी पर ही इन्हें ऑपरेट किया जा सकता है. अगर कोई दूसरी फ्रीक्वैंसी यूज करता हो तो उसका डिवाइस जब्त किया जा सकता है.

VPN- इंटरनेट यूज करते समय प्राइवेसी को प्रोटेक्ट करने के लिए वीपीएन का यूज किया जाता है. यह यूजर डिवाइस और सर्वर के बीच एक एनक्रिप्टेड टनल क्रिएट कर देता है, जिससे सर्विस प्रोवाइडर यह नहीं देख सकता कि आप किस वेबसाइट पर विजिट कर रहे हैं. पाकिस्तान, रूस और तुर्किये समेत कई देशों में इस पर बैन लगा हुआ है. 

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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