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बारिश की बूंदों से कैसे बन सकती है बिजली? जानें नई तकनीक का दावा

अब तक सोलर पैनल से बिजली बनाने के लिए धूप को सबसे जरूरी माना जाता रहा है, लेकिन अब बारिश की बूंदों से भी बिजली पैदा करने की तकनीक पर काम हो रहा है. जानिए आखिर बारिश की एक बूंद से बिजली कैसे बनती है.

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  • तकनीक अभी प्रयोगशाला में, छोटे उपकरणों को शक्ति देगी.

अब तक सोलर एनर्जी का नाम सुनते ही धूप और सोलर पैनल का ख्याल आता था, लेकिन वैज्ञानिक अब बारिश को भी बिजली बनाने के एक सोर्स के तौर पर देख रहे हैं. स्पेन के सेविले में रिसर्चर्स ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें बारिश की बूंदों की स्पीड से बिजली पैदा करने की कोशिश की गई है. इसके लिए सोलर पैनल की सतह पर सिर्फ 100 नैनोमीटर पतली एक विशेष कोटिंग का इस्तेमाल किया गया है.

रिसर्चर्स के मुताबिक, यह सिस्टम धूप और बारिश दोनों से एनर्जी हासिल करने की दिशा में काम करता है. हालांकि फिलहाल इसके नतीजे लैब टेस्ट तक सीमित हैं और असली सोलर पैनलों पर इसका परीक्षण होना बाकी है. 

बारिश की बूंदों से कैसे बन सकती है बिजली? 

इस तकनीक के पीछे Triboelectric Effect काम करता है. जब दो सतहें आपस में टकराकर अलग होती हैं तो उनके बीच इलेक्ट्रिक चार्ज का आदान-प्रदान होता है. इसी का इस्तेमाल बारिश की बूंदों के साथ किया गया है.  जब बारिश की बूंद विशेष रूप से तैयार की गई फ्लोरीनेटेड सतह पर गिरती है और फिर उस पर फिसलती है, तो पानी और सतह पर अलग-अलग इलेक्ट्रिक चार्ज पैदा होते हैं. बूंद के सिर्फ सतह पर पड़े रहने से बिजली नहीं बनती है. चार्ज तब पैदा होता है जब बूंद सतह पर आगे बढ़ती है, जिससे सर्किट में करंट पैदा हो सकता है. 

100 नैनोमीटर की कोटिंग है खास

रिसर्चर्स ने 100 नैनोमीटर मोटी फ्लोरीनेटेड पॉलीमर कोटिंग तैयार की है. यह 90 फीसदी से ज्यादा ट्रांसपेरेंट है, इसलिए बारिश न होने पर सोलर सेल तक धूप पहुंचने में बड़ी रुकावट नहीं आती है. टेस्टिंग में एक बारिश की बूंद से 110 वोल्ट तक का पीक वोल्टेज पैदा होने की बात सामने आई है. ऐसे में बारिश के दौरान सोलर पैनल अपनी सामान्य सोलर पावर के साथ बारिश की बूंदों से अतिरिक्त इलेक्ट्रिकल आउटपुट हासिल करने की कोशिश कर सकता है. 

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Perovskite Solar Cells के साथ इस्तेमाल

इस तकनीक को Halide Perovskite सोलर सेल्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. ये सेल ज्यादा रोशनी सोखने और हाई एफेसियंसी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इन सोलर सेल्स की एक बड़ी कमी यह है कि नमी से ये जल्दी प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में यह खास कोटिंग दो काम एक साथ कर सकती है. एक तरफ यह Perovskite सेल को पानी से बचाने में मदद करती है, वहीं दूसरी तरफ बारिश की बूंदों से एनर्जी हासिल करने का रास्ता भी देती है. 

कहां आ सकती है काम?

इस तकनीक से फिलहाल इतनी बिजली पैदा होने की उम्मीद नहीं है कि पूरे घर के डिवाइस चलाए जा सकें, लेकिन इसका इस्तेमाल रिमोट सेंसर, वेदर मॉनिटरिंग स्टेशन, हाईवे साइनेज और छोटी ऑक्सिलरी लाइट्स जैसी चीजों को पावर देने में किया जा सकता है. हालांकि अभी यह तकनीक लैब में ही टेस्ट हुई है. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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