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नए बच्चों को कैसे भोंट बुद्धि बना रहा एआई, क्यों Gen-Z में कम देखने को मिल रहा IQ?

AI Impact on Gen-Z IQ: एआई ने हर काम को आसान बना दिया है और इसका असर IQ पर भी नजर आ रहा है. Gen-Z पहली ऐसी जनरेशन है, जो IQ के मामले में अपने से पहली जनरेशन से पीछे है.

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  • Gen-Z का IQ माता-पिता से कम, तकनीकी निर्भरता कारण।
  • Gen-Z के बुनियादी ध्यान, स्मृति, गणित कौशल में गिरावट।
  • AI से तत्काल उत्तर, सोचने-याद रखने की क्षमता प्रभावित।

AI Impact on Gen-Z IQ: Gen-Z ऐसी पहली जनरेशन है, जिसका IQ अपने पैरेंट्स की तुलना में कम है. दुनिया के टॉप न्यूरोसाइंटिस्ट में से एक Dr. Jared Cooney Horvath का कहना है कि 1997-2010 के बीच पैदा हुई जनरेशन ऐसी पहली जनरेशन बन गई है, जिसने एकेडमिक्स में अपने पैरेंट्स से खराब प्रदर्शन किया है. उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी पर ज्यादा निर्भरता के कारण यह हाल हुआ है. इससे भी चिंताजनक यह है कि कई इस जनरेशन के लोगों को लगता है कि वो बहुत स्मार्ट हैं. सोशल मीडिया और एआई जैसी टेक्नोलॉजी को इसके पीछे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. 

इन मामलों में पिछड़े Gen-Z

पिछले कई दशकों से कॉग्नेटिव डेवलपमेंट पर नजर रखी जा रही है. इसमें पहली बार Gen Z को लेकर ऐसा हुआ है, जब उन्होंने बेसिक अटेंशन, मेमोरी, लिट्रेसी, मैथ्स स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग एबिलिटी और जनरल IQ के मामले में अपने से पहली जनरेशन के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया है. यह तब है, जब बच्चे 20वीं सदी के बच्चों के मुकाबले ज्यादा समय स्कूल में रह रहे हैं. Horvath का कहना है कि ऐसा एजुकेशन टेक्नोलॉजी के कारण हो रहा है. अब टैबलेट और कंप्यूटर आम हो गए हैं और रियल लर्निंग के लिए जगह नहीं बची है. स्टूडेंट्स घंटों तक टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर वीडियो स्क्रॉल करते रहते हैं. अब वो किताबें पढ़ने की जगह शॉर्ट वीडियोज में ही उनकी समरी देख रहे हैं.

एआई ने कैसे डाला असर?

Gen-Z ऐसी पहली जनरेशन है, जो मानव इतिहास की सबसे पावरफुल मानी जा रही है एआई टेक्नोलॉजी के दौर में जी रही है. एक प्रॉम्प्ट पर एआई एक्सप्लेन, कैलकुलैट, समराइज, डिजाइन और कोडिंग कर सकती है. रीजनिंग के मामले में भी यह सुपरफास्ट है. ये सारी चीजें आज से 10 साल पहले तक कल्पना लगती थी. अब जब हर सवाल का जवाब एक प्रॉम्प्ट दूर है तो याद रखने और सोचने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है. हालांकि, इसके पीछे Gen-Z को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता. यह जनरेशन एक ऐसी दुनिया में जी रही है, जहां सब कुछ आसान हो गया है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. हर टेक्नोलॉजिकल एडवांस्मेंट के साथ ऐसा होता है. प्रिंटिंग प्रेस आने के बाद याद रखने की जरूरत खत्म हो गई. कैलकुलैटर ने मेंटल अर्थमैटिक को बदल दिया, जबकि इंटरनेट ने इंफोर्मेशन का पूरा गेम ही चेंज कर दिया. इसी तरह अब एआई नॉलेज को एक्सेस करने और जरनेट करने का पूरा मामला बदल रही है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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