उत्तराखंड में बाघों के हमलों ने बढ़ाई चिंता, 1 साल में हुईं सात मौतें, आसपास के इलाकों में दहशत
Uttarakhand News: उत्तराखंड के रामनगर में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बाघों के हमले से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है, एक साल की भीतर सात लोगों की मौत हो चुकी हैं.

उत्तराखंड के रामनगर वन प्रभाग और विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बाघ के हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले एक साल के भीतर बाघ के हमलों में सात लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. जनवरी 2025 से जनवरी 2026 तक के आंकड़े वन विभाग और स्थानीय लोगों दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं.
ताजा मामला 18 जनवरी 2026 का है, जब रामनगर वन प्रभाग की कोसी रेंज में एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया. जांच के दौरान घटनास्थल के आसपास बाघिन और उसके दो शावकों के पंजों के निशान मिले हैं. आशंका जताई जा रही है कि इसी बाघिन ने व्यक्ति को अपना शिकार बनाया. वन विभाग ने क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए हैं और उच्चाधिकारियों को घटना की सूचना दे दी गई है.
बाघ के हमले में हुई मौतों से बढ़ी चिंता
इससे पहले 7 जनवरी 2025 को कोसी रेंज में शांति देवी की बाघ के हमले में मौत हुई थी. इसके दो दिन बाद, 9 जनवरी 2025 को उसी रेंज में भुवन चंद्र बेलवाल को बाघ ने मार डाला. इसी दिन कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के सांवल्दे क्षेत्र में प्रेम सिंह भी बाघ का शिकार बने. 26 मई 2025 को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के हल्दुआ क्षेत्र में विनोद कुमार को बाघ ने जान से मार दिया था.
नए साल की शुरुआत भी भयावह रही. 2 जनवरी 2026 को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज में लकड़ी बीनने गई 65 वर्षीय सुखिया देवी पत्नी चंदन सिंह पर बाघ ने हमला कर उनकी जान ले ली. इसके दो दिन बाद 4 जनवरी 2026 को रामनगर वन प्रभाग की कोटा रेंज में श्रमिक अभिमन्यु बाघ के हमले में मारे गए.
बाघों के हमले से ग्रामीणों में दहशत
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में भारी दहशत है. सर्दियों के मौसम में कुमाऊं क्षेत्र में वन्यजीवों के हमले बढ़ गए हैं. 12 नवंबर से अब तक बाघ और तेंदुए 10 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं. हालात ऐसे हैं कि शाम ढलते ही गांवों में सन्नाटा छा जाता है। लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं और कई इलाकों में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं.
रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया ने बताया कि घटनास्थल पर मिले पंजों के निशानों से बाघिन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है. कैमरा ट्रैप के माध्यम से निगरानी की जा रही है और उच्चाधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. वहीं, ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा व्यवस्था और गश्त बढ़ाने की मांग की है, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके.
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